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राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर आज एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन के चलते यह स्थान चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सोशल मीडिया पर चर्चित कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बीच यह ऐतिहासिक स्थल एक बार फिर देशभर में ट्रेंड करने लगा है।

Jantar Mantar : राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर आज एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन के चलते यह स्थान चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सोशल मीडिया पर चर्चित कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बीच यह ऐतिहासिक स्थल एक बार फिर देशभर में ट्रेंड करने लगा है। कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के पास स्थित जंतर-मंतर केवल धरना-प्रदर्शन का स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक और खगोलीय विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। Jantar Mantar
दिल्ली के बीचों बीच स्थित यह स्थान लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और छात्र आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां रोजाना विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन देखने को मिलते हैं। लेकिन इसकी पहचान केवल विरोध-प्रदर्शनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व भी उतना ही गहरा है। Jantar Mantar
जंतर-मंतर का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी की शुरुआत में करवाया था। सवाई जयसिंह एक कुशल शासक होने के साथ-साथ खगोल विज्ञान, गणित और ज्योतिष में गहरी रुचि रखते थे। उस समय उपलब्ध खगोलीय गणनाएं और कैलेंडर सटीक नहीं थे, जिसके कारण ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति में त्रुटियां सामने आती थीं। इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने देशभर में पांच वेधशालाओं का निर्माण कराया, जिनमें दिल्ली का जंतर-मंतर सबसे प्रमुख माना जाता है। Jantar Mantar
“जंतर-मंतर” शब्द की जड़ें संस्कृत भाषा में मिलती हैं, जहाँ यह दो हिस्सों से मिलकर बना है ‘जंतर’ यानी यंत्र या उपकरण और ‘मंतर’ यानी गणना या हिसाब करने की प्रक्रिया। इस तरह इसका सीधा अर्थ निकलता है ऐसा वैज्ञानिक यंत्र, जो समय और खगोलीय गतिविधियों की सटीक गणना के लिए उपयोग में लाया जाता है। Jantar Mantar
महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने खगोल विज्ञान को अधिक सटीक बनाने के लिए पारंपरिक छोटे धातु उपकरणों की जगह पत्थर और ईंटों से बने विशाल और स्थायी यंत्रों का निर्माण कराया, ताकि मौसम या समय के बदलाव का उनकी गणनाओं पर कोई असर न पड़े। दिल्ली के जंतर-मंतर में आज भी ऐसे कई अद्भुत वैज्ञानिक यंत्र मौजूद हैं, जो उस दौर की उन्नत सोच और तकनीकी समझ को दर्शाते हैं। Jantar Mantar
सम्राट यंत्र इस वेधशाला का सबसे प्रमुख और विशाल यंत्र माना जाता है। यह एक विशाल सूर्य घड़ी (सन डायल) है, जिसकी ऊंचाई लगभग 70 फीट है। सूर्य की छाया के आधार पर यह न केवल समय को अत्यंत सटीक रूप से बताता है, बल्कि खगोलीय गणनाओं में भी इसकी अहम भूमिका रही है। Jantar Mantar
जय प्रकाश यंत्र दो विशाल अर्धगोलाकार संरचनाओं के रूप में बना हुआ है, जिसकी सतह पर खगोलीय गणनाओं से जुड़ी रेखाएं अंकित हैं। इसके ऊपर लगे तार की छाया के माध्यम से आकाश में ग्रहों और तारों की स्थिति का सटीक निर्धारण किया जाता था, चाहे दिन हो या रात। Jantar Mantar
राम यंत्र दो बड़े बेलनाकार ढांचों के रूप में निर्मित है, जिनके बीच एक केंद्रीय स्तंभ स्थित है। यह यंत्र आकाशीय पिंडों की ऊंचाई और दिशा को मापने में उपयोग किया जाता था, जिससे खगोल वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण गणनाएं करने में मदद मिलती थी। Jantar Mantar
मिश्र यंत्र अपने नाम के अनुरूप विभिन्न यंत्रों का संयुक्त रूप है। इसकी सबसे खास विशेषता यह थी कि यह दुनिया के अलग-अलग शहरों में एक ही समय में दोपहर होने का सटीक अनुमान लगाने में सक्षम था, वह भी दिल्ली में बैठे-बैठे। Jantar Mantar
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