दिल्ली पुलिस ने पकड़ा हथियारों का बड़ा जखीरा, थी बड़ी साजिश

दिल्ली पुलिस ने एक बहुत बड़ी साजिश का खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाकर भारत के खिलाफ चल रही साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। दिल्ली पुलिस के इस विशेष अभियान में विदेशी हथियारों का बहुत बड़ा जखीरा पकड़ा गया है।

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन
दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar25 Mar 2026 12:12 PM
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Delhi News : दिल्ली पुलिस ने एक बहुत बड़ी साजिश का खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाकर भारत के खिलाफ चल रही साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। दिल्ली पुलिस के इस विशेष अभियान में विदेशी हथियारों का बहुत बड़ा जखीरा पकड़ा गया है। पाकिस्तान से लाकर भारत में विदेशी हथियारों के द्वारा बड़ा कत्लेआम कराने की साजिश रची जा रही है। दिल्ली पुलिस ने विदेशी हथियारों की तस्करी करने वाले गिरोह के 10 कुख्यात अपराधियों को भी गिरफ्तार किया है।

भारत में लाए जा रहे थे खतरनाक हथियार

दिल्ली पुलिस ने खतरनाक हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है। पकड़े गए सभी हथियार पाकिस्तान से नेपाल की सीमा के रास्ते भारत में लाए गए हैं। दिल्ली पुलिस के साथ ही केन्द्रीय जांच एजेंसियां भी पकड़े गए हथियार तस्करों से पूछताछ कर रही है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि विशेष अभियान के तहत पकड़े गए हथियार तस्कर भारत के विभिन्न हिस्सों खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर के गैंगस्टर्स को अत्याधुनिक हथियार सप्लाई कर रहे थे। ये लोग लंबे समय से इस काम में एक्टिव थे। दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 21 विदेशी हथियार बरामद किए हैं, जिनमें मशीन गन, सब-मशीन गन और कई सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल शामिल हैं। इसके अलावा 200 जिंदा कारतूस भी जब्त किए गए हैं।

बेहद खतरनाक हैं पकड़े गए हथियार

दिल्ली पुलिस द्वारा बरामद किए गए हथियारों में PX-5.7 पिस्टल भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर स्पेशल फोर्सेस द्वारा किया जाता है। इसके अलावा तुर्किये की स्टोएगर, चीन की PX-3, चेक रिपब्लिक की शैडो CZ, इटली की बेरेटा, ब्राजील की टॉरस और जर्मनी की वाल्थर जैसी हाई-एंड पिस्टल भी जब्त की गई हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक अत्याधुनिक सब-मशीन गन भी बरामद की है, जिसे चेक रिपब्लिक में बनी बताया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह पाकिस्तान से हथियार मंगवाता था, जिसकी इंडो-नेपाल बॉर्डर के जरिए भारत में तस्करी की जाती थी। इसके बाद इन हथियारों को दिल्ली और अन्य राज्यों के अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

दिल्ली में बैठकर ही चलाया जा रहा था हथियारों की तस्करी का नेटवर्क

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया है कि हथियारों की तस्करी के इस पूरे मॉड्यूल को दिल्ली के वॉल सिटी इलाके से ऑपरेट किया जा रहा था। हथियार पाकिस्तान से चलते थे और नेपाल सीमा के जरिए भारत में एंटर करते थे। यहां से इन घातक हथियारों को दिल्ली-एनसीआर के क्रिमिनल गैंग्स तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी वारदात या आतंकी गतिविधि में तो नहीं होना था। इस मामले को लेकर तमाम केन्द्रीय जांच एजेंसी सक्रिय हो गई हैं। Delhi News


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अदालत का बड़ा फैसला, कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को उम्रकैद

नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी अन्लाफुल एक्टीविटीज (प्रीवेंशन) एक्ट के तहत दर्ज एक गंभीर मामले में दी गई है।

asiya andrabi
कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar24 Mar 2026 06:01 PM
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New Delhi News : नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी अन्लाफुल एक्टीविटीज (प्रीवेंशन) एक्ट के तहत दर्ज एक गंभीर मामले में दी गई है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था मामला

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं। सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर उन्हें दोषी पाया गया। यह मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों के लिए अहम बना हुआ था। जांच एजेंसियों, खासकर नेशनल इन्वेटिगेशन एजेंसी के अनुसार, आसिया अंद्राबी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे:

* भड़काऊ और विभाजनकारी भाषण देना

* अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देना

* देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की साजिश

* प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क बनाए रखना

इन आरोपों के आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया।

2018 में दर्ज हुआ था केस

यह मामला साल 2018 में दर्ज किया गया था, जब सुरक्षा एजेंसियों ने उनके खिलाफ विस्तृत जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई ऐसे सबूत सामने आए, जिनके आधार पर चार्जशीट दाखिल की गई। आसिया अंद्राबी का नाम दुख्तरान ए मिल्लत से भी जुड़ा रहा है, जो पहले से ही प्रतिबंधित संगठन है। एजेंसियों का दावा है कि इस संगठन के जरिए अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता रहा।

अदालत के फैसले का महत्व

इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सजा सुनाए जाने के बाद अब आसिया अंद्राबी को अपना शेष जीवन जेल में बिताना होगा। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत वे उच्च अदालत में अपील कर सकती हैं। यह फैसला देश की एकता और अखंडता से जुड़े मामलों में न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानून का पालन सर्वोपरि है।


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सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले हरीश राणा का निधन, 13 साल से थे कोमा में

दिल्ली से एक बेहद संवेदनशील और अहम खबर सामने आई है। भारत में इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति पाने वाले मामलों में शामिल हरीश राणा का निधन हो गया है। वे पिछले करीब 13 साल से कोमा की स्थिति में थे और उनका इलाज दिल्ली के प्रतिष्ठित एम्स में चल रहा था।

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हरीश राणा का निधन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar24 Mar 2026 05:32 PM
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Delhi News : दिल्ली से एक बेहद संवेदनशील और अहम खबर सामने आई है। भारत में इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति पाने वाले मामलों में शामिल हरीश राणा का निधन हो गया है। वे पिछले करीब 13 साल से कोमा की स्थिति में थे और उनका इलाज दिल्ली के प्रतिष्ठित अस्पताल एम्स में चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, हरीश राणा लंबे समय से कोमा में थे और उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था। वर्षों तक चले इलाज के बावजूद जब उनकी हालत स्थिर बनी रही, तब परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी इच्छामृत्यु की अनुमति

हरीश राणा का मामला उस समय चर्चा में आया जब उनके परिवार ने सुप्रीम कोर्ट आॅफ इंडिया में इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए याचिका दायर की। अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उन्हें पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी। यह फैसला देश में इच्छामृत्यु को लेकर चल रही बहस के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

क्या होती है पैसिव यूथेनेशिया

पैसिव यूथेनेशिया का मतलब होता है ऐसे मरीजों के जीवनरक्षक उपकरण हटाना या इलाज रोकना, जिनके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं होती। भारत में इसे कड़े दिशा-निर्देशों के तहत ही अनुमति दी जाती है, ताकि किसी तरह का दुरुपयोग न हो। हरीश राणा का मामला इसलिए भी खास माना गया क्योंकि यह उन चुनिंदा मामलों में शामिल था, जहां अदालत ने इच्छामृत्यु को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। इससे पहले भी इस विषय पर कई कानूनी बहसें हो चुकी हैं, लेकिन हर मामला अपने आप में अलग महत्व रखता है।

परिवार और डॉक्टरों के लिए कठिन फैसला

लंबे समय तक कोमा में रहने वाले मरीज के लिए इस तरह का फैसला लेना परिवार और डॉक्टरों दोनों के लिए बेहद कठिन होता है। हरीश राणा के मामले में भी यह निर्णय काफी सोच-समझकर और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया था। हरीश राणा का निधन न केवल एक परिवार के लिए गहरा दुख है, बल्कि यह देश में इच्छामृत्यु से जुड़े संवेदनशील मुद्दे को भी फिर से चर्चा में ले आया है। यह मामला मेडिकल, कानूनी और मानवीय पहलुओं के बीच संतुलन की चुनौती को दशार्ता है।


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