बीते कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 77,290 के स्तर पर खुला और दिनभर तेजी के साथ आगे बढ़ता रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2,946 अंक यानी 3.95 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 77,562.90 पर बंद हुआ।

शेयर बाजार में बुधवार को आई जोरदार तेजी की खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। गुरुवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। बीएसई का सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही करीब 550 अंक फिसल गया जबकि एनएसई का निफ्टी भी लाल निशान में खुला। अचानक आई इस गिरावट ने बाजार का मूड पूरी तरह बदल दिया और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बीते कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 77,290 के स्तर पर खुला और दिनभर तेजी के साथ आगे बढ़ता रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2,946 अंक यानी 3.95 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 77,562.90 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी भी शानदार तेजी के साथ 23,997.35 के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार की इस रफ्तार ने निवेशकों को उम्मीद दी थी कि तेजी का सिलसिला जारी रहेगा लेकिन गुरुवार को हालात अचानक बदल गए।
गुरुवार को बाजार खुलने के साथ ही सेंसेक्स गिरावट के साथ नजर आया। शुरुआत में करीब 200 अंक गिरा और कुछ ही देर में 550 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 77,000 के नीचे पहुंच गया। निफ्टी भी कमजोर शुरुआत के साथ करीब 90 अंक गिरकर 23,909 पर खुला और कुछ ही देर में 23,815 तक फिसल गया। इस गिरावट ने बाजार में बिकवाली का माहौल बना दिया।
गिरावट के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयर दबाव में नजर आए। Infosys और Adani Ports के शेयर 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर खुले। इसके अलावा IndiGo और HDFC Bank जैसे बड़े शेयर भी गिरावट में कारोबार करते दिखाई दिए। मिडकैप शेयरों में Hindustan Petroleum, Coforge और Bharat Forge में भी कमजोरी रही। वहीं स्मॉलकैप शेयरों में Chola Holding और PGEL में भी गिरावट देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार के दौरान बाजार का रुख कमजोर नजर आया। लगभग 1,288 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ खुले जबकि 1,215 शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। करीब 174 कंपनियों के शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इस आंकड़े से साफ था कि बाजार में बिकवाली का दबाव ज्यादा था।
शेयर बाजार में अचानक आई गिरावट के पीछे वैश्विक संकेत अहम रहे। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की खबरों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए घोषित युद्धविराम के टूटने की खबरों ने बाजार में चिंता बढ़ा दी। इसके चलते एशियाई बाजार भी दबाव में नजर आए और इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
वैश्विक बाजार से मिले नकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार पर दबाव बनाया। क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं और यही वजह रही कि बाजार में गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ग्लोबल संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव का असर बाजार पर पड़ता रहेगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें। अचानक आई इस गिरावट ने साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों ही तेजी से बदल सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है और बाजार की हर चाल पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)