चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई है और सोना भी 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। डॉलर की कमजोरी, ग्लोबल टेंशन और ब्याज दरों की उम्मीदों ने सोना-चांदी की कीमतों में आग लगा दी है।

सर्राफा बाजार में इस समय जो हो रहा है उसने आम लोगों से लेकर निवेशकों तक सभी को हैरान कर दिया है। चांदी ने इतिहास रचते हुए पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर लिया है वहीं सोना भी 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंचकर नए रिकॉर्ड बना रहा है। शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन से पहले आई इस तूफानी तेजी ने खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल हर किसी के मन में है आखिर सोना और चांदी अचानक इतने महंगे क्यों हो गए?
चांदी की कीमतों में आई तेजी ने बाजार के जानकारों को भी चौंका दिया है। एमसीएक्स (MCX) पर चांदी का भाव बढ़कर 4,07,456 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। दिल्ली समेत देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में भी चांदी ने अपना ऑल-टाइम हाई दर्ज किया है। हैरानी की बात यह है कि 4 लाख रुपये के स्तर को छूने के लिए चांदी को सिर्फ 15 हजार रुपये की जरूरत थी, जिसे उसने महज 24 घंटे में पूरा कर लिया। इससे पहले एक ही दिन में चांदी के भाव में 40,500 रुपये की बड़ी छलांग देखने को मिली थी।
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतें भी लगातार ऊपर चढ़ रही हैं। एमसीएक्स पर सोना 1,75,869 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना एक दिन में करीब 5,000 रुपये महंगा होकर 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। इस तेजी के चलते सोने की खरीदारी करना आम लोगों के लिए और मुश्किल हो गया है।
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की कमजोरी मानी जा रही है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सोना और चांदी जैसे विकल्पों की ओर रुख करते हैं जिससे इनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।
दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध जैसी स्थितियां और व्यापारिक अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में शेयर बाजार और करेंसी को जोखिम भरा माना जाता है। यही वजह है कि लोग सोना और चांदी को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर इसमें पैसा लगा रहे हैं जिससे कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में अटकलें तेज हैं। भले ही फिलहाल दरें स्थिर रहने की उम्मीद हो लेकिन आने वाले समय में कटौती की संभावना जताई जा रही है। ब्याज दरें घटने पर सोना और चांदी ज्यादा आकर्षक निवेश बन जाते हैं क्योंकि इन पर किसी तरह का ब्याज नहीं देना पड़ता।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डॉलर में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक सोना और चांदी ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा संभव है इसलिए निवेश से पहले सोच-समझकर फैसला लेना जरूरी है। आम खरीदारों के लिए फिलहाल हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं लेकिन निवेशकों की नजर में सोना और चांदी अब भी सबसे भरोसेमंद विकल्प बने हुए हैं।