तगड़ी सब्सक्रिप्शन के बाद भी गिरा शेयर, Biopol Chemicals ने पहले दिन क्यों तोड़ी उम्मीदें?

Biopol Chemicals: Biopol Chemicals की NSE SME पर लिस्टिंग 3% प्रीमियम के साथ 111 रुपये पर हुई, लेकिन कुछ ही देर में शेयर 5% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया। 108 रुपये के इश्यू प्राइस वाला यह 31.26 करोड़ रुपये का IPO कुल 22.33 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

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locationभारत
userअसमीना
calendar13 Feb 2026 12:48 PM
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NSE SME प्लेटफॉर्म पर आज Biopol Chemicals की लिस्टिंग निवेशकों के लिए मिली-जुली रही। शेयर 108 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 2.7% प्रीमियम के साथ 111 रुपये पर लिस्ट हुआ जिससे शुरुआत में निवेशकों को हल्का फायदा दिखा। लेकिन लिस्टिंग के कुछ ही समय बाद बिकवाली बढ़ी और शेयर करीब 5% गिरकर 105.45 रुपये पर पहुंच गया जहां लोअर सर्किट लग गया। इस तरह पहले दिन ही शेयर ने उतार-चढ़ाव भरा प्रदर्शन दिखाया।

IPO निवेशकों के बीच जबरदस्त डिमांड

कंपनी का 31.26 करोड़ रुपये का IPO निवेशकों के बीच जबरदस्त डिमांड में रहा और कुल 22.33 गुना सब्सक्राइब हुआ। यह इश्यू 6 फरवरी को खुला था और 10 फरवरी को बंद हुआ। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 21.05 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का 24.49 गुना और रिटेल निवेशकों का हिस्सा 20.80 गुना भरा गया। इससे साफ है कि संस्थागत और रिटेल दोनों वर्गों में इस IPO को अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। कंपनी ने इस इश्यू के तहत करीब 29 लाख नए शेयर जारी किए।

कंपनी के पास है कुल 66 प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो

Biopol Chemicals स्पेशियलिटी केमिकल्स से जुड़ी कंपनी है जो सिलिकॉन, इमल्सीफायर, बायोकेमिकल्स और पॉलीइलेक्ट्रोलाइट कैटेगरी में मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करती है। कंपनी के पास कुल 66 प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो है। इनमें 40 सिलिकॉन-बेस्ड, 5 इमल्सीफायर-बेस्ड, 15 बायोकेमिकल और 6 पॉलीइलेक्ट्रोलाइट प्रोडक्ट शामिल हैं। इनका इस्तेमाल टेक्सटाइल, होम केयर, एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल केमिकल्स जैसी कई इंडस्ट्रीज में होता है। कंपनी का बिजनेस मॉडल B2B है यानी यह सीधे आम ग्राहकों को नहीं बल्कि संस्थागत क्लाइंट्स को सप्लाई करती है।

IPO से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल

IPO से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कंपनी इंडस्ट्रियल जमीन खरीदने, कर्ज चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी। इससे कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होने और भविष्य में विस्तार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान कंपनी की कुल आय 48.97 करोड़ रुपये रही जबकि शुद्ध मुनाफा 6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की कुल आय 49.15 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 4.33 करोड़ रुपये रहा। इस अवधि में कंपनी पर लगभग 15 करोड़ रुपये का कर्ज भी था। मुनाफे में सुधार यह संकेत देता है कि कंपनी अपने ऑपरेशन को बेहतर बना रही है, हालांकि कर्ज का स्तर निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। चेतना मंच की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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क्या ये बड़ी मंदी की आहट है? बाजार में अचानक आई तूफानी गिरावट

Stock Market Crash: अमेरिका से लेकर भारत तक शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया है। सेंसेक्स करीब 800 अंक और निफ्टी 200 अंक से अधिक टूट गया है जबकि आईटी सेक्टर के बड़े शेयर जैसे TCS, Infosys और HCL Tech में 5-6 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है।

Stock Market
आज शेयर बाजार में बड़ी गिरावट
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Feb 2026 10:46 AM
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हाल ही में वैश्विक शेयर बाजारों में अचानक और तेज गिरावट देखी गई है। अमेरिका के बाजारों से लेकर भारत तक निवेशकों के लिए यह संकटपूर्ण समय बन गया है। भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स लगभग 800 अंक टूटकर 82,902.73 पर और निफ्टी 200 अंकों की गिरावट के साथ 25,606.90 पर कारोबार कर रहा था। निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी नई तकनीकों का प्रभाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब सिर्फ तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है बल्कि यह वैश्विक स्तर पर विभिन्न उद्योगों के बिजनेस मॉडल पर असर डाल रहा है।

IT सेक्टर पर पड़ा गिरावट के सबसे बड़ा असर

भारतीय बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा असर IT सेक्टर पर पड़ा है। Infosys के शेयर लगभग 6% तक गिर गए हैं वहीं TCS में 5% से अधिक, HCL टेक में 4.14% और टेक महिंद्रा के शेयरों में करीब 3% की गिरावट देखी गई। BSE के टॉप 30 शेयरों में से 24 शेयरों में गिरावट रही जबकि केवल 6 शेयर मामूली तेजी पर बंद हुए। कुल 3,337 BSE शेयरों में से 2,327 शेयर गिरावट पर और 847 शेयर तेजी पर कारोबार कर रहे थे। इसके अलावा 41 शेयर 52 सप्ताह के हाई पर और 106 शेयर 52 सप्ताह के लोअर स्तर पर पहुंचे।

अमेरिकी बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट

वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अमेरिकी बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। Dow Jones 669.42 अंक या 1.34% गिरकर 49,451.98 पर बंद हुआ Nasdaq में सबसे ज्यादा गिरावट 2.03% या 469.32 अंक रही और S&P 500 इंडेक्स 1.57% या 108.71 अंक गिरकर 6,832.76 पर क्लोज हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी बाजार में हुई इस गिरावट से लगभग एक ट्रिलियन डॉलर (करीब 90 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति घट गई है।

वैश्विक बाजार में क्यों आई गिरावट?

विशेषज्ञों का कहना है कि AI टूल्स के तेजी से बढ़ते उपयोग से पारंपरिक व्यवसायों पर दबाव बढ़ रहा है। खासकर ट्रकिंग, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सॉफ्टवेयर सेक्टर में इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। निवेशक डर रहे हैं कि नई AI तकनीकें कंपनियों के मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में अचानक गिरावट आई है और भारतीय बाजार भी इसका असर झेल रहा है।

निवेशकों के लिए सलाह

निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस समय जल्दबाजी में शेयर बेचने के बजाय सतर्क रहें और बाजार की लंबी अवधि की संभावनाओं पर ध्यान दें। विशेषज्ञ मानते हैं कि AI का प्रभाव भविष्य में स्थायी रहेगा, लेकिन फिलहाल यह केवल संभावित अस्थिरता का संकेत दे रहा है।

(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने योग्यत वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।)

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क्रेडिट कार्ड बेचने से पहले 10 बार सोचेगा बैंक, RBI का नया आदेश

RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग और एक क्लिक सहमति की प्रक्रिया पर सख्ती करते हुए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। अब बैंक ग्राहकों को लोन, क्रेडिट कार्ड या इंश्योरेंस बेचते समय हर प्रोडक्ट के लिए अलग और स्पष्ट मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

RBI
RBI के नए मिस‑सेलिंग नियम क्या हैं?
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Feb 2026 11:16 AM
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग और डिजिटल एक क्लिक सहमति पर सख्ती करते हुए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। अगर आप बैंक से लोन लेते समय बिना आपकी सहमति के क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस या अन्य प्रोडक्ट्स पा रहे थे तो यह खबर आपके लिए है। RBI का मानना है कि ऐसे तरीके ग्राहक के हित में नहीं हैं। अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग से साफ और स्पष्ट मंजूरी लेना जरूरी होगा। इन नए नियमों से बैंकिंग सेल्स की पूरी रणनीति बदलने वाली है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।

बैंकों की मिस-सेलिंग पर रोक

अक्सर देखा गया है कि ग्राहक बैंक जाकर लोन या खाता खुलवाता है और उसे बिना पूरी जानकारी के इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड या क्रेडिट कार्ड थमा दिया जाता है। डिजिटल फॉर्म में एक ही I Agree बटन दबाने से कई प्रोडक्ट्स स्वचालित रूप से जुड़ जाते थे। RBI ने इसे ग्राहक हितों के खिलाफ माना और नए नियमों में यह साफ किया कि अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग मंजूरी जरूरी होगी।

ग्राहक की प्रोफाइल के अनुसार बिक्री

नए नियमों के अनुसार बैंक को यह जांचना होगा कि जो प्रोडक्ट वह बेच रहा है वह ग्राहक की आय, जरूरत और प्रोफाइल के अनुसार है या नहीं। उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राहक की आय सीमित है और उसे जटिल निवेश योजना दी जाती है तो इसे गलत बिक्री माना जाएगा। इसके अलावा, बैंक को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रोडक्ट उनकी खुद की सर्विस है या किसी तीसरे पक्ष की। इससे ग्राहकों को सही और पारदर्शी जानकारी मिलेगी।

एक क्लिक से मंजूरी का दौर खत्म

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब पहले से टिक किए गए बॉक्स या एक साथ कई शर्तों को स्वीकार करने का तरीका बंद हो जाएगा। हर प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग सहमति लेना जरूरी होगा। ग्राहक को स्पष्ट बताया जाएगा कि वह किस प्रोडक्ट के लिए हां कह रहा है और बैंक को इसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। यह कदम छुपे हुए एग्रीमेंट और उलझे हुए कंसेंट सिस्टम पर रोक लगाएगा।

डार्क पैटर्न पर सख्ती

RBI ने डिजिटल तरीकों को भी निशाना बनाया है जिन्हें डार्क पैटर्न कहा जाता है। ये ऐसे तरीके हैं जो ग्राहक को भ्रमित करते हैं जैसे पहले से टिक किए बॉक्स, दबाव बनाना या आज आखिरी मौका दिखाना। अब बैंकों को अपने ऐप और वेबसाइट की नियमित जांच करनी होगी और ऐसे भ्रामक फीचर्स हटाने होंगे। इससे डिजिटल बैंकिंग अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।

एजेंट की जिम्मेदारी भी बैंक पर

अक्सर बैंक शाखाओं में मौजूद एजेंट असली बैंक कर्मचारी नहीं होते लेकिन ग्राहक उन्हें कर्मचारी मान लेते हैं। नए नियमों के तहत बैंक को ऐसे थर्ड पार्टी एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी उनकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी बैंक की होगी और एजेंट को स्पष्ट करना होगा कि वह स्थायी बैंक कर्मचारी नहीं है। इसके अलावा, कॉल करने का समय सीमित होगा जिससे अनचाहे कॉल और दबाव वाली बिक्री में कमी आएगी।

गलत बिक्री पर कार्रवाई

अगर किसी बैंक ने प्रोडक्ट गलत तरीके से बेचा या पूरी जानकारी नहीं दी तो ग्राहक को पैसा लौटाना होगा। यदि ग्राहक को आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई भी करनी पड़ेगी। हर बिक्री के 30 दिनों में ग्राहक से फीडबैक लिया जाएगा और हर छह महीने में पूरी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। यह नियम बैंक की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे।

नियम कब से लागू होंगे?

यह अभी ड्राफ्ट गाइडलाइंस हैं। 4 मार्च 2026 तक सुझाव दिए जा सकते हैं और अंतिम नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। बैंकों को इससे पहले अपनी नीतियां, डिजिटल सिस्टम और एजेंट व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने होंगे।

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