देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, WhatsApp कॉल से उड़ाए 23 करोड़!
भारत
चेतना मंच
23 Sep 2025 10:26 AM
दिल्ली में साइबर ठगों ने अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल फ्रॉड कर डाला। राजधानी के गुलमोहर पार्क में रहने वाले रिटायर्ड बैंक अधिकारी नरेश मल्होत्रा को करीब डेढ़ महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर उनसे 23 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने उन्हें धमकाया कि उनके आधार नंबर से टेरर फंडिंग हुई है और उन पर PMLA एक्ट लगाया गया है। Digital Fraud
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ दिल्ली पुलिस बल्कि साइबर क्राइम सेल को भी हैरान कर दिया है क्योंकि ठगों ने बेहद प्लानिंग और हाईटेक तरीके से एक वरिष्ठ नागरिक को डराकर उनकी पूरी जीवनभर की कमाई निकाल ली।
1 अगस्त से शुरू हुई कॉल और डिजिटल टॉर्चर
नरेश मल्होत्रा ने बताया कि पहली कॉल 1 अगस्त 2025 को आई थी। कॉल करने वाला खुद को एयरटेल कर्मचारी बताकर कहता है कि आपको मुंबई पुलिस से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि आपके नाम से एक नया मोबाइल नंबर भायखला, मुंबई में जारी हुआ है। ठगों ने यह भी धमकी दी कि अगर कॉल डिस्कनेक्ट की तो घर की सारी लाइनें काट दी जाएंगी।
'डिजिटल अरेस्ट' का खौफ
इसके बाद ठगों ने एक व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को मुंबई पुलिस, ईडी और फिर सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि आपके आधार नंबर से गैंबलिंग और टेरर फंडिंग हुई है इसलिए आपको डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। अगर आपने किसी से बात की या जानकारी साझा की, तो पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ट्रांजैक्शन दर ट्रांजैक्शन
पहले सोमवार को ₹14 लाख की RTGS ट्रांजैक्शन करवाई गई। फिर लगातार शेयर बेच-बेचकर लगभग 4 सितंबर तक ₹23 करोड़ तक की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई गई। ठगों के आदेश पर नरेश मल्होत्रा RTGS फॉर्म भरते, उसकी फोटो उन्हें भेजते, फिर वे बैंक खाता नंबर देते और पैसा ट्रांसफर कराया जाता। यह पूरा सिलसिला इतने भय और दबाव में चला कि नरेश खुद कुछ सोच नहीं पाए।
फर्जी सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर और ईडी का डर
जब मल्होत्रा ने पैसे भेजने से मना किया, तो उन्हें एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर भेजा गया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश का जाली साइन भी था। उनसे कहा गया कि यह आदेश संसद मार्ग से जारी हुआ है और आरबीआई ने भी क्लियरेंस दे दी है। इसके बाद उन्होंने एक दिन में चार अलग-अलग खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया। जब नरेश मल्होत्रा को इस पूरे खेल पर शक हुआ तो उन्होंने कहा, "अब मैं खुद सुप्रीम कोर्ट जाकर 5 करोड़ का चेक दे दूंगा, अब एक भी पैसा नहीं दूंगा।" इसके बाद कॉल अचानक कट गई और फिर कोई संपर्क नहीं हुआ। 19 सितंबर को उन्होंने दिल्ली पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई।
बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल
नरेश मल्होत्रा का आरोप है कि, "जिस अकाउंट में हजार रुपये का बैलेंस था, उसमें अगर करोड़ों ट्रांसफर हो रहे हैं, तो बैंक और आरबीआई की जिम्मेदारी बनती है। बैंकों की KYC प्राइवेट एजेंसियां करती हैं। कई बार ग्राहक बैंक तक नहीं जाता और ना ही एजेंसियां उन्हें आने देती हैं।" उन्होंने कहा कि अगर बैंकिंग व्यवस्था सख्त होती, तो ऐसे फ्रॉड रोके जा सकते हैं। दिल्ली साइबर सेल मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। जिन खातों में पैसे भेजे गए वे कोलकाता आधारित प्राइवेट बैंकों के थे। जांच एजेंसियां फर्जी दस्तावेज, मोबाइल नंबर और अकाउंट डीटेल्स को ट्रेस कर रही हैं।
डिजिटल अरेस्ट एक नया साइबर फ्रॉड टर्म है, जहां ठग पीड़ित को मानसिक रूप से इतना दबाव में ला देते हैं कि वह फोन या डिवाइस के जरिए कहीं जाने, किसी से बात करने या पुलिस से संपर्क करने की हिम्मत नहीं कर पाता। यह एक तरह का मानसिक बंधक बनाना है बिना हथियार, सिर्फ तकनीक और डर के बल पर। बता दें कि, पुलिस या कोर्ट कभी भी फोन पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती। किसी भी तरह की RTGS या पैसा ट्रांसफर करने से पहले किसी करीबी या वकील से सलाह लें। व्हाट्सएप कॉल्स से आने वाली सरकारी धमकियों को तुरंत रिपोर्ट करें। बैंक ट्रांजैक्शन में असामान्य गतिविधियों को सीधे ब्रांच में जाकर रिपोर्ट करें। Digital Fraud