हर साल सर्दियों में हवा की गुणवत्ता और भी खराब हो जाती है जिससे लोगों की सेहत पर भी असर पड़ता है। इसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए अब सरकार नए-नए उपायों पर विचार कर रही है। इसी कड़ी में एक ऐसा सुझाव सामने आया है जिसमें पीक समय में सड़क पर गाड़ी निकालने पर शुल्क लगाने की बात कही गई है।

दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण और सड़कों पर गाड़ियों की भारी भीड़ लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। हर साल सर्दियों में हवा की गुणवत्ता और भी खराब हो जाती है जिससे लोगों की सेहत पर भी असर पड़ता है। इसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए अब सरकार नए-नए उपायों पर विचार कर रही है। इसी कड़ी में एक ऐसा सुझाव सामने आया है जिसमें पीक समय में सड़क पर गाड़ी निकालने पर शुल्क लगाने की बात कही गई है। इस व्यवस्था को कंजेशन प्राइसिंग कहा जाता है जिसका उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
दिल्ली की सड़कों पर रोजाना लाखों गाड़ियां चलती हैं। इनकी वजह से ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण दोनों ही बढ़ते जा रहे हैं। खासकर पीक आवर यानी सुबह और शाम के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सड़कों के इस्तेमाल पर कुछ शुल्क लगाया जाए तो लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग कर सकते हैं। इसी सोच के साथ विशेषज्ञों के एक पैनल ने दिल्ली सरकार के सामने कई सुझाव रखे हैं जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा कंजेशन प्राइसिंग को लेकर हो रही है।
कंजेशन प्राइसिंग का मतलब है कि शहर के कुछ खास इलाकों या पीक समय में सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए शुल्क देना पड़े। इसका मकसद लोगों को अनावश्यक रूप से गाड़ी निकालने से रोकना और ट्रैफिक को नियंत्रित करना होता है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो संभव है कि शहर के कुछ भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्रवेश करने के लिए गाड़ियों से फीस ली जाए। इससे ट्रैफिक कम होने की उम्मीद है और साथ ही प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा का कहना है कि सरकार प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर ध्यान देते हुए सेक्टर के हिसाब से रणनीति बना रही है। उनका कहना है कि विशेषज्ञों के सुझावों का अध्ययन किया जा रहा है और जहां जरूरत होगी वहां और रिसर्च भी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसे उपायों को लागू करना है जिनका असर लंबे समय तक दिखाई दे और शहर की हवा साफ हो सके।
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने सिर्फ गाड़ियों पर शुल्क लगाने की ही बात नहीं की बल्कि कई अन्य उपाय भी सुझाए। इनमें पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की व्यवस्था को मजबूत करना, कचरा प्रबंधन में सुधार करना और निर्माण स्थलों पर उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना शामिल है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाना और शहर के अलग-अलग संस्थानों के खुलने-बंद होने के समय में बदलाव करने जैसे सुझाव भी दिए गए।
दिल्ली में अगर यह योजना लागू होती है तो यह कोई नई व्यवस्था नहीं होगी। दुनिया के कई बड़े शहरों में पहले से ही सड़कों पर भीड़ कम करने के लिए इस तरह के शुल्क लिए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर लंदन में साल 2003 से सेंट्रल इलाके में गाड़ी ले जाने पर शुल्क लिया जाता है। इसी तरह स्टॉकहोम, सिंगापुर और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्रवेश करने पर फीस देनी पड़ती है। इन शहरों में इस व्यवस्था से ट्रैफिक और प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद मिली है।
फिलहाल दिल्ली में इस योजना को लागू करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार और विशेषज्ञ इस पर विस्तार से अध्ययन कर रहे हैं। जिन सुझावों के लिए और तकनीकी मूल्यांकन की जरूरत होगी उन पर आगे रिसर्च की जाएगी।