
After all, why is the commissionerate police so kind to the history sheeter's member brother?[/caption]
पलायन कर चुका है पीड़ित परिवार :
बता दें कि बेटों पर हुए जानलेवा हमले के मामले में यामीन के द्वारा दादरी थाने में नईम मेवाती, मुजीम, राहुल और वसीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। यामीन और उसके परिवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद से ही नईम मेवाती, हिस्ट्रीशीटर शाहिद और उसके गैंग के लोग लगातार उसे और उसके परिवार को धमकियां दे रहे थे। उसकी शिकायत वो दादरी कोतवाली के प्रभारी, एसीपी, विवेचना अधिकारी समेत पुलिस कमिश्नर तक से कर चुका है, लेकिन उसके बावजूद पुलिस ने फरार चल रहे आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। यही कारण है कि मैं और मेरा परिवार आज दादरी में अपने घर-बार छोड़कर किसी अन्य स्थान पर जाकर किराये के मकान में रहने के लिए मजबूर हैं। वहां भी आरोपी, पीड़ितों का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं, मामले की शिकायत पुलिस से करने पर पुलिस उलटा पीड़ितों को ही धमकाती है।
आखिर पुलिस क्यों है मेहरबान :
जानकारी के अनुसार हिस्ट्रीशीटर बंधुओं का यह परिवार राजनीति में भी दखल रखता है। बताया जाता है कि एक राज्यसभा सांसद व एक बीजेपी विधायक से इन भाइयों के बेहद मधुर संबंध हैं। अनेक राजनेताओं के साथ आरोपी नईम मेवाती सभासद के बहुत सारे फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इतना ही नहीं, कहा तो यहां तक जाता है कि विधायक का बेटा आरोपी नईम मेवाती के साथ कबाड़े के कारोबार तक में साझेदार है। जिसके चलते दोनों ही जगहों से पुलिस पर आरोपी नईम की गिरफ्तारी नहीं किए जाने का दबाव है। इसके अलावा जिले में और जिले से बाहर तैनात कई पुलिस के अधिकारी भी अक्सर हिस्ट्रीशीटर बंधुओं की मेजबानी का लुत्फ उठाते हैं, जिसके चलते वो भी उसकी मदद करने में लगे हुए हैं।