देश में इस समय करीब 16 करोड़ महिलाएं सक्रिय रूप से लोन ले रही हैं। इसका मतलब है कि क्रेडिट तक पहुंच रखने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि यह एक सकारात्मक संकेत है लेकिन अभी भी कई महिलाएं ऐसी हैं जो औपचारिक बैंकिंग और लोन सुविधा से दूर हैं।

भारत में महिलाओं की भूमिका तेजी से बदल रही है। अब महिलाएं सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं हैं बल्कि बिजनेस की दुनिया में भी मजबूती से अपनी पहचान बना रही हैं। छोटे-छोटे घरेलू कामों से शुरुआत करने वाली महिलाएं अब बड़े कारोबार तक पहुंच रही हैं। यही वजह है कि देश में महिला उद्यमियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनकी आर्थिक भागीदारी भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 तक भारत में महिलाओं द्वारा लिया गया कुल लोन 76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह देश के कुल क्रेडिट का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा है। खास बात यह है कि साल 2017 के मुकाबले यह आंकड़ा करीब 4.8 गुना बढ़ चुका है। यह साफ संकेत है कि महिलाएं अब आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।
देश में इस समय करीब 16 करोड़ महिलाएं सक्रिय रूप से लोन ले रही हैं। इसका मतलब है कि क्रेडिट तक पहुंच रखने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि यह एक सकारात्मक संकेत है लेकिन अभी भी कई महिलाएं ऐसी हैं जो औपचारिक बैंकिंग और लोन सुविधा से दूर हैं। अगर उन्हें सही जानकारी और अवसर मिले तो यह संख्या और भी तेजी से बढ़ सकती है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी में डिजिटल सुविधाओं का बड़ा योगदान है। मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लोन आवेदन जैसी सुविधाओं ने महिलाओं के लिए रास्ते आसान कर दिए हैं। अब महिलाएं घर बैठे ही लोन के लिए आवेदन कर सकती हैं और बिना किसी झंझट के वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा सकती हैं। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे नए-नए बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिलाओं द्वारा लिए जाने वाले बिजनेस लोन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साल 2017 के बाद से महिला उद्यमियों के लोन पोर्टफोलियो में करीब 7.5 गुना की बढ़त दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि महिलाएं अब नौकरी के बजाय खुद का कारोबार शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। शुरुआत छोटे स्तर से होती है लेकिन धीरे-धीरे महिलाएं बड़े बिजनेस तक पहुंच रही हैं।
खास तौर पर 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में बिजनेस को लेकर उत्साह ज्यादा देखने को मिल रहा है। नई पीढ़ी की महिलाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बिजनेस और स्टार्टअप की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ रही है बल्कि वे परिवार और समाज में भी मजबूत पहचान बना रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करने के लिए उन्हें बेहतर वित्तीय जानकारी और आसान लोन सुविधाएं उपलब्ध करानी जरूरी हैं। अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो वे देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ा योगदान दे सकती हैं। आज महिलाएं सिर्फ अपने सपनों को पूरा नहीं कर रहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं। यह बदलाव न सिर्फ महिलाओं के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है।