ठंडी हवा और वायु प्रदूषण से हृदय व श्वसन रोगों का खतरा बढ़ता है। एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों ने बीपी जांच और सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
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News Delhi News : ठंडी हवा के कारण श्वास नलियों में ऐंठन हो सकती है, जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। सर्दियों में उन मरीजों का रक्तचाप भी बढ़ जाता है, जिनका बीपी पहले नियंत्रित था। एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों के अनुसार ठंड और गंभीर वायु प्रदूषण के कारण हृदय और श्वसन रोगों के मामले बढ़ते हैं। उत्तर भारत में अक्टूबर के आखिर से मौसम ठंडा होने लगता है और प्रदूषण का दौर शुरू होता है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को जारी स्वास्थ्य सुझावों में दिल और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। यह सलाह मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने के लिए दी गई है।
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एम्स के हृदय रोग विभाग के प्रमुख प्रो. राजीव नरंग ने सलाह दी है कि लोग घर पर बीपी मॉनिटर रखें और सप्ताह में कम से कम दो बार रक्तचाप की जांच करें। उनके अनुसार यदि बीपी 140/90 से ऊपर जाता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भरपूर पानी पीने और संतुलित भोजन करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, बहुत अधिक ठंड या भारी प्रदूषण होने पर सुबह की सैर से बचने की सलाह दी गई है।
डॉ. संजीव सिन्हा के अनुसार सीओपीडी, एम्फिसेमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या दमा के मरीजों को ठंड के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। एम्स की ओपीडी और इमरजेंसी में इन बीमारियों के बढ़ने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि सीने में दर्द, सांस फूलना, लगातार खांसी या बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, तो इंतजार न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है। News Delhi News :
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