किसानों और ग्रामीणों की लगेगी लॉटरी! हो रही है बड़ी तैयारी
Budget 2026-27: Budget 2026-27 में किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए बड़े ऐलान किए जाने की संभावना है। सरकार ग्रामीण रोजगार, आवास और सड़क योजनाओं पर फोकस बढ़ाने की तैयारी कर रही है। MGNREGS और PMAY-G जैसी योजनाओं में डबल-डिजिट बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

आने वाला बजट 2026-27 ग्रामीण भारत के लिए कई मायनों में खास साबित हो सकता है। सरकार इस बार शहरी विकास के साथ-साथ गांवों और किसानों पर अपना फोकस और मजबूत करने की तैयारी में है। बढ़ती महंगाई, कमजोर ग्रामीण मांग और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए सरकार की रणनीति साफ नजर आ रही है। गांवों में पैसा पहुंचेगा, काम बढ़ेगा और उसी के साथ देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी। संकेत मिल रहे हैं कि बजट में ग्रामीण रोजगार, आवास और सड़क योजनाओं के लिए दो अंकों की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट में संभावित बड़ा इजाफा
वर्तमान वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 1.88 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था जो पिछले साल के मुकाबले करीब 8 फीसदी ज्यादा था। अब 2026-27 के बजट में इस हिस्से को और मजबूत करने की तैयारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ग्रामीण इलाकों के लिए प्रमुख योजनाओं में डबल-डिजिट ग्रोथ देने पर विचार कर रही है ताकि गांवों में निवेश बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिले।
रोजगार योजना में बदलाव की तैयारी
ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी MGNREGS की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G योजना लाने का प्रस्ताव है। इस नई योजना के तहत 2026-27 में 95,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है। नए कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए मौजूदा साल के संशोधित अनुमान के मुकाबले करीब 11 फीसदी ज्यादा बजट दिए जाने की संभावना है जिससे ग्रामीण मजदूरों की आमदनी बढ़ाने पर जोर रहेगा।
ग्रामीण आवास और सड़कों पर खास ध्यान
सरकार का मानना है कि ग्रामीण आवास और सड़क जैसी योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर हाई मल्टीप्लायर प्रभाव पड़ता है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए 54,832 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। इन दोनों योजनाओं में 2026-27 में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। गांवों में पक्के घर और बेहतर सड़कें न सिर्फ जीवन स्तर सुधारती हैं बल्कि स्थानीय रोजगार और मांग को भी बढ़ावा देती हैं।
मौजूदा साल में क्यों कम रहा खर्च?
रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में कुछ योजनाओं में खर्च उम्मीद से कम रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और ग्राम सड़क योजना में संशोधित अनुमान के तहत बजट में कटौती की जा सकती है, क्योंकि नए चरण के लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान में ज्यादा समय लग गया। इसी वजह से घरों के निर्माण और सड़क परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई।
3 करोड़ घरों का लक्ष्य और आगे की जरूरत
कैबिनेट ने 2024 में देशभर में पांच साल में 3 करोड़ नए घर बनाने के लिए 3.06 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी थी। इनमें से 2 करोड़ घर ग्रामीण इलाकों में PMAY-G के तहत बनाए जाने हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 3.51 मिलियन घर पूरे करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब तक करीब 1.8 मिलियन घर ही बन पाए हैं। हालांकि, लाभार्थियों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है और आने वाले महीनों में निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है जिसके लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ेगी।
ग्रामीण सड़कों से जुड़े नए प्लान
ग्रामीण सड़कों के मोर्चे पर भी सरकार बड़े प्लान के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के लिए सितंबर 2024 में पांच साल का 70,125 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया गया था। नए चरण में शामिल होने वाले गांवों की सूची तैयार करने में देरी के कारण इस साल खर्च कम रहा लेकिन अगले वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत काम में तेजी आने की संभावना है।
ग्रामीण बजट से बढ़ेगी मांग और विकास
ग्रामीण इलाकों में बढ़ता सरकारी खर्च स्थायी संपत्तियों के निर्माण में मदद करेगा, जिससे अंदरूनी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। रोजगार योजनाओं से ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ेगी वहीं आवास और सड़क परियोजनाएं लंबे समय तक आर्थिक विकास को सहारा देंगी। कुल मिलाकर कहें तो बजट 2026-27 ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद और नए अवसर लेकर आ सकता है।
आने वाला बजट 2026-27 ग्रामीण भारत के लिए कई मायनों में खास साबित हो सकता है। सरकार इस बार शहरी विकास के साथ-साथ गांवों और किसानों पर अपना फोकस और मजबूत करने की तैयारी में है। बढ़ती महंगाई, कमजोर ग्रामीण मांग और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए सरकार की रणनीति साफ नजर आ रही है। गांवों में पैसा पहुंचेगा, काम बढ़ेगा और उसी के साथ देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी। संकेत मिल रहे हैं कि बजट में ग्रामीण रोजगार, आवास और सड़क योजनाओं के लिए दो अंकों की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट में संभावित बड़ा इजाफा
वर्तमान वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 1.88 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था जो पिछले साल के मुकाबले करीब 8 फीसदी ज्यादा था। अब 2026-27 के बजट में इस हिस्से को और मजबूत करने की तैयारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ग्रामीण इलाकों के लिए प्रमुख योजनाओं में डबल-डिजिट ग्रोथ देने पर विचार कर रही है ताकि गांवों में निवेश बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिले।
रोजगार योजना में बदलाव की तैयारी
ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी MGNREGS की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G योजना लाने का प्रस्ताव है। इस नई योजना के तहत 2026-27 में 95,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है। नए कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए मौजूदा साल के संशोधित अनुमान के मुकाबले करीब 11 फीसदी ज्यादा बजट दिए जाने की संभावना है जिससे ग्रामीण मजदूरों की आमदनी बढ़ाने पर जोर रहेगा।
ग्रामीण आवास और सड़कों पर खास ध्यान
सरकार का मानना है कि ग्रामीण आवास और सड़क जैसी योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर हाई मल्टीप्लायर प्रभाव पड़ता है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए 54,832 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। इन दोनों योजनाओं में 2026-27 में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। गांवों में पक्के घर और बेहतर सड़कें न सिर्फ जीवन स्तर सुधारती हैं बल्कि स्थानीय रोजगार और मांग को भी बढ़ावा देती हैं।
मौजूदा साल में क्यों कम रहा खर्च?
रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में कुछ योजनाओं में खर्च उम्मीद से कम रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और ग्राम सड़क योजना में संशोधित अनुमान के तहत बजट में कटौती की जा सकती है, क्योंकि नए चरण के लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान में ज्यादा समय लग गया। इसी वजह से घरों के निर्माण और सड़क परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई।
3 करोड़ घरों का लक्ष्य और आगे की जरूरत
कैबिनेट ने 2024 में देशभर में पांच साल में 3 करोड़ नए घर बनाने के लिए 3.06 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी थी। इनमें से 2 करोड़ घर ग्रामीण इलाकों में PMAY-G के तहत बनाए जाने हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 3.51 मिलियन घर पूरे करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब तक करीब 1.8 मिलियन घर ही बन पाए हैं। हालांकि, लाभार्थियों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है और आने वाले महीनों में निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है जिसके लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ेगी।
ग्रामीण सड़कों से जुड़े नए प्लान
ग्रामीण सड़कों के मोर्चे पर भी सरकार बड़े प्लान के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के लिए सितंबर 2024 में पांच साल का 70,125 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया गया था। नए चरण में शामिल होने वाले गांवों की सूची तैयार करने में देरी के कारण इस साल खर्च कम रहा लेकिन अगले वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत काम में तेजी आने की संभावना है।
ग्रामीण बजट से बढ़ेगी मांग और विकास
ग्रामीण इलाकों में बढ़ता सरकारी खर्च स्थायी संपत्तियों के निर्माण में मदद करेगा, जिससे अंदरूनी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। रोजगार योजनाओं से ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ेगी वहीं आवास और सड़क परियोजनाएं लंबे समय तक आर्थिक विकास को सहारा देंगी। कुल मिलाकर कहें तो बजट 2026-27 ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद और नए अवसर लेकर आ सकता है।












