Stock Market: लगातार तीसरे सत्र में गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है।

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर कमजोर शुरुआत की। लगातार तीसरे सत्र में गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार के माहौल को दबाव में ला दिया है। ऐसे माहौल में निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए समझदारी से रणनीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है।
दुनिया भर के बाजारों में इस समय अस्थिरता बढ़ गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और यह 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के ऊपर बंद हुआ है। इसका असर सीधे शेयर बाजार पर पड़ा है क्योंकि महंगा तेल भारत जैसी आयात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात होती है। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली और प्रमुख इंडेक्स इस साल के नए निचले स्तर पर बंद हुए। एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का दबाव दिखा। इन संकेतों का असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर साफ दिखाई दिया।
बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। हाल के सत्र में उन्होंने कैश और फ्यूचर्स सेगमेंट मिलाकर 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की। जब विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकालते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है और सेंटीमेंट कमजोर हो जाता है।
मौजूदा हालात को देखते हुए निफ्टी में अभी भी दबाव बना हुआ है। तकनीकी स्तरों की बात करें तो ऊपर की तरफ कुछ अहम रेजिस्टेंस मौजूद हैं जबकि नीचे की तरफ सपोर्ट लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। ट्रेडिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर निफ्टी कमजोर स्तरों के नीचे बना रहता है तो गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में कई ट्रेडर्स उछाल आने पर भी बिकवाली की रणनीति अपना सकते हैं। हालांकि अगर बाजार कुछ अहम स्तरों के ऊपर टिक जाता है तो शॉर्ट कवरिंग की वजह से तेज उछाल भी देखने को मिल सकता है।
बैंकिंग सेक्टर भी इस समय कमजोर नजर आ रहा है। बैंक निफ्टी हाल के सत्र में अपने महत्वपूर्ण तकनीकी औसत से नीचे कारोबार कर रहा है। इस वजह से इसमें भी उछाल आने पर बिकवाली की रणनीति को ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक बैंक निफ्टी कुछ अहम रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर मजबूती से नहीं टिकता तब तक इसमें कमजोरी का माहौल बना रह सकता है। नीचे की तरफ कुछ अहम सपोर्ट स्तर ऐसे हैं जिन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
ऐसे अस्थिर बाजार में जल्दबाजी करने के बजाय धैर्य रखना जरूरी है। खासकर डे ट्रेडर्स के लिए यह जरूरी है कि वे साफ संकेत मिलने के बाद ही पोजिशन लें। बाजार में गैपडाउन खुलने की स्थिति में कई बार शुरुआती उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है इसलिए जल्दबाजी नुकसान करा सकती है। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है या कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो बाजार में अचानक रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। इसलिए ट्रेडिंग करते समय जोखिम प्रबंधन और सही स्तरों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।