दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल-सिसोदिया ने भरा जमानती बॉन्ड

दिल्ली की सियासत से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में शनिवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए।

केजरीवाल-सिसोदिया
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar14 Mar 2026 02:26 PM
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Delhi News : दिल्ली की सियासत से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में शनिवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। अदालत के निर्देश पर दोनों नेताओं ने 50-50 हजार रुपये के जमानती बॉन्ड जमा किए। यह औपचारिकता उस आदेश के बाद पूरी की गई, जिसमें कोर्ट ने CBI के भ्रष्टाचार मामले में दोनों नेताओं समेत सभी आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था. कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी आरोपी के डिस्चार्ज या बरी होने के बाद जमानती बॉन्ड भरवाना एक सामान्य व्यवस्था मानी जाती है, ताकि भविष्य में यदि अभियोजन पक्ष ऊपरी अदालत में अपील करता है, तो संबंधित व्यक्ति जरूरत पड़ने पर अदालत के सामने पेश हो सके।

23 आरोपियों को मिला था डिस्चार्ज

गौरतलब है कि 27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने अपने विस्तृत फैसले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को राहत देते हुए डिस्चार्ज कर दिया था। अदालत ने CBI की चार्जशीट, दस्तावेजों और पूरे रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद कहा था कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और न ही ऐसा कोई ठोस आधार है, जिससे गंभीर संदेह स्थापित हो सके। अदालत ने CBI की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें कथित रूप से एक बड़ी साजिश के तहत आबकारी नीति तैयार किए जाने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने माना कि नीति निर्माण की प्रक्रिया विचार-विमर्श और परामर्श के जरिए तय नियमों के अनुसार आगे बढ़ी थी। यह पूरा मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। CBI का आरोप था कि यह नीति कुछ निजी शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी और इसके बदले रिश्वत ली गई थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इन आरोपों को पर्याप्त आधारहीन मानते हुए आरोपियों को राहत दे दी।

16 मार्च को अगली सुनवाई

ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को CBI ने चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन दाखिल की है। इस सप्ताह जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की एकलपीठ ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया। साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर कहा कि जांच एजेंसी के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियां पहली नजर में उचित नहीं लगतीं। अब इस मामले में 16 मार्च को अगली सुनवाई होनी है। इसी बीच अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को एक प्रतिनिधित्व भेजकर मांग की है कि इस मामले की सुनवाई किसी दूसरी बेंच को सौंपी जाए। उन्होंने अपने आवेदन में निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। Delhi News

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हिन्दू मरे या मुसलमान, इन्हें हत्या से काम

भारत में एक बहुत पुरानी कहावत प्रचलित है। भारत के हर कोने में चलने वाली यह कहावत यह है कि- ‘‘हिन्दू मरे या मुसलमान, इन्हें हत्या से काम”। यह कहावत इन दिनों भारत की राजधानी दिल्ली में हुए तरूण हत्याकांड में चरितार्थ हो रही है।

तरुण केस में बड़ा खुलासा
तरुण केस में बड़ा खुलासा
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar13 Mar 2026 03:44 PM
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Delhi News : भारत में एक बहुत पुरानी कहावत प्रचलित है। भारत के हर कोने में चलने वाली यह कहावत यह है कि- ‘‘हिन्दू मरे या मुसलमान, इन्हें हत्या से काम”। यह कहावत इन दिनों भारत की राजधानी दिल्ली में हुए तरूण हत्याकांड में चरितार्थ हो रही है। यह भी कहा जा सकता है कि दिल्ली के कुछ स्वार्थी तथा ठग टाईप के लोगों ने ‘‘हिन्दू मरे या मुसलमान, इन्हें हत्या से काम” वाली कहावत को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है। ठगी की आदत से मजबूर दिल्ली के कुछ लोगों ने तरूण के परिवार की मदद के नाम पर करोड़ों रूपए कमा लिए हैं।

दिल्ली के तरूण के नाम पर कमाई का बड़ा धंधा

आपको बता दें कि होली के त्यौहार पर दिल्ली में तरूण नामक युवक की हत्या कर दी गई थी। तरूण हत्याकांड के घटनाक्रम की बात करें तो होली के मौके पर पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में दो अलग-अलग समुदायों के परिवारों के बीच झगड़ा हो गया था। बताया जाता है कि विवाद की शुरुआत एक मामूली घटना से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते मामला हिंसक झड़प में बदल गया। इस झगड़े में 26 वर्षीय तरुण नामक युवक की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस जांच के अनुसार घटना के दौरान एक महिला सायरा पर गुब्बारा फेंका गया था। आरोप है कि इसके बाद उसने अपने परिवार के लोगों को बुला लिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि हिंसा में तरुण की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड के बाद से कुछ लोगों ने तरूण हत्याकांड को अवैध कमाई करने का धंधा बना लिया है।

तरूण के परिवार की आड़ में गंदा धंधा

इस मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली के उत्तम नगर के चर्चित तरुण मर्डर केस पुलिस की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कुछ लोग इस संवेदनशील घटना का सहारा लेकर तरुण के परिवार के नाम पर आम लोगों से पैसे इकठ्ठा कर रहे थे। पुलिस के अनुसार ऐसे ही एक बैंक खाते में महज दो दिनों के भीतर करीब 37 लाख रुपये जमा हो गए थे। मामले की जानकारी मिलते ही द्वारका जिला पुलिस हरकत में आ गई और तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक खाते को फ्रीज करा दिया। साथ ही इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संवेदनशील घटना के बाद सोशल मीडिया पर झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि इससे समाज में तनाव भी बढ़ सकता है। इसलिए इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। उत्तम नगर की घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई तरह की पोस्ट और वीडियो वायरल होने लगे थे। इनमें से कई पोस्ट में अपुष्ट और भडक़ाऊ दावे किए जा रहे थे। द्वारका जिला पुलिस ने इन पोस्टों को गंभीरता से लिया और तुरंत उनकी जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स जानबूझकर भ्रामक सामग्री फैला रहे थे। पुलिस का कहना है कि ऐसी पोस्ट से न सिर्फ लोगों को गुमराह किया जा रहा था, बल्कि इससे इलाके में माहौल भी बिगड़ सकता था।

तरूण के नाम QR कोड से उगाही

जांच के दौरान पुलिस के सामने एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। 10 मार्च 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक क्यूआर कोड दिखाते हुए लोगों से आर्थिक मदद की अपील की जा रही थी। वीडियो में दावा किया गया था कि यह पैसा तरुण के परिवार की मदद के लिए जमा किया जा रहा है। लेकिन जब पुलिस ने इस मामले की जांच की तो पता चला कि यह फंड जुटाने की कोशिश संदिग्ध थी। जांच में सामने आया कि महज दो दिनों के भीतर उस बैंक खाते में करीब 37 लाख रुपये जमा हो चुके थे। जैसे ही पुलिस को इस संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली, तुरंत संबंधित बैंक शाखा के प्रबंधक से संपर्क किया गया। पुलिस ने बैंक को निर्देश दिया कि उस खाते में होने वाले सभी क्रेडिट और डेबिट लेनदेन को तुरंत रोक दिया जाए. इसके साथ ही खाते में जमा पूरी राशि को फ्रीज कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि आम लोगों द्वारा भेजा गया पैसा सुरक्षित रह सके और किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके। दिल्ली की द्वारका जिला पुलिस ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अफवाह फैलाने या लोगों को गुमराह करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कानून के तहत ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है। पुलिस ने दोहराया है कि सार्वजनिक शांति भंग करने या लोगों को भडक़ाने वाली किसी भी ऑनलाइन गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Delhi News

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मोची कारीगर और नाई कहलाएंगे सौंदर्य सेवा प्रदाता

पारंपरिक पेशों से जुड़े जाति-आधारित नामों को बदलने को लेकर संसद की उद्योग संबंधी स्थायी समिति ने महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं। समिति का मानना है कि कई पारंपरिक व्यवसायों के नाम सीधे तौर पर जाति से जुड़े होने के कारण समाज में पूर्वाग्रह पैदा करते हैं और युवा इन पेशों को अपनाने से हिचकते हैं।

mochi nai
मोची जूते का कारीगर, नाई सौंदर्य सेवा प्रदाता
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar13 Mar 2026 02:24 PM
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New Delhi News : पारंपरिक पेशों से जुड़े जाति-आधारित नामों को बदलने को लेकर संसद की उद्योग संबंधी स्थायी समिति ने महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं। समिति का मानना है कि कई पारंपरिक व्यवसायों के नाम सीधे तौर पर जाति से जुड़े होने के कारण समाज में पूर्वाग्रह पैदा करते हैं और युवा इन पेशों को अपनाने से हिचकते हैं। इसलिए इन व्यवसायों को कौशल आधारित और आधुनिक पहचान देने की जरूरत बताई गई है। 

कौशल आधारित नाम देने का सुझाव

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पारंपरिक पेशों को जाति से जोड़कर देखने की बजाय उन्हें कौशल और पेशेवर पहचान के आधार पर नया नाम दिया जाए। उदाहरण के तौर पर मोची को जूते का कारीगर कहा जाए। नाई को सौंदर्य सेवा प्रदाता या पर्सनल केयर सर्विस प्रोवाइडर कहा जाएगा। कुम्हार को मिट्टी के उत्पाद निर्माता तथा धोबी को लॉन्ड्री और क्लीनिंग सर्विस प्रोवाइडर कहा जाए। 

जाति की बजाय हुनर पर हो पहचान

रिपोर्ट में कहा गया है कि सदियों पुराने जाति-सूचक नामों के कारण कई पेशों की सामाजिक छवि कमजोर हुई है। इससे युवाओं में यह धारणा बन गई है कि ये काम कम सम्मानजनक या पुराने हैं। समिति का मानना है कि यदि इन पेशों को आधुनिक और पेशेवर नाम दिए जाएं तो समाज में उनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी और अधिक लोग इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तलाशेंगे।

पीएम विश्वकर्मा योजना में बदलाव की सिफारिश

समिति के अनुसार नाम बदलने से इन पेशों की ब्रांडिंग आसान होगी, निवेश और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ेंगे और छोटे उद्यमों को नया बाजार मिल सकता है। इससे पारंपरिक कारीगरों को सम्मान भी मिलेगा और रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि केंद्र सरकार राज्यों और विशेषज्ञों से चर्चा कर एक नई संशोधित ट्रेड सूची तैयार करे। इसके बाद इन बदलावों को देशभर में लागू करने पर निर्णय लिया जा सकता है, ताकि पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा जा सके। 


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