शराब नीति केस में बरी होने के बाद कांग्रेस का तीखा हमला
देवेंद्र यादव ने कहा कि यह मामला देश की राजनीति में दोहरे मापदंड और जांच एजेंसियों के चयनात्मक इस्तेमाल को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल बताता है कि सत्ता के सामने झुकते ही आरोपों के दाग हल्के पड़ने लगते हैं।

Delhi News : दिल्ली की राजनीति में आज (शनिवार) को एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आप पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शराब नीति मामले में बरी होने पर भाजपा और केजरीवाल दोनों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद, केजरीवाल—भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' में धुलकर खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
सत्ता के सामने झुकने से आरोपों के दाग हल्के पड़ते हैं'
देवेंद्र यादव ने कहा कि यह मामला देश की राजनीति में दोहरे मापदंड और जांच एजेंसियों के चयनात्मक इस्तेमाल को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल बताता है कि सत्ता के सामने झुकते ही आरोपों के दाग हल्के पड़ने लगते हैं। देश में एक खतरनाक प्रवृत्ति विकसित हो रही है, जहां सत्ता के सामने सरेंडर करने पर आरोप कमजोर पड़ते दिखाई देते हैं।
2022 की शिकायत और 'सोम ग्रुप' का कनेक्शन
अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष ने पिछले रिकॉर्ड को भी खंगाला। उन्होंने याद दिलाया कि 3 जून 2022 को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने पंजाब के अकाली दल के नेता दीप मल्होत्रा का नाम लेते हुए शराब नीति से जुड़ी गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के संभावित समीकरणों की चर्चा के बीच इस मामले को नजरअंदाज क्यों किया गया? यादव ने आगे जानकारी दी कि 5 सितंबर 2022 को दिल्ली कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल आर्थिक अपराध शाखा के पास गया था। प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी के खाते में शराब घोटाले से जुड़ी कंपनी 'सोम ग्रुप' द्वारा 2 करोड़ रुपये के चंदे से जुड़े दस्तावेज सौंपे थे। उन्होंने आरोप लगाया, "यदि जांच निष्पक्ष होती तो बीजेपी के बड़े नेता और केजरीवाल दोनों कानून के दायरे में होते।"
जांच एजेंसियों पर 'शतरंज का मोहरा' बनने का आरोप
देवेंद्र यादव ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर चुनावी जरूरतों से प्रभावित होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल शतरंज के मोहरों की तरह करती है। जहां चुनाव होते हैं, वहीं ईडी और सीबीआई की सक्रियता बढ़ जाती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात और पंजाब में केजरीवाल का राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है, जबकि तमिलनाडु में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को परेशान करने की तैयारी इसी रणनीति का हिस्सा है।
शराब नीति पर बौछाने वाले सवाल
कांग्रेस नेता ने दिल्ली की शराब नीति को लेकर केजरीवाल पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा :
- यदि अरविंद केजरीवाल पूरी तरह ईमानदार थे, तो अनियमितताओं के संकेत मिलते ही नीति वापस लेकर बदलाव क्यों किया गया?
- कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट क्यों किए गए?
- *कमीशन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत क्यों किया गया?
- "एक पर एक फ्री" जैसी योजनाओं का सामाजिक प्रभाव और शराब पीने की आयु कम करने का फैसला किस मंशा से लिया गया?
उन्होंने कहा कि ये सवाल कल्पना पर आधारित नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से सामने आए तथ्यों पर आधारित हैं।
'कानूनी लड़ाई अभी बाकी, जनता की अदालत में दोषी'
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले और सीबीआई द्वारा ठोस सबूत न पेश करने के मुद्दे को उठाते हुए यादव ने कहा कि यह निचली अदालत का फैसला है। उन्होंने कहा कि अतीत में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामलों में गंभीर टिप्पणियां की हैं और देखना बाकी है कि यह फैसला उच्च अदालतों में कितना टिक पाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ किया कि कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है और कांग्रेस पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग पर अडिग है। उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी अदालत जनता की अदालत है, जहां केजरीवाल पहले ही दोषी साबित हो चुके हैं।" Delhi News
Delhi News : दिल्ली की राजनीति में आज (शनिवार) को एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आप पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शराब नीति मामले में बरी होने पर भाजपा और केजरीवाल दोनों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद, केजरीवाल—भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' में धुलकर खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
सत्ता के सामने झुकने से आरोपों के दाग हल्के पड़ते हैं'
देवेंद्र यादव ने कहा कि यह मामला देश की राजनीति में दोहरे मापदंड और जांच एजेंसियों के चयनात्मक इस्तेमाल को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल बताता है कि सत्ता के सामने झुकते ही आरोपों के दाग हल्के पड़ने लगते हैं। देश में एक खतरनाक प्रवृत्ति विकसित हो रही है, जहां सत्ता के सामने सरेंडर करने पर आरोप कमजोर पड़ते दिखाई देते हैं।
2022 की शिकायत और 'सोम ग्रुप' का कनेक्शन
अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष ने पिछले रिकॉर्ड को भी खंगाला। उन्होंने याद दिलाया कि 3 जून 2022 को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने पंजाब के अकाली दल के नेता दीप मल्होत्रा का नाम लेते हुए शराब नीति से जुड़ी गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के संभावित समीकरणों की चर्चा के बीच इस मामले को नजरअंदाज क्यों किया गया? यादव ने आगे जानकारी दी कि 5 सितंबर 2022 को दिल्ली कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल आर्थिक अपराध शाखा के पास गया था। प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी के खाते में शराब घोटाले से जुड़ी कंपनी 'सोम ग्रुप' द्वारा 2 करोड़ रुपये के चंदे से जुड़े दस्तावेज सौंपे थे। उन्होंने आरोप लगाया, "यदि जांच निष्पक्ष होती तो बीजेपी के बड़े नेता और केजरीवाल दोनों कानून के दायरे में होते।"
जांच एजेंसियों पर 'शतरंज का मोहरा' बनने का आरोप
देवेंद्र यादव ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर चुनावी जरूरतों से प्रभावित होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल शतरंज के मोहरों की तरह करती है। जहां चुनाव होते हैं, वहीं ईडी और सीबीआई की सक्रियता बढ़ जाती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात और पंजाब में केजरीवाल का राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है, जबकि तमिलनाडु में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को परेशान करने की तैयारी इसी रणनीति का हिस्सा है।
शराब नीति पर बौछाने वाले सवाल
कांग्रेस नेता ने दिल्ली की शराब नीति को लेकर केजरीवाल पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा :
- यदि अरविंद केजरीवाल पूरी तरह ईमानदार थे, तो अनियमितताओं के संकेत मिलते ही नीति वापस लेकर बदलाव क्यों किया गया?
- कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट क्यों किए गए?
- *कमीशन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत क्यों किया गया?
- "एक पर एक फ्री" जैसी योजनाओं का सामाजिक प्रभाव और शराब पीने की आयु कम करने का फैसला किस मंशा से लिया गया?
उन्होंने कहा कि ये सवाल कल्पना पर आधारित नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से सामने आए तथ्यों पर आधारित हैं।
'कानूनी लड़ाई अभी बाकी, जनता की अदालत में दोषी'
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले और सीबीआई द्वारा ठोस सबूत न पेश करने के मुद्दे को उठाते हुए यादव ने कहा कि यह निचली अदालत का फैसला है। उन्होंने कहा कि अतीत में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामलों में गंभीर टिप्पणियां की हैं और देखना बाकी है कि यह फैसला उच्च अदालतों में कितना टिक पाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ किया कि कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है और कांग्रेस पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग पर अडिग है। उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी अदालत जनता की अदालत है, जहां केजरीवाल पहले ही दोषी साबित हो चुके हैं।" Delhi News












