लोन लेने वाले ध्यान दें! पहले RBI का बड़ा फैसला जान लें
RBI Monetary Policy 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। इस फैसले से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में तुरंत राहत की उम्मीद कर रहे लोगों को झटका लगा है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने FY27 के लिए महंगाई के अनुमान को बढ़ाया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक (Monetary Policy Meeting) हमेशा आम लोगों, निवेशकों और लोन लेने वालों के लिए बेहद अहम होती है। खासतौर पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले लोग रेपो रेट में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं क्योंकि इससे EMI कम होने की संभावना बनती है लेकिन फरवरी 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में RBI ने इन उम्मीदों पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है।
रेपो रेट क्या रहा और RBI ने क्या फैसला लिया?
RBI ने ताजा मॉनेटरी पॉलिसी के बाद साफ किया है कि रेपो रेट में इस बार कोई कटौती नहीं की जाएगी। मौजूदा रेपो रेट 5.25% ही रहेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना सस्ता नहीं हुआ है और इसलिए आम लोगों की EMI में भी फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब लोग ब्याज दरों में और कमी की उम्मीद कर रहे थे।
महंगाई को लेकर RBI क्यों है सतर्क?
भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने FY27 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4% और दूसरी तिमाही के लिए 4.2% कर दिया है। पहले माना जा रहा था कि महंगाई और तेजी से काबू में आएगी लेकिन नए आंकड़े थोड़ा अलग संकेत दे रहे हैं। इसी वजह से RBI ने ब्याज दरों में बदलाव न करने का फैसला किया है। RBI का मानना है कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखना अभी प्राथमिकता है।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी के बाद कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है। हाल के समय में हुए कई अहम सौदों और नीतिगत फैसलों से देश की ग्रोथ का आउटलुक पॉजिटिव नजर आ रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि RBI फिलहाल संतुलित रुख अपनाना चाहता है ताकि महंगाई और विकास दोनों के बीच सही तालमेल बना रहे।
रेपो रेट कटौती की उम्मीद क्यों कम थी?
एक्सपर्ट्स पहले से ही मान रहे थे कि फरवरी 2026 की मीटिंग में रेपो रेट में कटौती की संभावना कम है। इसकी बड़ी वजह केंद्रीय बजट 2026 रहा जिसमें सरकार ने कैपेक्स को 12% तक बढ़ाने और राजकोषीय घाटे को 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, वैश्विक माहौल भी थोड़ा बेहतर हुआ है। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिए हैं और भारत-EU FTA से ट्रेड और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इन सभी पॉजिटिव संकेतों के बीच RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखना ही बेहतर समझा।
बीते एक साल में कितनी बार घटा था रेपो रेट?
अगर पिछले साल की बात करें तो RBI ने आम लोगों को अच्छी-खासी राहत दी थी। फरवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच कुल चार बार रेपो रेट में कटौती की गई थी जिससे कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कमी आई। फरवरी और अप्रैल 2025 में 0.25-0.25% की कटौती हुई, जून 2025 में 0.50% की बड़ी कटौती की गई और अगस्त-अक्टूबर में रोक के बाद दिसंबर 2025 में फिर 0.25% की कटौती की गई थी। इसी वजह से लोन की EMI में बड़ा फर्क देखने को मिला था।
आम लोगों और EMI पर इसका क्या असर होगा?
रेपो रेट में इस बार कोई बदलाव न होने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI फिलहाल उसी स्तर पर बनी रहेगी। जिन लोगों को उम्मीद थी कि EMI और कम होगी उन्हें थोड़ी निराशा जरूर हो सकती है। हालांकि, RBI का यह फैसला महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
अगर आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े बेहतर रहते हैं और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो भविष्य में RBI ब्याज दरों में कटौती पर दोबारा विचार कर सकता है। फिलहाल RBI का फोकस सतर्क नीति अपनाने और अर्थव्यवस्था को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने पर है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक (Monetary Policy Meeting) हमेशा आम लोगों, निवेशकों और लोन लेने वालों के लिए बेहद अहम होती है। खासतौर पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले लोग रेपो रेट में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं क्योंकि इससे EMI कम होने की संभावना बनती है लेकिन फरवरी 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में RBI ने इन उम्मीदों पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है।
रेपो रेट क्या रहा और RBI ने क्या फैसला लिया?
RBI ने ताजा मॉनेटरी पॉलिसी के बाद साफ किया है कि रेपो रेट में इस बार कोई कटौती नहीं की जाएगी। मौजूदा रेपो रेट 5.25% ही रहेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना सस्ता नहीं हुआ है और इसलिए आम लोगों की EMI में भी फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब लोग ब्याज दरों में और कमी की उम्मीद कर रहे थे।
महंगाई को लेकर RBI क्यों है सतर्क?
भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने FY27 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4% और दूसरी तिमाही के लिए 4.2% कर दिया है। पहले माना जा रहा था कि महंगाई और तेजी से काबू में आएगी लेकिन नए आंकड़े थोड़ा अलग संकेत दे रहे हैं। इसी वजह से RBI ने ब्याज दरों में बदलाव न करने का फैसला किया है। RBI का मानना है कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखना अभी प्राथमिकता है।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी के बाद कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है। हाल के समय में हुए कई अहम सौदों और नीतिगत फैसलों से देश की ग्रोथ का आउटलुक पॉजिटिव नजर आ रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि RBI फिलहाल संतुलित रुख अपनाना चाहता है ताकि महंगाई और विकास दोनों के बीच सही तालमेल बना रहे।
रेपो रेट कटौती की उम्मीद क्यों कम थी?
एक्सपर्ट्स पहले से ही मान रहे थे कि फरवरी 2026 की मीटिंग में रेपो रेट में कटौती की संभावना कम है। इसकी बड़ी वजह केंद्रीय बजट 2026 रहा जिसमें सरकार ने कैपेक्स को 12% तक बढ़ाने और राजकोषीय घाटे को 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, वैश्विक माहौल भी थोड़ा बेहतर हुआ है। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिए हैं और भारत-EU FTA से ट्रेड और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इन सभी पॉजिटिव संकेतों के बीच RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखना ही बेहतर समझा।
बीते एक साल में कितनी बार घटा था रेपो रेट?
अगर पिछले साल की बात करें तो RBI ने आम लोगों को अच्छी-खासी राहत दी थी। फरवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच कुल चार बार रेपो रेट में कटौती की गई थी जिससे कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कमी आई। फरवरी और अप्रैल 2025 में 0.25-0.25% की कटौती हुई, जून 2025 में 0.50% की बड़ी कटौती की गई और अगस्त-अक्टूबर में रोक के बाद दिसंबर 2025 में फिर 0.25% की कटौती की गई थी। इसी वजह से लोन की EMI में बड़ा फर्क देखने को मिला था।
आम लोगों और EMI पर इसका क्या असर होगा?
रेपो रेट में इस बार कोई बदलाव न होने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI फिलहाल उसी स्तर पर बनी रहेगी। जिन लोगों को उम्मीद थी कि EMI और कम होगी उन्हें थोड़ी निराशा जरूर हो सकती है। हालांकि, RBI का यह फैसला महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
अगर आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े बेहतर रहते हैं और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो भविष्य में RBI ब्याज दरों में कटौती पर दोबारा विचार कर सकता है। फिलहाल RBI का फोकस सतर्क नीति अपनाने और अर्थव्यवस्था को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने पर है।












