'संख्या का डर' और खाड़ी संकट ने बदली इंडिया ब्लॉक की रणनीति

कांग्रेस के केरल के सांसदों ने इस मुद्दे को बैठक में बेहद गंभीरता से उठाया। केरल के करीब 25 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां के हालात का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विपक्ष का मानना था कि करीब एक करोड़ भारतीयों की जान और रोज़गार संकट में है।

India Block strategy
भारी हंगामे के बीच विपक्ष (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Mar 2026 07:02 PM
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Delhi News : संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आगाज़ भारी हंगामे और स्थगन के साथ हुआ, लेकिन सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' की अचानक बदली गई रणनीति को लेकर है। जहां एक तरफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दी जा रही थी, वहीं टीएमसी (TMC) समेत सभी विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर वोटिंग कराने की बात कही थी। लेकिन, अचानक इंडिया ब्लॉक ने इस मुद्दे से हाथ खींच लिया। सवाल उठ रहा है कि आखिर विपक्ष को इस मुद्दे पर पल्ला झाड़ना पड़ा और क्या हैं इस 'पलटाव' के असली वजह?

सुबह की बैठक में बदला 'खेल'

दरअसल, संसद में कार्यवाही शुरू होने से पहले इंडिया ब्लॉक की हुई महत्वपूर्क बैठक में ही रणनीति बदलने का फैसला लिया गया। राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत तमाम विपक्षी नेताओं की इस बैठक में दो बड़े कारण सामने आए, जिनके चलते स्पीकर के खिलाफ नोटिस पर जोर देने से गुरेज किया गया।

'आंकड़ों का डर' (Fear of Numbers)

बैठक में सबसे बड़ी चिंता विपक्ष के सामने 'आंकड़ों' की थी। विपक्षी नेताओं को यह आशंका थी कि अगर अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होती है, तो सदन में सरकार के पास बहुमत होने के कारण विपक्ष को निश्चित हार का सामना करना पड़ेगा। विपक्ष को इस बात का अंदेशा था कि यह हार उनके लिए राजनीतिक तौर पर नुकसानदेय साबित हो सकती थी और सरकार इस मुद्दे को अपने पक्ष में कैश कर सकती है।

खाड़ी देशों में बनी स्थिति और केरल का दबाव

दूसरा और तत्कालिक कारण खाड़ी देशों में बनी गंभीर स्थिति थी। कांग्रेस के केरल के सांसदों ने इस मुद्दे को बैठक में बेहद गंभीरता से उठाया। केरल के करीब 25 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां के हालात का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विपक्ष का मानना था कि करीब एक करोड़ भारतीयों की जान और रोज़गार संकट में है, इसलिए इस मुद्दे को स्पीकर के मुद्दे से ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।

राहुल गांधी का स्पष्टीकरण

बैठक के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बदलाव को स्पष्ट करते हुए कहा, "वेस्ट एशिया में जो हो रहा है, उससे हमारी अर्थव्यवस्था को जबरदस्त नुकसान होने वाला है। स्टॉक मार्केट गिर रहा है, तेल के दाम बढ़ेंगे। ये जनता के मुद्दे हैं। हमने सोचा कि इस पर चर्चा जरूरी है। स्पीकर का मुद्दा बाद में उठाया जा सकता है।"

सदन में हंगामा और सरकार का जवाबी हमला

इस बदली रणनीति के बाद विपक्ष ने सदन में विदेश मंत्री के बयान के तुरंत बाद खाड़ी संकट पर चर्चा की मांग की और जमकर हंगामा किया। विपक्षी सांसदों ने 'मध्यपूर्व जल रहा है, भारतीय फंसे हुए हैं' जैसे बैनर पकड़कर नारेबाजी की। इस हंगामे के चलते कार्यवाही कई बार स्थगित हुई और आखिरकार दिन भर के लिए सदन टाल दिया गया।

विपक्ष के इस 'पलटाव' पर सरकार ने जोरदार हमला बोला। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर 'फेल्ड नेता' (Failed Leader) होने का तंज कसा। वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है और फिर चर्चा से भाग निकलता है। ये सिर्फ नाटक और हंगामा करने का मामला है।" Delhi News

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर गैस महंगाई के विरोध में उतरीं महिलाएं, चलाया हस्ताक्षर अभियान

यह कार्यक्रम अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक और कालकाजी विधानसभा की बीएलए-1 ज्योत्सना गोगिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया। अभियान में बड़ी संख्या में महिलाओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों ने हिस्सा लिया।

महंगाई के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन
महंगाई के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar09 Mar 2026 05:26 PM
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Delhi News : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राजधानी दिल्ली के कालकाजी विधानसभा क्षेत्र में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कैंडल मार्च निकाला गया और हस्ताक्षर अभियान चलाकर केंद्र सरकार तक आम जनता की नाराजगी पहुंचाने की कोशिश की गई। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक और कालकाजी विधानसभा की बीएलए-1 ज्योत्सना गोगिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया। अभियान में बड़ी संख्या में महिलाओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों ने हिस्सा लिया।

महिलाओं और आम परिवारों पर महंगाई की मार

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि एलपीजी सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से सबसे ज्यादा असर महिलाओं, मध्यमवर्गीय परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों पर पड़ रहा है। रसोई का बजट बिगड़ता जा रहा है और घरेलू खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और रसोई गैस अब धीरे-धीरे सामान्य परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।

महिला दिवस पर महिलाओं की आवाज बुलंद करने का प्रयास

ज्योत्सना गोगिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि महिलाओं की समस्याओं और संघर्षों को सामने लाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ कैंडल मार्च और हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया, ताकि सरकार तक जनता की पीड़ा और महिलाओं की परेशानी को मजबूती से पहुंचाया जा सके। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गलत आर्थिक नीतियों के कारण महंगाई पर लगाम नहीं लग पा रही है और इसका सीधा असर घर-घर की रसोई पर दिखाई दे रहा है।

प्रधानमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री से इस्तीफे की मांग

कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से इस्तीफे की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि सरकार को तुरंत एलपीजी गैस की कीमतों में राहत देनी चाहिए, ताकि आम जनता को बढ़ती महंगाई से कुछ राहत मिल सके। हस्ताक्षर अभियान में सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर इस विरोध को समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए और रसोई गैस की कीमतों में कमी करे।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

कार्यक्रम के अंत में ज्योत्सना गोगिया ने कहा कि जब तक आम लोगों, खासकर महिलाओं और गरीब परिवारों को राहत नहीं मिलेगी, तब तक इस तरह के लोकतांत्रिक विरोध और जनआंदोलन जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और इसे लगातार बुलंद किया जाता रहेगा। Delhi News

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शराब नीति केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया से मांगा जवाब

निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को इस मामले से आरोप मुक्त कर दिया था। इन 21 लोगों में तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं।

Delhi Excise Policy
हाईकोर्ट ने मांगा केजरीवाल-सिसोदिया का जवाब (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Mar 2026 05:32 PM
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Delhi Excise Policy : दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के लिए बड़ी असुविधा बनती दिख रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों नेताओं सहित 21 अन्य आरोपियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने उन्हें अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

अगली सुनवाई 16 मार्च को, ED केस पर भी असर

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह निचली अदालत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच पर कार्यवाही को अगली तारीख तक स्थगित करने का आदेश देगी, जिससे इस मामले में तत्काल कोई राहत देने की स्थिति न बने।

'यह फैसला आपराधिक कानून को ही उलट देता है'

अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई की ओर से बहस करते हुए निचली अदालत के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आग्रह किया कि आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को बरी करने का आदेश 'अनुचित' है और यह 'आपराधिक कानून को ही उलट देता है'। मेहता ने कहा, "यह मामला देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है। एजेंसी ने शराब नीति में हेरफेर, साजिश और रिश्वतखोरी को दर्शाने वाले विस्तृत सबूत जुटाए हैं। केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत और गवाह मौजूद हैं।"

निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक का संकेत

सॉलिसिटर जनरल के तर्कों पर हाईकोर्ट ने सहमति जताते हुए संकेत दिया कि वह सीबीआई अधिकारियों पर अधीनस्थ अदालत द्वारा की गई 'पूर्वग्रहपूर्ण टिप्पणियों' के अमल पर रोक लगाएगी। मेहता ने आरोप लगाया था कि निचली अदालत ने बिना सही सुनवाई के ही आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया था।

क्या था पिछला आदेश?

इससे पहले 27 फरवरी को निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को इस मामले से आरोप मुक्त कर दिया था। इन 21 लोगों में तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं। तब अदालत ने अपने आदेश में सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि एजेंसी का मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से विफल रहा और यह पूरी तरह से निराधार साबित हुआ। अब हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी गई है। Delhi Excise Policy

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