कृत्रिम बारिश से बदलेगा दिल्ली का मौसम? जानें इस अनोखे प्रयोग के पीछे की खास वजह!
भारत
चेतना मंच
30 Jun 2025 05:55 PM
राजधानी दिल्ली जल्द ही एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक प्रयोग की गवाह बनने जा रही है। दिल्ली सरकार ने पहली बार शहर में कृत्रिम बारिश कराने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इसका उद्देश्य है — शहर के लगातार बिगड़ते वायु प्रदूषण को कम करना और दिल्लीवासियों को राहत पहुंचाना।
कब और कैसे होगी कृत्रिम बारिश?
दिल्ली में यह कृत्रिम बारिश 4 जुलाई से 11 जुलाई 2025 के बीच कराई जाएगी। इस तकनीक को क्लाउड सीडिंग कहा जाता है, जिसमें बादलों में खास तरह के रसायन जैसे सिल्वर आयोडाइड नैनो कण, आयोडीन युक्त नमक और सेंधा नमक को विमानों के माध्यम से छिड़का जाता है। इन रसायनों की मदद से नमी वाले बादलों में बूंदों का निर्माण तेज़ किया जाता है, जिससे बारिश हो सकती है।
कौन कर रहा है इस परियोजना का संचालन?
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा किया जा रहा है और इसे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की निगरानी में अंजाम दिया जा रहा है। तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर को सौंपी गई है। आईआईटी कानपुर ने इस मिशन के लिए आईएमडी पुणे के साथ मिलकर समन्वय किया है, ताकि मौसम के अनुकूल समय में छिड़काव किया जा सके।
कहां और कितनी बार किया जाएगा छिड़काव?
इस योजना के तहत पांच बार विमान उड़ाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक उड़ान लगभग 90 मिनट की होगी और 100 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में रसायन का छिड़काव किया जाएगा। उड़ानें उत्तरी-पश्चिमी और बाहरी दिल्ली में केंद्रित होंगी, जबकि लुटियन्स जोन और आईजीआई एयरपोर्ट जैसे उच्च-सुरक्षा क्षेत्रों को इससे बाहर रखा जाएगा। अगर मौसम अनुकूल नहीं रहा, तो इसके लिए वैकल्पिक तिथियों की भी व्यवस्था की गई है।
क्या होगा इस प्रयोग का असर?
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस परियोजना को दिल्ली के प्रदूषण नियंत्रण के इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि "स्वच्छ हवा हर दिल्लीवासी का बुनियादी अधिकार है" और सरकार इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। उन्हें उम्मीद है कि यह प्रयोग आने वाले समय में वायु गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा।