भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 800 अंक टूट गया और निफ्टी 25,500 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली, रुपये की कमजोरी, कमजोर ग्लोबल संकेत और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाया।

शेयर बाजार में आज (24 फरवरी) जोरदार गिरावट देखने को मिली। दो दिनों की तेजी के बाद बाजार का मूड अचानक बदल गया और निवेशकों में घबराहट साफ नजर आई। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स करीब 800 अंक तक टूट गया जबकि निफ्टी 25,500 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली, कमजोर ग्लोबल संकेत, रुपये की कमजोरी और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने मिलकर बाजार पर दबाव बना दिया। करीब 10:15 बजे सेंसेक्स 790 अंकों की गिरावट के साथ 82,500 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी भी लगभग 230 अंक टूटकर 25,500 के नीचे पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी आधा प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। चलिए जानते हैं कि आखिर बाजार क्यों धड़ाम हुआ।
आज की गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3% तक टूट गया। दरअसल, अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने दावा किया है कि उसका नया टूल पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को कम लागत में अपडेट कर सकता है। इससे पारंपरिक आईटी कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से आईटी कंपनियों की कमाई पर दबाव आ सकता है। इसी चिंता में आईटी शेयरों में जमकर बिकवाली हुई।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 90.96 के स्तर तक पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव डाला। जब रुपया कमजोर होता है तो विदेशी निवेशकों का भरोसा थोड़ा डगमगाता है। हालांकि एफआईआई की खरीदारी से गिरावट कुछ हद तक संभली लेकिन करेंसी में कमजोरी का असर शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया।
एशियाई बाजारों में सुस्ती और अमेरिका के Wall Street में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ट्रेड टैरिफ को लेकर सख्त बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो दूसरे व्यापार कानूनों के तहत और ज्यादा टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस बयान से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। जब ग्लोबल माहौल कमजोर होता है तो भारतीय बाजार भी दबाव में आ जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude का दाम करीब 1% बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। तेल महंगा होने से व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी निवेशकों की चिंता बढ़ा देती है और बाजार पर नकारात्मक असर डालती है।
मंगलवार को निफ्टी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी भी थी। एक्सपायरी वाले दिन बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है क्योंकि ट्रेडर्स अपने फ्यूचर्स और ऑप्शंस सौदों को या तो बंद करते हैं या अगले हफ्ते के लिए रोलओवर करते हैं। इस वजह से दिनभर बाजार में तेज हलचल देखने को मिली और गिरावट और गहरी हो गई।
डिस्क्लेमरः चेतना मंच यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।