किसानों की जमीन चाहिए तो प्राधिकरण गांव तक पहुंच सकता है, लेकिन जब किसान अपनी समस्या लेकर खड़ा हो तो वही प्राधिकरण गांव तक क्यों नहीं पहुंचता? दादरी, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसानों को लेकर उठा यह सवाल अब चर्चा में है।

Dadri News : गौतमबुद्धनगर के दादरी क्षेत्र समेत नोएडा और ग्रेटर नोएडा में किसानों की वर्षों से लंबित समस्याएं एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। क्षेत्र के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनेता कर्मवीर नागर ने किसानों की समस्याओं को लेकर एक सवाल खड़ा किया है जब प्राधिकरण किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने के लिए गांव-गांव शिविर लगा सकते हैं, तो किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए उसी तरह गांवों में शिविर क्यों नहीं लगाए जा सकते ? कर्मवीर नागर का कहना है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऐसे अनेक किसान मामले आज भी लंबित हैं, जिनमें जमीनों का अधिग्रहण कई दशक पहले हो चुका है। इसके बावजूद किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्राधिकरण कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। Dadri News
अपने आलेख में कर्मवीर नागर ने कहा है कि किसानों की लंबित समस्याओं के लिए किसी एक राजनीतिक दल अथवा किसी एक सरकार को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार अलग-अलग समय में प्रदेश में कई प्रमुख राजनीतिक दलों की सरकारें सत्ता में रही हैं, लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसानों की अनेक समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। उनका सवाल है कि जिन किसान संगठनों पर किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भरोसा किया, वे भी कई बार आंदोलन और वार्ता के बाद आश्वासनों के आधार पर अपना आंदोलन समाप्त करते रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यदि प्राधिकरण के स्तर पर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है तो किसान संगठन उन जनप्रतिनिधियों के दरवाजे तक क्यों नहीं पहुंचते, जिन्हें किसानों और क्षेत्र की जनता ने विधानसभा तथा संसद तक पहुंचाया है? Dadri News
कर्मवीर नागर का मानना है कि किसानों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी दबाव बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक किसानों की समस्याओं के समाधान को लेकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक किसान गर्मी, सर्दी और बरसात में सड़कों पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होते रहेंगे।यह सवाल खास तौर पर दादरी और गौतमबुद्धनगर के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां जमीन अधिग्रहण, लीजबैक, भूखंड आवंटन और अन्य मुआवजा एवं पुनर्वास से जुड़े विषय लंबे समय से किसानों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। Dadri News
कर्मवीर नागर ने गौतमबुद्धनगर में सक्रिय किसान संगठनों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाया है। उनके अनुसार जिले में करीब 36 किसान संगठन सक्रिय बताए जाते हैं। अलग-अलग संगठनों में किसानों की ताकत बंटने को वे किसानों की कमजोरी का एक कारण मानते हैं।उनके मुताबिक किसान संगठनों की संख्या बढ़ने के बावजूद यदि वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है तो इस व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। आंदोलन की ताकत तभी प्रभावी होगी, जब किसानों की मांगों को लेकर संगठित और स्पष्ट रणनीति के साथ प्राधिकरण तथा जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जाए। Dadri News
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में किसानों से जुड़े बैकलीज और भूखंड आवंटन जैसे नीतिगत मामले भी लंबे समय से लंबित बताए जाते रहे हैं। कर्मवीर नागर का सवाल है कि आखिर इन मामलों के समाधान में इतनी देरी क्यों हो रही हैउनका कहना है कि यदि किसानों की जमीनों का अधिग्रहण करने के लिए प्राधिकरण गांवों में शिविर लगा सकता है तो किसानों की बैकलीज और भूखंड आवंटन जैसी समस्याओं के निस्तारण के लिए भी गांवों में शिविर लगाए जा सकते हैं।यदि गांवों में शिविर लगाना संभव नहीं है तो अलग-अलग कमेटियां गठित करके फाइलों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भेजने के बजाय किसानों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जाना चाहिए, जहां किसान अपनी समस्या का समाधान एक ही स्थान पर करा सकें। Dadri News
कर्मवीर नागर के इस सवाल का मूल केंद्र यही है कि जिस किसान की जमीन पर आज नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे आधुनिक शहर खड़े हैं, उसकी वर्षों पुरानी समस्या के समाधान के लिए व्यवस्था उसके गांव तक क्यों नहीं पहुंच सकती?किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए यदि प्राधिकरण की ओर से विशेष शिविर लगाए जाएं, लंबित मामलों की सूची सार्वजनिक की जाए, प्रत्येक मामले के लिए समयसीमा निर्धारित की जाए और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तो लंबे समय से चले आ रहे विवादों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकता है। Dadri News
कर्मवीर नागर ने अपने आलेख में आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यदि चुनाव से पहले किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं का गंभीरता से निस्तारण नहीं किया गया तो किसानों की नाराजगी चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। यहां उनका मूल सवाल राजनीतिक दलों के पक्ष-विपक्ष से अधिक प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर है। किसानों की जमीन के अधिग्रहण से लेकर मुआवजा, लीजबैक, भूखंड और अन्य नीतिगत मामलों तक लंबित प्रकरणों का समाधान समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। Dadri News
कर्मवीर नागर ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर सरकार की छवि पर भी पड़ सकता है।उनका तर्क है कि किसान संगठनों को केवल प्राधिकरण कार्यालयों के बाहर आंदोलन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी अपनी मांगों को मजबूती से रखना चाहिए। साथ ही, यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार के ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें तथ्य और दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए। Dadri News
दादरी और गौतमबुद्धनगर में किसानों की लंबित समस्याएं कोई नया विषय नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से इन मुद्दों को लेकर किसान संगठन आंदोलन करते रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या किसान संगठन अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए प्राधिकरण के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय करेंगे? कर्मवीर नागर का आलेख इसी सवाल को सामने रखता है कि अगर किसान की जमीन लेने के लिए प्राधिकरण उसके गांव तक पहुंच सकता है, तो किसान की समस्या सुनने और उसका समाधान करने के लिए प्राधिकरण गांव तक क्यों नहीं पहुंच सकता?आने वाले समय में किसानों की लंबित समस्याओं पर प्राधिकरण और शासन की कार्रवाई तथा किसान संगठनों की रणनीति इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करेगी। Dadri News
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