ड्रेनेज सुधार के लिए दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता का एक्शन प्लान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ड्रेनेज मास्टर प्लान राजधानी के तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या दबाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य वर्षा जल को सुरक्षित और तेजी से यमुना तक पहुंचाना और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना है।

CM Rekha Guptas drainage roadmap
दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता का ड्रेनेज रोडमैप (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Jan 2026 06:04 PM
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने राजधानी को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। दिल्ली को आधुनिक, वैश्विक और विकसित राजधानी बनाने के लक्ष्य के तहत सरकार ने ड्रेनेज मास्टर प्लान के अंतर्गत चार प्रमुख ट्रंक ड्रेनों के निर्माण और विस्तार कार्य को तेज कर दिया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर साल मॉनसून में होने वाली जलभराव की समस्या से दिल्ली के बड़े हिस्से को राहत मिलने की उम्मीद है।

ड्रेनेज मास्टर प्लान पर फोकस

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में 1970 के दशक में ड्रेनेज मास्टर प्लान बनाया गया था, लेकिन बढ़ती आबादी, तेज शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों के बावजूद उसमें अपेक्षित बदलाव नहीं हो पाए। इसके कारण जलनिकासी व्यवस्था कमजोर होती चली गई। अब सरकार ने राजधानी की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या दबाव और जलभराव के कारणों को ध्यान में रखते हुए ड्रेनेज सिस्टम में व्यापक सुधार शुरू किया है।

जलभराव वाले इलाकों को प्राथमिकता

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि किसी भी महानगर की पहचान उसकी मजबूत और वैज्ञानिक जल-निकासी व्यवस्था से होती है। इसी सोच के साथ दिल्ली सरकार ने उन इलाकों को प्राथमिकता दी है, जहां वर्षों से जलभराव, ओवरलोडेड सीवर लाइनों और खराब ड्रेनेज के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है।

किराड़ी–मुंडका में बनेगा नया ट्रंक ड्रेन

पश्चिमी दिल्ली के किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई विधानसभा क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए रेलवे लाइन के समानांतर 4.5 किलोमीटर लंबे ट्रंक ड्रेन के निर्माण का प्रस्ताव है। यह ड्रेन मुंडका हॉल्ट स्टेशन से शुरू होकर सप्लीमेंट्री ड्रेन में मिलेगा। इसकी खासियत यह है कि रास्ते में आने वाले सभी सेकेंडरी ड्रेनों का पानी इसमें समाहित किया जाएगा। रेलवे भूमि में निर्माण के लिए रेलवे के साथ एमओयू साइन हो चुका है। प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिलते ही इसे 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

दक्षिण दिल्ली की जल-निकासी का होगा पुनर्गठन

लाडो सराय टी-पॉइंट से पुल प्रह्लादपुर तक लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। इसे देखते हुए एमबी रोड स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना को ड्रेनेज मास्टर प्लान में शामिल किया गया है। यह परियोजना पीडब्ल्यूडी द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। इसके तहत पुराने और क्षतिग्रस्त ड्रेनों को बदला जाएगा। साथ ही करीब 500 पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन, फुटपाथ निर्माण और बिजली-पानी की यूटिलिटी शिफ्टिंग का भी प्रावधान है।

उत्तर-पश्चिम दिल्ली को मिलेगी राहत

किराड़ी से रिठाला (रोहिणी) तक 7,200 मीटर लंबे ट्रंक ड्रेन का निर्माण उत्तर-पश्चिम दिल्ली की पुरानी समस्या का समाधान करेगा। इस परियोजना का लगभग 600 मीटर काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य पेड़ों की कटाई की अनुमति में देरी के कारण रुका था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।

रोहतक रोड पर युद्ध स्तर पर काम

रोहतक रोड (एनएच-10) पर जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के निर्माण और सुधार का काम तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना नांगलोई रेलवे मेट्रो स्टेशन से टीकरी बॉर्डर तक दोनों ओर ड्रेनों के निर्माण और सुधार से जुड़ी है।

जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या दबाव पर रेखा गुप्ता बताया

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ड्रेनेज मास्टर प्लान राजधानी के तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या दबाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य वर्षा जल को सुरक्षित और तेजी से यमुना तक पहुंचाना और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन चारों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली को हर मॉनसून में होने वाली जलभराव की समस्या से बड़ी हद तक स्थायी राहत मिलेगी।

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दिल्ली में इंटरनेशनल साइबर गैंग बेनकाब, SIM बॉक्स से चलता था 100 करोड़ का फ्रॉड

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने जनवरी 2026 की शुरुआत में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक ताइवानी नागरिक भी शामिल है।

Delhi Police IFSO Unit
दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Jan 2026 08:07 PM
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दिल्ली पुलिस की IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) यूनिट ने साइबर क्राइम के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस नेटवर्क के तार चीन, पाकिस्तान, नेपाल, कंबोडिया और ताइवान तक जुड़े पाए गए हैं। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक ताइवानी नागरिक भी शामिल है।

SIM बॉक्स के जरिए चलता था साइबर फ्रॉड

बता दें कि डीसीपी IFSO विनीत कुमार ने बताया कि यह गिरोह SIM बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल कर देशभर में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। दिल्ली, मोहाली और मुंबई से आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ कई SIM बॉक्स डिवाइस बरामद की गई हैं, जिनमें फिजिकल SIM और e-SIM दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

डिजिटल अरेस्ट और आतंकी हमलों का डर दिखाकर ठगी

बता दें कि जांच में सामने आया है कि ठग खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को टेरर फंडिंग, दिल्ली ब्लास्ट और पहलगाम आतंकी हमले जैसे मामलों में फंसाने की धमकी देते थे। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों की शुरुआत इन्हीं SIM बॉक्स के जरिए की जाती थी।

20 हजार नंबर, 100 करोड़ का फ्रॉड

बता दें कि पुलिस के मुताबिक इस सिंडिकेट के जरिए करीब 20,000 मोबाइल नंबर ऑपरेट किए जा रहे थे। अब तक 1000 से अधिक शिकायतें सामने आ चुकी हैं और शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है।

ड्राइवर से साइबर अपराधी तक

बता दें कि सबसे पहले 53 वर्षीय शशि प्रसाद को गिरफ्तार किया गया, जिसने किराए पर कमरा लेकर SIM बॉक्स का सेटअप किया था। पूछताछ में परविंदर सिंह का नाम सामने आया। दोनों पेशे से ड्राइवर थे और इस नेटवर्क से हर महीने एक लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे थे।

ताइवानी नागरिक करता था टेक्निकल सेटअप

बता दें कि गिरफ्तार आरोपी सुंग चेन, जो ताइवान का नागरिक है, पूरे SIM बॉक्स नेटवर्क का तकनीकी संचालन करता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि उसने मोहाली में भी इसी तरह का नेटवर्क खड़ा कर रखा था।

पाकिस्तान से मिल रहा था मार्गदर्शन

बता दें कि जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह को पाकिस्तान से गाइड किया जा रहा था। मोहाली से बरामद SIM में एक पाकिस्तानी SIM कंपनी (FEMA) से जुड़ा IMEI नंबर मिला है, जिससे विदेशी लिंक की पुष्टि हुई है।

देशभर में फैला नेटवर्क

बता दें कि कोयंबटूर से दिनेश नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है, जहां SIM बॉक्स लगाया गया था। निहाल विहार और नरेला में तमिलनाडु पुलिस द्वारा हाल ही में बरामद SIM बॉक्स भी इसी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं।

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आतिशी वीडियो केस में नया मोड़, FSL जांच ने खोली पोल

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर पंजाब पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है।

Forensic investigation revealed...
फॉरेंसिक जांच में खुलासा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Jan 2026 03:08 PM
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बता दें कि पुलिस का दावा है कि फॉरेंसिक जांच में यह साफ हो गया है कि आतिशी ने अपने भाषण में ‘गुरु’ शब्द का इस्तेमाल ही नहीं किया था। सोशल मीडिया पर वायरल किया गया वीडियो एडिटेड और डॉक्टर्ड था, जिसे धार्मिक भावनाएं भड़काने के उद्देश्य से फैलाया गया।

फॉरेंसिक जांच में सामने आई सच्चाई

पंजाब के जालंधर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, वायरल वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL), पंजाब भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि वीडियो के ऑडियो के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी और ऐसे शब्द जोड़े गए, जिन्हें आतिशी ने कभी नहीं कहा।

कपिल मिश्रा के सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट हुआ वीडियो

यह वीडियो दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) से पोस्ट किया गया था। वीडियो में कथित तौर पर आतिशी को गुरुओं के खिलाफ आपत्तिजनक और ईशनिंदा वाली टिप्पणी करते हुए दिखाया गया, साथ ही बेहद भड़काऊ कैप्शन भी लगाए गए थे। वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और बीजेपी के कई नेताओं ने आतिशी पर निशाना साधा।

जालंधर पुलिस में दर्ज हुई एफआईआर

इस मामले में इकबाल सिंह की शिकायत पर जालंधर पुलिस कमिश्नरेट ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आतिशी का एडिटेड और डॉक्टर्ड वीडियो जानबूझकर अपलोड और सर्कुलेट किया गया, ताकि सामाजिक और धार्मिक तनाव पैदा किया जा सके।

जांच के बाद बढ़ी कार्रवाई

विवाद बढ़ने के बाद पंजाब पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद पुलिस का कहना है कि वीडियो पूरी तरह से छेड़छाड़ किया हुआ है। अब यह देखना होगा कि इस मामले में आगे किन लोगों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है और सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक कंटेंट को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।


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