
Dadri News: दादरी (उत्तर प्रदेश)। लम्बे समय तक चले कूटनीतिक दांव पेच और तिकड़मबाजी के बाद आखिर दादरी नगरपालिका अध्यक्ष की सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गईं। इसे भारतीय जनता पार्टी की “ब्राह्मण लॉबी “की हार माना जा रहा है। सीट रिजर्व होने के बाद पार्टी की गुर्जर लॉबी के साथ ही साथ पूरा गुर्जर समाज भी उत्साहित है।
आपको बता दें कि दादरी जिला गौतमबुद्ध नगर की अकेली नगर पालिका है। इसके अलावा जिले में पांच नगर पंचायत दनकौर, जेवर, बिलासपुर, रबूपुरा और जहांगीरपुर हैं। दादरी नगर पालिका में पिछले दो चुनाव से भारतीय जनता पार्टी की गीता पंडित जीतती आ रही थी। भाजपा में एक मजबूत लॉबी गीता पंडित की कार्यशैली से नाराज चल रही हैं यह लॉबी गीता पंडित की जगह किसी अन्य को इस बार चेयरमैन का प्रत्याशी बनाना चाहती थी। किंतु एक तो लगातार दो बार जीतने के कारण दूसरे पार्टी हाईकमान तक गीता की पकड़ होने के कारण उनका टिकट कटना मुश्किल लग रहा था। य
ह भांपकर गीता विरोधी लॉबी ने उन्हें रास्ते से हटाने का दूसरा तरीका निकाला। उन्होंने शासन में पैरवी की कि दादरी नगरपालिका आज तक कभी ओबीसी के लिए आरक्षित नहीं रही है। इसलिए इस बार इस सीट को ओबीसी के लिए आरक्षित किया जाए। भनक लगते ही गीता समर्थक लॉबी ने भी पैरवी शुरू कर दी कि सीट को आरक्षित न करके जनरल रहने दिया जाए। किंतु इस दांवपेच की लड़ाई में गीता विरोधी लॉबी भारी पड़ी और अंततः सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई। इस निर्णय को भारतीय जनता पार्टी की ब्राह्मण लॉबी की हार के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि गीता पण्डित को “निपटाने “ में एक राज्य सभा सांसद व एक विधायक की भूमिका अहम रही है।