दादरी में करीब सवा करोड़ रुपये कीमत के 125 मीटर प्लॉट को लेकर विवाद गहराया। कब्जे, धमकी और झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोपों के बीच मामला पुलिस और न्यायालय तक पहुंचा।

दादरी/गौतमबुद्धनगर। दादरी थाना क्षेत्र में करीब सवा करोड़ रुपये कीमत के बताए जा रहे 125 मीटर के एक प्लॉट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्लॉट पर कब्जे को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हैं। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर जबरन कब्जे का प्रयास करने, गाली-गलौज, मारपीट और विरोध करने पर जान से मारने तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब दादरी पुलिस के साथ-साथ न्यायालय तक पहुंच गया है। उक्त 125 मीटर प्लाट की 1 लाख वर्ग मीटर के हिसाब से सवा करोड रूपए कीमत बताई जा रही है। शिकायतकर्ता विरेंद्र कुमार रौसा पुत्र राजवीर, निवासी ग्राम बिसनूली, थाना बादलपुर, गौतमबुद्धनगर की ओर से न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में प्लॉट से जुड़े पुराने दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों का हवाला देते हुए पूरे मामले की जांच तथा कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में सुनीता पत्नी स्वर्गीय सूरजपाल, उनके पुत्र विशाल और विकास तथा मैसर्स उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स प्रा. लि. से संबंधित लोगों पर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार विवादित जमीन प्लॉट संख्या 1267 से संबंधित है। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि इस प्लॉट में से 1142 मीटर भूमि की रजिस्ट्री 23 मार्च 2012 को मैसर्स उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स के नाम की गई थी। इसके बाद शेष 125 मीटर भूमि की रजिस्ट्री 27 नवंबर 2013 को दादरी तहसील स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में विरेंद्र कुमार रौसा के नाम किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त रजिस्ट्री के आधार पर 125 मीटर भूमि पर उसका मालिकाना हक और कब्जा है। यही 125 मीटर जमीन अब पूरे विवाद का केंद्र बनी हुई है।
प्रार्थना पत्र में 16 फरवरी 2022 को हुई एक अन्य दस्तावेजी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार सुनीता तथा उनके पुत्र विशाल और विकास की ओर से मैसर्स उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स के प्रोपराइटर राज बहादुर सिंह के नाम दादरी के रजिस्ट्री कार्यालय में गवाहों की मौजूदगी में दस्तावेजी कार्रवाई की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद संबंधित पक्ष और कंपनी से जुड़े कर्मचारी कथित रूप से बार-बार मौके पर पहुंचने लगे और विवादित 125 मीटर प्लॉट पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब शिकायतकर्ता ने कथित कब्जे का विरोध किया तो उसके साथ अभद्रता और गाली-गलौज की गई। आरोप है कि विरोध करने पर जान से मारने तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि दूसरा पक्ष स्वयं को प्रभावशाली बताकर पुलिस-प्रशासन तथा दबंग लोगों से संबंध होने की बात कहकर दबाव बनाने का प्रयास करता है। इसके चलते उसने अपनी जान और संपत्ति दोनों की सुरक्षा को लेकर आशंका जताई है।
मामला न्यायालय तक पहुंचने के बाद अब दादरी पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, विवादित जमीन से संबंधित दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों का सत्यापन करने तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। प्रार्थना पत्र में थाना दादरी के अंतर्गत धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटाए जाने का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता की मांग है कि मामले में दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ उसकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल वर्ष 2013 में हुई 125 मीटर भूमि की रजिस्ट्री, उसके आधार पर मालिकाना हक और मौके पर वास्तविक कब्जे से जुड़ा है। इसके अलावा वर्ष 2012 और 2022 में हुई दस्तावेजी कार्रवाइयों की भी जांच आवश्यक मानी जा रही है। ऐसे में दादरी पुलिस और संबंधित राजस्व विभाग द्वारा यदि रजिस्ट्री दस्तावेज, खसरा-खतौनी, भूमि अभिलेख, मौके की स्थिति और संबंधित पक्षों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है तो विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच और दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 125 मीटर जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है तथा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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