
Ritu Maheshwari Exclusive, नोएडा: अपने तकरीबन 4 वर्ष के कार्यकाल में नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रितु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) विकास की कई इबारत लिख गईं। इस दौरान उन्होंने शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने में विकास के जो आयाम स्थापित किए हैं वह न सिर्फ यादगार होंगे बल्कि आने वाले शीर्ष अफसरों के लिए प्रेरक भी होंगे। इस दौरान उन्हें कुछ लोगों की स्वार्थपूर्ति न होने पर तथा कुछ मामलों में पूर्ण सफलता न मिलने पर आलोचना का भी शिकार होना पड़ा।
ऋतु माहेश्वरी[/caption]
सर्वविदित है कि सीईओ रितु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) का तबादला एक सामान्य शासकीय प्रक्रिया है। उनके तबादले के पीछे न तो कोई तत्कालिक कारण है और न ही उसके पीछे किसी विफलता का कोई आधार है। 15 जुलाई 2019 को नोएडा प्राधिकरण में बतौर सीईओ (CEO) कमान संभालने वाली यूपी कैडर की 2003 बैच की आईएएस अधिकारी रितु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) का कल शासन ने आगरा के मंडलायुक्त (कमिश्नर) के पद पर स्थानांतरण कर दिया है। उनके स्थान पर कानपुर के मंडलायुक्त तथा यूपी कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी लोकेश एम को नोएडा के सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नये सीईओ संभवत: कल अपना प्रभार संभालेंगे। रितु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) ने इन चार वर्षों में शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में 350वें स्थान से 11वें पायदान पर पहुंचा दिया। इसके पूर्व नोएडा 350वें स्थान पर था। पिछले वर्ष घटकर 150वें स्थान पर आया। 3-10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नोएडा ने अव्वल स्थान हासिल किया।
नोएडा में सभी चौराहों, ऐलिवेटिड रोड, एक्सप्रेसवे पर तिरंगी लाईटें लगवाने, प्रवेश द्वारों को भव्य बनाने, जगह-जगह वाल पेंटिंग तथा आकर्षक चित्रकारी कराने का श्रेय भी सीईओ रितु माहेश्वरी को जाता है। उनके कार्यकाल में बतौर प्रबंध निदेशक (NMRC) (नोएडा मेट्रो रेल कार्पोरेशन) ने प्रगति के कई आयाम स्थापित किए। कोरोना काल में लोगों को भोजन उपलब्ध कराने, थैला बैंक, बर्तन बैंक, सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान, घर-घर कूड़ा उठाने तथा सफाई व्यवस्था के कई ऐतिहासिक कदम भी उन्हीं के कार्यकाल में शुरू हुए। पर्थला चौक पर सिग्नेचर ब्रिज, वेदवन पार्क, औषधि पार्क जैसी कई ऐतिहासिक परियोजनाओं को भी उन्होंने मूर्त रूप दिया। समूचे शहर में पब्लिक टॉयलेट, पिंक टॉयलेट को भी स्थापित करवाने में उनके प्रयास सराहनीय रहे। कुल मिलाकर इन चार वर्षों में सीईओ ने वे ऐतिहासिक कार्य किये व विकास की गाथाएं लिखी जिन पर आज तक किसी भी सीईओ ने न सोचा और न ही उसे धरातल पर उतारने का प्रयास किया। अलबत्ता किसानों की समस्याओं तथा बिल्डर्स व बॉयर्स की कुछ मूल समस्याओं का समाधान न करने पर उन्हें आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा।