विज्ञापन
ATM Jackpotting Scam: क्या सिर्फ मोबाइल ऐप से ATM हैक हो सकता है? जानिए ATM Jackpotting कैसे काम करता है, हैकर्स किस तरह मशीन को निशाना बनाते हैं और भारत में कितना है इसका खतरा।

आज के समय में एटीएम (ATM) को पैसे निकालने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है लेकिन हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि मोबाइल ऐप या खास तकनीक की मदद से एटीएम मशीन को कंट्रोल किया जा सकता है। इन दावों ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई एटीएम मशीन को हैक किया जा सकता है? क्या कोई बिना कार्ड और बिना बैंक की मंजूरी के एटीएम से पैसा निकाल सकता है? सच्चाई यह है कि सामान्य परिस्थितियों में एटीएम मशीनें काफी सुरक्षित होती हैं और भारत में इस तरह के बड़े पैमाने पर ATM Jackpotting के मामले सामने नहीं आए हैं। हालांकि अमेरिका और कुछ अन्य देशों में इस तरह के साइबर हमलों की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि ATM Jackpotting Scam आखिर होता क्या है, हैकर्स इसे कैसे अंजाम देते हैं और इससे बैंक और आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।
ATM Jackpotting एक ऐसा साइबर अटैक है जिसमें हैकर्स एटीएम मशीन के अंदर मौजूद सिस्टम को मैलवेयर (Malware) से संक्रमित कर देते हैं। इसके बाद मशीन बैंक से अनुमति लिए बिना ही नकदी निकालने लगती है। इसमें किसी ग्राहक के बैंक खाते को सीधे निशाना नहीं बनाया जाता। हमला एटीएम मशीन के सिस्टम पर किया जाता है। आसान भाषा में कहें तो हैकर्स मशीन को इस तरह कंट्रोल कर लेते हैं कि वह उनकी कमांड पर कैश बाहर निकालने लगती है। यही वजह है कि इसे "Jackpotting" कहा जाता है क्योंकि मशीन लगातार कैश उगलने लगती है जैसे किसी स्लॉट मशीन में जैकपॉट लग गया हो।
ATM Jackpotting कोई सामान्य ऑनलाइन हैकिंग नहीं है। इसमें अपराधियों को अक्सर एटीएम मशीन तक फिजिकल एक्सेस हासिल करना पड़ता है। जांच एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, कई मामलों में हैकर्स मशीन का पैनल खोलकर उसकी हार्ड ड्राइव या USB पोर्ट तक पहुंच जाते हैं। इसके बाद वे उसमें मैलवेयर इंस्टॉल कर देते हैं या संक्रमित हार्ड ड्राइव लगा देते हैं। जब मशीन दोबारा शुरू होती है तो मैलवेयर एटीएम के कैश डिस्पेंसर को नियंत्रित करने लगता है। इसके बाद अपराधी एक खास कोड या कमांड के जरिए मशीन से कैश निकलवा लेते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कई बार बैंक के सर्वर से सामान्य अनुमति भी नहीं ली जाती।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में दावा किया जाता है कि सिर्फ मोबाइल ऐप के जरिए एटीएम को बंद, चालू या हैक किया जा सकता है लेकिन ऐसे दावों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सुरक्षित बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े एटीएम को सिर्फ मोबाइल ऐप के जरिए हैक कर लेना बेहद असामान्य और कठिन है। अधिकतर Jackpotting हमलों में मशीन तक सीधे पहुंच बनानी पड़ती है और उसमें तकनीकी छेड़छाड़ करनी होती है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हर वीडियो सच हो यह जरूरी नहीं है। कई वीडियो केवल व्यूज और वायरल होने के लिए भी बनाए जाते हैं।
फिलहाल भारत में ATM Jackpotting के बड़े और पुष्टि किए गए मामले बहुत कम सामने आए हैं। भारतीय बैंक समय-समय पर अपने एटीएम सॉफ्टवेयर को अपडेट करते रहते हैं और नई सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद साइबर अपराध लगातार नए तरीके खोज रहे हैं। इसलिए बैंक और सुरक्षा एजेंसियां एटीएम नेटवर्क की निगरानी लगातार करती रहती हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
कई लोग ATM Jackpotting और ATM Skimming को एक ही समझ लेते हैं जबकि दोनों पूरी तरह अलग हैं। ATM Skimming में अपराधी ग्राहक के कार्ड की जानकारी और PIN चुराने की कोशिश करते हैं। इसके लिए मशीन पर नकली डिवाइस लगाई जाती है। वहीं ATM Jackpotting में ग्राहक का कार्ड या बैंक खाता निशाना नहीं होता। इसमें सीधे एटीएम मशीन के सिस्टम पर हमला किया जाता है और मशीन से नकदी निकलवाई जाती है।
भले ही Jackpotting का हमला सीधे एटीएम मशीन पर होता है लेकिन साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। यदि किसी एटीएम का पैनल खुला हुआ दिखे, मशीन में कोई अतिरिक्त डिवाइस लगी हो या कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो वहां से लेनदेन करने से बचें और तुरंत संबंधित बैंक को जानकारी दें। साथ ही अपने बैंक खाते से जुड़े SMS और ट्रांजैक्शन अलर्ट हमेशा चालू रखें ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके।
बैंक ATM Jackpotting जैसे हमलों से बचने के लिए कई सुरक्षा उपाय अपनाते हैं। इनमें एटीएम सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करना, एंटी-मैलवेयर सिस्टम का इस्तेमाल, मशीनों की रिमोट मॉनिटरिंग, CCTV निगरानी और एटीएम कैबिन में सुरक्षा बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा कई बैंक अब ऐसे सेंसर भी इस्तेमाल कर रहे हैं जो मशीन से किसी तरह की छेड़छाड़ होने पर तुरंत अलर्ट भेज देते हैं।
विज्ञापन