सेंसेक्स करीब 800 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद गिरावट और तेज हो गई। करीब 10 बजे तक सेंसेक्स 900 अंक से अधिक टूटकर 74,347 के इंट्राडे लो पर पहुंच गया।

गुरुवार की छुट्टी के बाद शुक्रवार को जब भारतीय शेयर बाजार खुला, तो निवेशकों को बड़ा झटका लगा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही बाजार लाल निशान में चला गया और कुछ ही मिनटों में निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने बाजार के माहौल को पूरी तरह बदल दिया।
शुक्रवार को बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। सेंसेक्स करीब 800 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद गिरावट और तेज हो गई। करीब 10 बजे तक सेंसेक्स 900 अंक से अधिक टूटकर 74,347 के इंट्राडे लो पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 300 अंक गिरकर 23,026 के स्तर तक पहुंच गया। सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और पूरे बाजार में डर का माहौल बन गया।
बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 431 लाख करोड़ रुपये से घटकर 425 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यानी कुछ ही मिनटों में निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अचानक गिरावट वैश्विक अनिश्चितता का संकेत देती है जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है।
दुनिया भर के शेयर बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। अमेरिका के S&P 500 और Nasdaq Composite में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई। इसके अलावा एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का Kospi और जापान का Nikkei 225 भी करीब 2 फीसदी तक गिर गए। वैश्विक बाजारों में इस गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि अमेरिका 6 अप्रैल तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले टाल सकता है। हालांकि दूसरी ओर यह भी खबरें हैं कि इजराइल ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना चाहता है। इस तरह की विरोधाभासी खबरों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया। बाजार विशेषज्ञ वीके विजयकुमार का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। शेयर बाजार पहले से ही इस जोखिम को लेकर प्रतिक्रिया दे रहा है।
शेयर बाजार की गिरावट के साथ भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 94.15 के आसपास पहुंच गया, जो हाल के दिनों में सबसे कमजोर स्तरों में से एक है। पिछले महीने के मुकाबले रुपया करीब 3.5 फीसदी कमजोर हो चुका है। रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित होता है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ जाता है।
पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। तेल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ जाती है जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
बाजार में अचानक आई गिरावट ने साफ कर दिया है कि वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर तेजी से पड़ रहा है। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी बरतने का है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे माहौल में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा।