सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार की शुरुआत कमजोर रही। सुबह करीब 9:16 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,166.20 अंक यानी 1.58 फीसदी गिरकर 72,417.02 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 भी 333.35 अंक यानी 1.46 फीसदी टूटकर 22,486.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।

घरेलू शेयर बाजार में एक बार फिर तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 1,100 अंकों से ज्यादा गिर गया जबकि निफ्टी 22,500 के नीचे फिसल गया। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है। निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बना हुआ है और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार की शुरुआत कमजोर रही। सुबह करीब 9:16 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,166.20 अंक यानी 1.58 फीसदी गिरकर 72,417.02 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 भी 333.35 अंक यानी 1.46 फीसदी टूटकर 22,486.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले शुक्रवार को भी बाजार में भारी गिरावट देखी गई थी। पिछले सत्र में सेंसेक्स 1,690.23 अंक टूटकर 73,583 पर बंद हुआ था जबकि निफ्टी 486 अंक गिरकर 22,819 पर बंद हुआ था। लगातार दो दिनों की गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। खासकर छोटे निवेशकों में बेचैनी बढ़ती दिख रही है।
आज की गिरावट सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एक्सिस बैंक और इटरनल के शेयरों में सबसे ज्यादा तीन फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं कोटक बैंक, एसबीआई और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर भी दो फीसदी से ज्यादा टूट गए। ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 1.95 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 2.31 फीसदी तक फिसल गया। इससे साफ है कि बाजार में सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं बल्कि मझोली और छोटी कंपनियां भी दबाव में हैं।
सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। निफ्टी बैंक और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा कमजोर रहे। बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली का असर पूरे बाजार पर पड़ा क्योंकि यह सेक्टर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकते नजर आ रहे हैं जिससे बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव बढ़ गया है।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 फीसदी बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 100 डॉलर के ऊपर कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब भी पहुंच गई थी। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है और कंपनियों की लागत भी बढ़ती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका द्वारा ईरान में ग्राउंड फोर्सेज उतारने की संभावना ने तनाव को और बढ़ा दिया है। खबर है कि अमेरिका लंबे समय तक ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। यूएस सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि मिडिल ईस्ट में यूएसएस त्रिपोली के साथ 3,500 मरीन और सेलर्स तैनात किए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। इस खबर ने वैश्विक बाजारों में भी डर का माहौल बना दिया है।
वैश्विक तनाव का असर सिर्फ भारतीय बाजार पर ही नहीं बल्कि एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला। जापान का शेयर बाजार शुरुआती कारोबार में करीब 5 फीसदी तक गिर गया। वहीं, यूरोप में जेट फ्यूल की कीमतें कुछ ही हफ्तों में करीब 100 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं। इन सभी घटनाओं ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ा दी है और यही वजह है कि बाजार में लगातार बिकवाली हो रही है।
बाजार की मौजूदा स्थिति निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रही है। वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए रखनी चाहिए।