UP Election 2022: भाजपा प्रत्याशी ना घर का ना घाट का
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:23 PM
शहरी क्षेत्र और हाई राइज इमारतों के बाशिंदों की देर से आई यादकर्मवीर नागर प्रमुख
Dadri: दादरी। जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि 10 तारीख को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। हालांकि आज का युवा वर्ग सुशिक्षित है और रोजमर्रा की घटनाओं के बारे में पूरी तरह अपडेट रहता है। लेकिन फिर भी मैं आप लोगों से मार्मिक अपील करना चाहता हूं कि 10 फरवरी को होने वाले मतदान में अपने मत का उपयोग सोच समझकर करें। मीडिया की खबरों अथवा किसी के कहे अनुसार यारी अथवा रिश्तेदारी की भावनाओं में बह कर कतई मतदान न करें। यह आपके विवेक और बुद्धि चातुर्य की परीक्षा का समय है। यह मुद्दों पर आधारित मतदान करने का समय है। यह दादरी विधानसभा क्षेत्र में अपने स्थानीय अस्तित्व को बचाने का समय है अन्यथा कुछ समय बाद एक राजनीतिक दल विशेष नोएडा सीट की तरह बाहरी प्रत्याशियों को मैदान में उतारना प्रारंभ कर देगा।
इस चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी एवं उसके समर्थकों को ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं से अधिक हाईराइज इमारतों के उन वशिंदों पर ज्यादा भरोसा है जिनको भाजपा प्रत्याशी ने पूरे 5 साल में एक बार भी मुड़कर नहीं देखा है।
केवल शहरी क्षेत्र के मतदाताओं के नाम पर जीत का सपना देखना भाजपा प्रत्याशी की बड़ी भूल
इस वक्त ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता और शहरी क्षेत्र की हाईराइज इमारतों के मतदाता भाजपा प्रत्याशी के साथ धोबी घर का ना घाट का वाली कहावत को चरितार्थ करते नजर आ रहे हैं। जिस भाजपा प्रत्याशी का रिपोर्ट कार्ड भाजपा के शीर्ष नेताओं की नजरों में खराब रहा हो उसे क्षेत्र का मतदाता बोनस अंक देकर अपने आगामी 5 वर्ष खराब करने के मूढ में नहीं है। क्षेत्र की जनता सपा लोकदल गठबंधन के पक्ष में मतदान करने का निर्णय ले चुकी है। अब तो भाजपा प्रत्याशी द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के भोले भाले मतदाताओं को शहरी क्षेत्र और गु्रप हाउसिंग सोसाइटीज के मतदाताओं के भरोसे भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है जबकि इन इमारतों में राजनीतिक दल विशेष से जुडे मतदाता ही निवास नहीं करते हैं बल्कि सभी विचारधाराओं के लोग शहरी क्षेत्र में रहते हैं। वैसे भी भाजपा सरकार के समय में हाईराइज इमारतों के वशिंदों को उनके फ्लैट्स की रजिस्ट्री तक नहीं हो पाई है ऐसी स्थिति में इमारतों के वशिंदों से वोट देने की उम्मीद करना दिन में सपना देखने की बराबर है। भला हो स्वामी प्रसाद मौर्य का जिसके पार्टी छोडऩे की वजह से तेजपाल नागर जैसे लोगों को दोबारा टिकट मिला। अन्यथा पूरा क्षेत्र जानता है कि भाजपा नेतृत्व की नजरों में तेजपाल नागर का रिपोर्ट कार्ड खराब होने की वजह से दोबारा टिकट मिलने की संभावना जीरो थी। ऐसी स्थिति में लाख टके का सवाल है कि जिसका रिपोर्ट कार्ड भाजपा की नजरों में खराब रहा हो, जिसे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने नकारा हो उसे हम क्यों स्वीकारें ?