
दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों पर लगी पाबंदी पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश ने लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है। लेकिन यह राहत हर किसी के लिए मीठी नहीं—क्योंकि जिन लोगों ने डर या अफ़वाहों में आकर अपनी गाड़ियां औने-पौने बेच दीं या कबाड़ में तौल दीं, उनके लिए यह फैसला किसी कड़वे मज़ाक से कम नहीं। Green Signal For Old Vehicles
जुलाई 2024 में दिल्ली सरकार ने 10 साल से पुराने डीज़ल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को ईंधन न देने की नीति लागू कर दी थी। ‘नो फ्यूल फॉर ओल्ड व्हीकल्स’ नामक इस पॉलिसी के तहत पेट्रोल पंपों पर पुलिस बल, ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे और बड़े स्पीकर लगाए गए थे, ताकि पुराने वाहनों की पहचान कर उन्हें वहीं रोक दिया जाए। पहले ही दिन 80 गाड़ियां सीज़ हुईं, जिनमें कई महंगी लग्ज़री कारें भी शामिल थीं। नियम तोड़ने पर पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान था। योजना यह थी कि दिल्ली के बाद नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद में भी यह नीति लागू होगी।
इस कार्रवाई ने पुराने वाहन मालिकों में हड़कंप मचा दिया। जिनकी गाड़ियों की उम्र अगले एक-दो साल में पूरी होने वाली थी, उन्होंने भी उन्हें बेच डाला। नतीजा—महंगी रेंज रोवर, मर्सिडीज़ और बीएमडब्ल्यू जैसी कारें कौड़ियों के भाव बिकने लगीं। दिल्ली के रितेश गंडोत्रा को अपनी 8 साल पुरानी रेंज रोवर बेहद कम दाम पर एनसीआर से बाहर बेचनी पड़ी। वहीं, वरुण विज को 84 लाख की मर्सिडीज़ ML350 सिर्फ 2.5 लाख रुपये में छोड़नी पड़ी—लगभग 97% का घाटा। कुछ मालिकों ने सोशल मीडिया पर नाराज़गी जताई कि उनकी गाड़ियां तकनीकी रूप से फिट थीं, फिर भी कानून ने उन्हें कबाड़ बना दिया। रतन ढिल्लों जैसे कई लोगों ने सवाल उठाया—“अगर कार प्रदूषण नहीं फैलाती, तो उसे सज़ा क्यों ?
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के मुताबिक, दिल्ली में करीब 62 लाख और एनसीआर के अन्य शहरों में लगभग 44 लाख वाहन एंड-ऑफ-लाइफ़ कैटेगरी में आते हैं। 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पूरे एनसीआर में ऐसे वाहनों पर रोक का आदेश दिया था। पुराने वाहनों पर सख़्ती को लेकर बढ़ते विरोध के बाद दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के बाद फिलहाल बैन पर रोक लगा दी और CAQM से चार सप्ताह में जवाब मांगा। आदेश में साफ कहा गया कि इस बीच किसी भी पुराने वाहन मालिक पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। Green Signal For Old Vehicles