Silver Price 2026 में चांदी ने एक साल में 276% की छलांग लगाई। हाल ही में कीमतों में करेक्शन भी आया है। Geojit की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक सप्लाई डिफिसिट और मजबूत निवेश मांग कीमतों को सपोर्ट दे रहे हैं। ज्वैलरी मांग में गिरावट के बावजूद औद्योगिक और फिजिकल निवेश मांग में इजाफा देखने को मिल सकता है।

साल 2026 की शुरुआत में चांदी ने एक नया रिकॉर्ड बनाया। जनवरी में इसका भाव 100 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया और कई ऑल टाइम हाई दर्ज किए गए। हालांकि इसके बाद करेक्शन आया और कीमतों में लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके बावजूद सालाना आधार पर चांदी की कीमतों में 276 प्रतिशत तक की मजबूती बनी हुई है।
Geojit Investments Limited की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में भी चांदी की वैश्विक सप्लाई मांग से कम रहेगी। यह लगातार छठा साल है जब बाजार में डिफिसिट की स्थिति बनी रहेगी। कुल मांग अधिक रहने की वजह से वैश्विक स्तर पर तंगी बनी रह सकती है। माइन प्रोडक्शन में हल्की बढ़ोतरी और रीसाइक्लिंग में 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है लेकिन कुल जरूरत इससे ज्यादा है।
जियोजीत की रिपोर्ट बताती है कि साल 2026 में ज्वैलरी मांग में 9 प्रतिशत और सिल्वरवेयर में 17 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल सकती है। सोलर सेक्टर में खपत कम होने की वजह से औद्योगिक मांग में 2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। हालांकि डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और एआई जैसे सेक्टर लंबी अवधि की मांग को सहारा देंगे।
फिजिकल निवेश की मांग इस साल लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर 227 मिलियन औंस तक पहुंच सकती है। यह पिछले तीन साल का उच्च स्तर है। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से चांदी के भाव को सपोर्ट मिलेगा और बाजार में स्थिरता आएगी।
चीन ने 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू किए हैं। अमेरिका ने चांदी को क्रिटिकल मिनरल्स सूची में शामिल किया है। इन कदमों से चांदी की रणनीतिक अहमियत बढ़ गई है। इसका असर वैश्विक सप्लाई पर भी पड़ सकता है। MCX में चांदी का 2,55,000 रुपये प्रति किलो का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर कीमत इसके नीचे गिरती है, तो शॉर्ट टर्म में दबाव बढ़ सकता है। वहीं लंदन स्पॉट और MCX सिल्वर रेंज बाउंड रह सकते हैं। लॉन्ग टर्म ट्रेंड पॉजिटिव है और संभावित ट्रेडिंग रेंज 62 से 100 डॉलर प्रति औंस के बीच मानी गई है।
जनवरी में गोल्ड-सिल्वर रेशियो 50 से नीचे चला गया था जो 2012 के बाद पहली बार हुआ। फिलहाल यह करीब 58.83 के आसपास है। कम रेशियो दर्शाता है कि चांदी ने गोल्ड के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। डिजिटलाइजेशन, एआई विस्तार, डेटा सेंटर की मांग और भू-राजनीतिक तनाव जैसी थीम्स चांदी को सहारा दे सकती हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फेड की नीति, डॉलर की चाल और वैश्विक लिक्विडिटी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Disclaimer: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।