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गुरुवार को बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों की सतर्कता देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 275 अंक टूटकर 74,070 के आसपास पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी कमजोरी के साथ 23,327 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार की सुबह निवेशकों के लिए ज्यादा उत्साहजनक नहीं रही। कारोबार की शुरुआत होते ही बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। हालांकि इस बीच रुपये ने मजबूती दिखाते हुए डॉलर के मुकाबले बढ़त हासिल की जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत जरूर मिली।
गुरुवार को बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों की सतर्कता देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 275 अंक टूटकर 74,070 के आसपास पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी कमजोरी के साथ 23,327 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की यह सुस्ती बताती है कि निवेशक फिलहाल किसी बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
बाजार खुलने से पहले ही संकेत मिल गए थे कि दिन की शुरुआत कमजोर रहने वाली है। प्री-ओपन सेशन में सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा नीचे दिखाई दे रहा था जबकि निफ्टी भी 23,270 के नीचे फिसल गया था। इससे साफ था कि विदेशी बाजारों से आए नकारात्मक संकेत घरेलू निवेशकों के मूड पर असर डाल रहे हैं।
जहां शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला वहीं भारतीय मुद्रा ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 95.69 के स्तर पर पहुंच गया। आमतौर पर रुपये की मजबूती को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। इससे आयात लागत पर दबाव कम हो सकता है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ सकता है।
यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र है जब बाजार दबाव में दिखाई दिया। इससे पहले बुधवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए थे। हालांकि दिन के आखिरी घंटों में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से कुछ रिकवरी देखने को मिली थी लेकिन बाजार नुकसान से बाहर नहीं निकल सका। बुधवार को सेंसेक्स 303 अंक से ज्यादा टूटकर 74,346 पर बंद हुआ था जबकि निफ्टी 23,405 के स्तर पर आ गया था।
बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। निवेशकों ने टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में जमकर बिकवाली की जिसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे ज्यादा कमजोर रहा। इसके अलावा रियल्टी, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया और सर्विस सेक्टर के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे साफ है कि कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि कई सेक्टरों में इसका असर दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है और वे किसी भी बड़े निवेश फैसले से पहले बाजार के अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
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