शिपवेव्स ऑनलाइन के ₹12 वाले शेयर BSE SME पर लिस्ट होते ही लोअर सर्किट में पहुंच गए। जानिए Shipwaves IPO में निवेशकों को कितना नुकसान हुआ, सब्सक्रिप्शन स्टेटस, शेयर प्राइस, कंपनी का बिजनेस मॉडल, वित्तीय सेहत और IPO से जुटाए गए पैसों का पूरा इस्तेमाल।

शेयर बाजार में आईपीओ निवेशकों के लिए लिस्टिंग डे सबसे अहम होता है क्योंकि यहीं से यह तय होता है कि निवेश फायदे में जाएगा या नुकसान में। लेकिन Shipwaves Online Digital Freight Forwarding IPO में पैसा लगाने वाले खुदरा निवेशकों को लिस्टिंग के पहले ही दिन बड़ा झटका लगा। ₹12 के इश्यू प्राइस पर आए इस आईपीओ के शेयर न तो कोई लिस्टिंग गेन दे पाए और न ही बाजार में टिक पाए। लिस्ट होते ही शेयर लोअर सर्किट में पहुंच गया जिससे निवेशकों में निराशा साफ नजर आई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर Shipwaves IPO की लिस्टिंग इतनी कमजोर क्यों रही और कंपनी की असली कारोबारी सेहत कैसी है।
Shipwaves Online के शेयर आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुए। कंपनी ने आईपीओ में ₹12 प्रति शेयर का भाव तय किया था और उसी कीमत पर इसकी लिस्टिंग भी हुई लेकिन असली झटका इसके बाद लगा, जब शेयर टूटकर सीधे ₹11.40 के लोअर सर्किट पर आ गया। इसका मतलब यह हुआ कि लिस्टिंग के पहले ही दिन निवेशक करीब 5% के नुकसान में चले गए। SME सेगमेंट में यह गिरावट निवेशकों के भरोसे को कमजोर करने वाली मानी जा रही है।
Shipwaves Online का ₹56.35 करोड़ का आईपीओ 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। हालांकि इसे निवेशकों से बहुत मजबूत प्रतिक्रिया नहीं मिली। कुल मिलाकर यह आईपीओ सिर्फ 1.64 गुना सब्सक्राइब हुआ। सबसे कमजोर हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का रहा, जो केवल 0.36 गुना ही भर पाया। वहीं खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी अपेक्षाकृत ज्यादा रही और उनका कोटा 2.92 गुना सब्सक्राइब हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक, संस्थागत निवेशकों की कम भागीदारी का असर लिस्टिंग पर साफ दिखाई दिया।
इस आईपीओ के तहत कंपनी ने ₹1 फेस वैल्यू वाले कुल 4.69 करोड़ से ज्यादा नए शेयर जारी किए हैं। IPO से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने में लगाएगी। लगभग ₹7.35 करोड़ LMS (लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम) में नए फीचर्स जोड़ने, नए प्रोडक्ट्स और कोर्स डेवलप करने और लैपटॉप जैसी तकनीकी जरूरतों की खरीद पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा ₹5 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए रखे गए हैं जबकि बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों में उपयोग होगी।
Shipwaves Online की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। यह कंपनी डिजिटल फ्रेट फारवर्डिंग और एंटरप्राइज SaaS सॉल्यूशंस के क्षेत्र में काम करती है। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए कंपनी एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है जहां सड़क, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज मिलती हैं। कंपनी का फोकस मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन को आसान और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाना है जिससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों और एंटरप्राइज क्लाइंट्स को ऑपरेशन्स में सुविधा मिले।
अगर Shipwaves Online की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो आंकड़े ग्रोथ की कहानी जरूर बताते हैं। वित्त वर्ष 2023 में कंपनी ने ₹2.24 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया था। यह मुनाफा वित्त वर्ष 2024 में बढ़कर ₹6.29 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹12.20 करोड़ तक पहुंच गया। इसी दौरान कंपनी की कुल आय भी तेजी से बढ़ी और सालाना 25% से अधिक की CAGR के साथ ₹108.65 करोड़ तक पहुंच गई। चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने ₹4.68 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹41.71 करोड़ की कुल आय दर्ज की है। हालांकि सितंबर 2025 के अंत तक कंपनी पर कुल ₹40.04 करोड़ का कर्ज भी था जबकि रिजर्व और सरप्लस ₹21.32 करोड़ रहा। यही कर्ज का स्तर निवेशकों के लिए चिंता का एक कारण माना जा रहा है।
Shipwaves IPO की कमजोर लिस्टिंग ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ ग्रोथ नंबर ही बाजार को खुश नहीं कर पाते। SME सेगमेंट में निवेश करते समय लिक्विडिटी, निवेशकों की भागीदारी और वैल्यूएशन बेहद अहम हो जाते हैं। कंपनी का बिजनेस मॉडल और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पोटेंशियल भले ही मजबूत दिखता हो लेकिन शॉर्ट-टर्म में शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी के आगामी नतीजों और कर्ज की स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। चेतना मंच की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)