केंद्र सरकार पर लगातार तीखे हमले बोलने वाली कांग्रेस को इस बार उसी केंद्र से बड़ी राहत मिलती दिख रही है। दिल्ली के सियासी दिल माने जाने वाले 24 अकबर रोड स्थित पार्टी के ऐतिहासिक दफ्तर को फिलहाल खाली नहीं करना होगा।

Delhi News : केंद्र सरकार पर लगातार तीखे हमले बोलने वाली कांग्रेस को इस बार उसी केंद्र से बड़ी राहत मिलती दिख रही है। दिल्ली के सियासी दिल माने जाने वाले 24 अकबर रोड स्थित पार्टी के ऐतिहासिक दफ्तर को फिलहाल खाली नहीं करना होगा। कुछ दिन पहले तक पार्टी हलकों में इस बात को लेकर गहरी बेचैनी थी कि सरकार के नोटिस के बाद कांग्रेस को अपने इस पुराने ठिकाने से हटना पड़ सकता है। कांग्रेस के अनुसार, 13 मार्च को भेजे गए नोटिस में 24 अकबर रोड के मुख्यालय के साथ 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस कार्यालय को भी 28 मार्च तक खाली करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश ने पार्टी के भीतर कानूनी लड़ाई की तैयारी तक शुरू करवा दी थी। हालांकि अब ताजा हालात में कांग्रेस को अस्थायी राहत मिल गई है और उसका ऐतिहासिक दफ्तर फिलहाल बरकरार रहेगा।
24 अकबर रोड केवल एक सरकारी बंगला भर नहीं रहा, बल्कि दशकों तक यह कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्रीय स्थल बना रहा। इंदिरा गांधी के दौर से ही यह पता पार्टी की पहचान का हिस्सा रहा है। कांग्रेस के लंबे राजनीतिक सफर, रणनीतिक बैठकों, बड़े निर्णयों और ऐतिहासिक घटनाओं की गूंज इस परिसर से जुड़ी रही है। यही वजह है कि इस बंगले को खाली कराने का नोटिस पार्टी के लिए सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक महत्व का विषय भी बन गया था।
हालांकि कांग्रेस अब अपने नए मुख्यालय में प्रवेश कर चुकी है। नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर बने पार्टी के नए दफ्तर ‘इंदिरा भवन’ का उद्घाटन पिछले वर्ष जनवरी में किया गया था। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे थे। नया कार्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस है और कांग्रेस की संगठनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके बावजूद 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड से पार्टी का जुड़ाव बना हुआ था, जिस पर अब सरकारी कार्रवाई का सवाल उठ खड़ा हुआ।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय की 2006 की नीति के आधार पर की गई थी। इस नीति के तहत राष्ट्रीय दलों को अपना स्थायी कार्यालय बनाने के लिए जमीन आवंटित की जाती है। लेकिन अगर कोई दल नई जमीन का आवंटन स्वीकार कर वहां अपना भवन बना लेता है, तो कब्जा मिलने की तारीख से तीन साल के भीतर उसे पहले से आवंटित पुराने सरकारी परिसर खाली करने होते हैं। कांग्रेस को दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर मिली जमीन पर नए मुख्यालय के निर्माण की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो गई थी। पार्टी ने 2009 में इस पर काम आरंभ किया था। ‘इंदिरा भवन’ के रूप में तैयार यह भवन अब इस्तेमाल में आ चुका है। ऐसे में पुराने परिसरों को लेकर सरकार की ओर से नोटिस जारी किया गया था।
24 अकबर रोड का कांग्रेस से रिश्ता 1978 से जुड़ा हुआ है। उस समय यह बंगला आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ सांसद जी. वेंकट स्वामी के नाम आवंटित था, लेकिन बाद में यही परिसर कांग्रेस का केंद्रीय दफ्तर बन गया। यह स्थान राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यह सोनिया गांधी के निवास 10 जनपथ के बेहद करीब स्थित है। दोनों परिसरों के बीच सीधा संपर्क होने के कारण यह स्थान लंबे समय तक पार्टी गतिविधियों का सहज और प्रभावी केंद्र बना रहा।
24 अकबर रोड की कहानी केवल कांग्रेस मुख्यालय बनने से शुरू नहीं होती। नई दिल्ली के निर्माण के दौरान लुटियंस क्षेत्र में बने प्रमुख बंगलों में यह भी शामिल था। ब्रिटिश काल में यह बंगला वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल को आवंटित था। स्वतंत्रता के बाद इसकी भूमिका बदली और 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मंजूरी से इसे ‘बर्मा हाउस’ के रूप में इस्तेमाल किए जाने की अनुमति दी गई थी, जहां म्यांमार के राजदूत का निवास रहा। Delhi News