संसद के पुराने सेंट्रल हॉल में ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम की अगुवाई की और भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश तथा कई वरिष्ठ नेताउपस्थित रहे।

बता दें कि राष्ट्रपति ने संविधान निर्माताओं, विशेष रूप से डॉ. भीमराव आम्बेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि यह दिन हमें हमारी लोकतांत्रिक परंपराओं, अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश संविधान निर्माताओं के प्रति आदर व्यक्त कर रहा है।
बता दें कि इस वर्ष संविधान दिवस के मौके पर एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान के 9 भाषाओं — मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया, असमिया और मलयालम — में डिजिटल अनुवाद को जारी किया। उन्होंने कहा कि संविधान की बहुभाषी उपलब्धता नागरिकों को अपनी भाषाई पहचान के साथ संविधान को समझने में मदद करेगी।
बता दें कि राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया और राष्ट्रगान के साथ समारोह का औपचारिक समापन हुआ। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता—पीएम मोदी, राहुल गांधी, जेपी नड्डा, मल्लिकार्जुन खड़गे आदि—एक साथ उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले समय में यदि विभिन्न लोकतंत्रों और संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन होगा, तो भारतीय लोकतंत्र और संविधान का विवरण स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। संविधान सभा ने न केवल संविधान बनाया बल्कि अंतरिम संसद के रूप में देश को दिशा भी दी। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं के योगदान को कृतज्ञता के साथ याद किया।
कार्यक्रम में नेताओं और सांसदों ने सामूहिक रूप से प्रस्तावना का वाचन किया, जिसके बाद राष्ट्रगान हुआ। यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र की गौरवशाली परंपरा को पुनः स्मरण कराने वाला रहा।