साल 2025 निवेश की दुनिया के लिए बेहद दिलचस्प रहा जहां चांदी ने रिकॉर्ड तोड़ 107% रिटर्न देकर सबको चौंका दिया, वहीं सोने ने भी 68% की मजबूत बढ़त दिखाई। दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार FPI निकासी और वैश्विक दबाव के कारण कमजोर प्रदर्शन करता रहा।

साल 2025 भारतीय निवेशकों के लिए भावनाओं और रिटर्न का मिला-जुला सफर रहा। इस साल सबसे ज्यादा चर्चा में सोना और चांदी रहे। दोनों ने ऐसा धमाल किया कि हर निवेशक का ध्यान इन पर आकर टिक गया। वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार पूरे साल वैश्विक अनिश्चितता और FPI निकासी से जूझता रहा।
अगर किसी ने इस साल सबसे ज्यादा चौंकाया है तो वह है चांदी। साल की शुरुआत में जहां चांदी की कीमत करीब 86,000–87,000 रुपये प्रति किलो थी, वहीं दिसंबर में यह सीधे 1,80,000 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर पहुंच गई। पिछले कई दशकों में ऐसा उछाल देखने को नहीं मिला था। इस बड़ी बढ़त के पीछे वजहें भी बेहद मजबूत हैं सोलर पैनल इंडस्ट्री में चांदी की भारी मांग, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती जरूरत और ग्रीन एनर्जी की तेज रफ्तार। इतना ही नहीं भारत ने सिर्फ साल के पहले चार महीनों में ही 4,172 MT चांदी का आयात कर लिया जो 2023 के पूरे साल के मुकाबले भी ज्यादा था।
साल की शुरुआत में सोना 73,000–75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में था जो दिसंबर आते-आते 1,30,000 रुपये तक पहुंच गया। 1979 के बाद सोने का यह सबसे शानदार साल माना जा रहा है। ग्लोबल मार्केट में भी सोना लगातार चढ़ता रहा और इसकी कीमतों को भारत में और ज्यादा सपोर्ट मिला क्योंकि रुपये ने डॉलर के मुकाबले करीब 5% की गिरावट देखी।
इन दोनों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन काफी फीका रहा। सेंसेक्स ने पूरे साल में सिर्फ 5.30% रिटर्न दिया जबकि निफ्टी 50 ने 6.38% रिटर्न कमाया। ग्लोबल बेंचमार्क की तुलना में भी भारत का मार्केट सबसे नीचे रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह FPI की भारी निकासी रही। 2025 में अब तक विदेशी निवेशक लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इसके अलावा वैश्विक मंदी की चिंता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगे वैल्यूएशन जैसी वजहों ने भी मार्केट को संभलने नहीं दिया।