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इनमें एक मेनबोर्ड कैटेगरी का आईपीओ है जबकि दूसरा एसएमई सेगमेंट का होगा। खास बात यह है कि दोनों आईपीओ एक ही दिन खुलेंगे और एक ही दिन बंद भी होंगे। ऐसे में निवेशकों के सामने यह सवाल है कि आखिर किस आईपीओ में पैसा लगाना बेहतर रहेगा।

अगर आप शेयर बाजार में नए निवेश के मौके तलाश रहे हैं तो अगले हफ्ते आपके लिए अच्छी खबर है। आने वाले सप्ताह में दो नए आईपीओ खुलने जा रहे हैं जिनमें निवेशकों को पैसा लगाने का मौका मिलेगा। इनमें एक मेनबोर्ड कैटेगरी का आईपीओ है जबकि दूसरा एसएमई सेगमेंट का होगा। खास बात यह है कि दोनों आईपीओ एक ही दिन खुलेंगे और एक ही दिन बंद भी होंगे। ऐसे में निवेशकों के सामने यह सवाल है कि आखिर किस आईपीओ में पैसा लगाना बेहतर रहेगा।
अगले हफ्ते शेयर बाजार में सिटियस ट्रांसनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और मेहुल टेलीकॉम के आईपीओ लॉन्च होंगे। दोनों आईपीओ शुक्रवार 17 अप्रैल को खुलेंगे और मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को बंद हो जाएंगे। इससे निवेशकों को सीमित समय में फैसला लेना होगा कि किस इश्यू में आवेदन करना सही रहेगा।
सिटियस ट्रांसनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का आईपीओ मेनबोर्ड कैटेगरी में आएगा। इस आईपीओ का आकार करीब 1340 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। हालांकि, अभी तक कंपनी ने प्राइस बैंड और लॉट साइज की घोषणा नहीं की है जिससे निवेशकों की नजर इस अपडेट पर टिकी हुई है। ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP की बात करें तो फिलहाल इस आईपीओ का जीएमपी शून्य बताया जा रहा है। हालांकि, आईपीओ खुलने तक इसमें बदलाव हो सकता है। अक्सर देखा जाता है कि आईपीओ खुलने से पहले और बाद में GMP में तेजी या गिरावट देखने को मिलती है।
मेहुल टेलीकॉम का आईपीओ एसएमई कैटेगरी में आएगा। यह आईपीओ भी 17 अप्रैल को खुलेगा और 21 अप्रैल को बंद होगा। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए 96 से 98 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। वहीं, लॉट साइज 1200 शेयरों का रखा गया है। इस आईपीओ का कुल आकार करीब 27.73 करोड़ रुपये बताया गया है। फिलहाल इस आईपीओ का जीएमपी भी शून्य पर चल रहा है। हालांकि, जैसे-जैसे आईपीओ खुलने की तारीख करीब आएगी इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल दोनों आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम शून्य है। इसका मतलब है कि अभी निवेशकों के बीच किसी भी आईपीओ को लेकर ज्यादा उत्साह नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, यह स्थिति अस्थायी होती है और लिस्टिंग से पहले GMP में बदलाव आम बात है।निवेशकों को सिर्फ GMP के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति, बिजनेस मॉडल और भविष्य की संभावनाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।
आईपीओ का मतलब होता है जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए जारी करती है। इसके जरिए कंपनी बाजार से पैसा जुटाती है और निवेशकों को कंपनी में हिस्सेदारी मिलती है। आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की जानकारी, जोखिम और संभावनाओं को समझना जरूरी होता है।
अगले हफ्ते दोनों आईपीओ एक साथ खुलने से निवेशकों के पास विकल्प रहेगा। ऐसे में बेहतर होगा कि निवेशक जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी की पूरी जानकारी देखें। खासकर एसएमई आईपीओ में जोखिम थोड़ा ज्यादा होता है इसलिए सोच-समझकर निवेश करना बेहतर माना जाता है।
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