'ठक-ठक' गैंग ऐसे करते हैं शिकार, यहां मिलेगी सबसे बड़ी जानकारी
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:02 AM
दिल्ली-NCR समेत देश के कई बड़े शहरों में 'ठक-ठक गैंग' का आतंक एक बार फिर सामने आ रहा है। रात के अंधेरे में ट्रैफिक सिग्नल्स, सुनसान रास्तों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सक्रिय इस गैंग का तरीका बेहद शातिर और खतरनाक है। इनकी चालों से अगर आप अलर्ट नहीं हुए तो मिनटों में आपकी गाड़ी से कीमती सामान साफ हो सकता है और आपको पता भी नहीं चलेगा। The Thak-Thak Gang
कैसे काम करता है ठक-ठक गैंग?
इस गैंग का नाम ही इनके स्टाइल पर आधारित है। जैसे ही कोई गाड़ी ट्रैफिक में फंसती है या धीमी होती है, गिरोह के एक-दो सदस्य अचानक कार के दरवाजे या शीशे पर 'ठक-ठक' करते हैं। और फिर शुरू होता है भ्रम फैलाने का खेल। "सर, गाड़ी से धुआं निकल रहा है...", "भाईसाहब, नीचे से कुछ गिरा है...", "आपका पेट्रोल लीक हो रहा है..." जैसे ही ड्राइवर घबराकर बाहर निकलता है गैंग का दूसरा हिस्सा हरकत में आ जाता है। कोई पीछे से खिड़की खोल देता है कोई दरवाजा। महज चंद सेकंडों में पर्स, मोबाइल, बैग, गहने और अन्य कीमती सामान लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं।
कौन होता है गैंग का निशाना?
ठक-ठक गैंग ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं जो अकेले या फैमिली के साथ सफर कर रहे हो, महिलाएं और बुजुर्ग, जिनकी गाड़ी में सामान दिख रहा हो, जो ट्रैफिक में फंसे हों या सिग्नल पर रुके हों या फिर सुनसान इलाकों में खड़ी गाड़ियों को भी ये गैंग नहीं छोड़ती। गैंग के सदस्यछोटे समूहों में बंटे होते हैं। गैंग पहले से ही शिकार को तय करके रखते हैं। गैंग में शामिल लुटेरों लूट के बाद अलग-अलग दिशाओं में फरार हो जाते हैं। CCTV और पुलिस से बचने के लिए नकाब या टोपी पहनते हैं। कुछ मामलों में पत्थर फेंककर भी गाड़ी रुकवाई जाती है।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु तक फैला नेटवर्क
"ठक-ठक गैंग" की शुरुआत 2000 से मानी जाती है लेकिन आज इसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, नोएडा, गुड़गांव जैसे शहरों में यह गैंग लगातार एक्टिव है। पुलिस कई बार गिरफ्तारियां कर चुकी है लेकिन नेटवर्क इतना संगठित है कि पूरी तरह से खत्म करना अब तक मुमकिन नहीं हो पाया है।
कैसे करें बचाव?
कोई भी ठक-ठक करे तो गाड़ी से तुरंत बाहर न निकलें। पहले अंदर से जांच लें। दरवाजे हमेशा लॉक रखें और विंडो पूरी न खोलें। मोबाइल या पर्स डैशबोर्ड पर न रखें। सामान (बैग, लैपटॉप आदि) सीट पर खुला न छोड़ें हमेशा डिक्की में रखें। भीड़भाड़ वाले इलाके में सावधानी से ड्राइव करें और अजनबियों से बातचीत टालें।
ठक-ठक गैंग केवल लूटपाट तक सीमित नहीं है। कई मामलों में ये हिंसा, चाकूबाजी और जानलेवा हमलों तक का सहारा लेते हैं। यही वजह है कि पुलिस इसे एक "हाई रिस्क अपराध सिंडिकेट" मानती है। अगर आपके साथ ऐसा कोई मामला होता है या आप संदिग्ध गतिविधि देखें तो बिना देर किए 100 या 112 पर कॉल करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। ठक-ठक गैंग की चालाकी भरी लूटपाट से बचने का एक ही तरीका है जागरूकता और सतर्कता। थोड़ी सी सावधानी आपको एक बड़ी मुसीबत से बचा सकती है। The Thak-Thak Gang