Delhi : मुगल मस्जिद नमाज मामले में कोर्ट का एएसआई और केंद्र को नोटिस
Court notice to ASI and Center in Mughal Masjid Namaz case
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:12 PM
नई दिल्ली। दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। याचिका में बोर्ड ने महरौली इलाके में मुगल मस्जिद में नमाज अदा करने से रोकने के मामले के जल्द निपटान का अनुरोध किया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने मंगलवार को बोर्ड की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये नोटिस जारी किए।
Delhi
27 अप्रैल को होगी मामले की सुनवाई
याचिका में उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के आलोक में बोर्ड द्वारा मामले की सुनवाई निर्धारित तिथि 21 अगस्त से पहले करने का अनुरोध किया है। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से मामले को जल्द से जल्द निपटाने का अनुरोध किया था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील एम. सूफियान सिद्दीकी ने कहा कि मामला काफी समय से लंबित है। उन्होंने मामले को सुनवाई के वास्ते 27 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध करने की अपील भी की। सिद्दीकी ने कहा कि मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत है, क्योंकि रमजान का महीना चल रहा है, जो जल्द ही ईद-उल-फितर पर समाप्त होगा। लोग मुगल मस्जिद में नमाज अदा करने का इंतजार कर रहे हैं। न्यायमूर्ति ओहरी ने कहा कि नोटिस जारी करने और मामले को अप्रैल के अंत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
बोर्ड ने दिल्ली के महरौली इलाके में मुगल मस्जिद में नमाज रोकने के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। उच्च न्यायालय का रुख करते हुए याचिकाकर्ता ने शिकायत की कि एएसआई के अधिकारियों ने बिना कोई नोटिस या आदेश जारी किए 13 मई 2022 से मुगल मस्जिद में नमाज अदा करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी, जो गैरकानूनी, मनमाना और जल्दबाजी में किया गया फैसला है।
Delhi
सुप्रीम कोर्ट ने पहले खारिज कर दी थी याचिका
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसने मस्जिद में नमाज रोकने के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति की अर्जी पर समय से पहले सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से कहा था कि वह लंबित मामले में सुनवाई करे और यथाशीघ्र इस पर निर्णय करे।
याचिका में कहा गया कि मस्जिद को संरक्षित स्मारक के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। यह संरक्षित घोषित स्मारकों का हिस्सा भी नहीं है। पिछले साल 13 मई से पहले इसे नमाज के लिए कभी बंद नहीं किया गया था। उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका के जवाब में एएसआई ने कहा कि मस्जिद कुतुब मीनार की सीमा के भीतर आती है। इसलिए वह संरक्षित क्षेत्र के भीतर है, जहां नमाज की अनुमति नहीं दी जा सकती।
देश विदेशकी खबरों से अपडेट रहने लिएचेतना मंचके साथ जुड़े रहें।देश–दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमेंफेसबुकपर लाइक करें याट्विटरपर फॉलो करें।