भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस हाईवे के लिए टोल दरें तय कर दी हैं और संकेत दिए हैं कि अगले दो महीनों के भीतर यहां नियमित वसूली शुरू कर दी जाएगी। हालांकि यात्रियों के लिए एक राहत की बात भी है।

Delhi-Dehradun Economic Corridor : दिल्ली से देहरादून के बीच तेज और आसान सफर देने वाला नया इकोनॉमिक कॉरिडोर अब टोल व्यवस्था के दायरे में आने जा रहा है। अब तक इस रूट पर बिना टोल यात्रा कर रहे लोगों के लिए जल्द ही यह सुविधा खत्म हो सकती है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस हाईवे के लिए टोल दरें तय कर दी हैं और संकेत दिए हैं कि अगले दो महीनों के भीतर यहां नियमित वसूली शुरू कर दी जाएगी। हालांकि यात्रियों के लिए एक राहत की बात भी है। यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में दिल्ली से देहरादून जाकर वापस लौटने की योजना बनाता है, तो उसे टोल में अच्छी-खासी बचत मिल सकती है। यानी सफर भले महंगा होने जा रहा हो, लेकिन समझदारी से भुगतान करने पर जेब पर बोझ कुछ कम किया जा सकता है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर सफर अब रफ्तार के साथ खर्च का भी नया हिसाब लेकर आएगा। देहरादून तक कार से एकतरफा यात्रा के लिए 675 रुपये तक टोल देना होगा, लेकिन अगर यात्री पहले ही राउंड ट्रिप का भुगतान कर दे, तो कुल रकम 1010 रुपये पर सिमट जाएगी। इस व्यवस्था में 340 रुपये की बचत सीधे यात्री की जेब में रह सकती है। ऐसे में जो लोग उसी दिन वापसी की योजना बना रहे हैं, उनके लिए एकमुश्त दोनों तरफ का टोल देना ज्यादा लाभकारी रहेगा।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भारतमाला परियोजना के तहत तैयार किया गया है। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के निर्माण पर लगभग 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। NHAI का अनुमान है कि इस कॉरिडोर से हर साल 900 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसी आधार पर माना जा रहा है कि अगले 13 वर्षों में परियोजना की लागत की भरपाई हो जाएगी। जानकारी के अनुसार, शुरुआती तीन महीनों तक टोल वसूली का जिम्मा एक अस्थायी एजेंसी के पास रहेगा। इसके बाद लंबे समय के संचालन के लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दिल्ली से देहरादून तक सफर करने वालों के लिए टोल का पूरा गणित अब साफ हो गया है। NHAI की प्रस्तावित दरों के मुताबिक, अलग-अलग पड़ावों तक पहुंचने के लिए कार चालकों को अलग शुल्क देना होगा। सबसे कम टोल काठा रूट पर 235 रुपये तय किया गया है, जबकि देहरादून तक एकतरफा सफर के लिए 675 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। वहीं, जो यात्री आने-जाने का टोल एक साथ जमा करेंगे, उन्हें राहत भी मिलेगी। उदाहरण के तौर पर देहरादून रूट पर एक तरफ 675 रुपये देने के बजाय राउंड ट्रिप का संयुक्त भुगतान 1010 रुपये होगा, यानी यात्रियों को अच्छी-खासी बचत का मौका मिलेगा। सहारनपुर के रसूलपुर और सैयद माजरा जैसे पड़ावों के लिए भी टोल दरें क्रमश: 420 और 530 रुपये एकतरफा रखी गई हैं। साफ है कि यह नया हाईवे जहां सफर को तेज और आरामदायक बनाएगा, वहीं जेब पर पड़ने वाला असर भी अब पहले से तय नजर आने लगा है। NHAI के अनुमान के मुताबिक, इस हाईवे पर चलने वाले कुल वाहनों में लगभग 71 प्रतिशत हिस्सेदारी कारों की होगी। यही वजह है कि टोल से होने वाली सबसे बड़ी आय भी कार चालकों से ही आने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा भारी और मल्टी-एक्सल वाहनों से लगभग 11 प्रतिशत, बस और ट्रक से 11 प्रतिशत तथा हल्के वाणिज्यिक वाहनों से करीब 3 प्रतिशत आय होने का अनुमान है।
इस एक्सप्रेसवे को आधिकारिक रूप से दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भी कहा जाता है। इसकी कुल लंबाई करीब 210 से 213 किलोमीटर के बीच बताई जा रही है और इसे विकसित करने पर केंद्र सरकार ने लगभग 13,000 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है। यह परियोजना केवल दिल्ली और देहरादून के बीच दूरी घटाने का काम नहीं करेगी, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने वाली धुरी भी साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि इस मार्ग के शुरू होने के बाद आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को देश की सबसे आधुनिक सड़क परियोजनाओं में गिना जा रहा है। यह सिर्फ एक सामान्य हाईवे नहीं, बल्कि एक्सेस-कंट्रोल्ड, मल्टी-लेन और पर्यावरण-अनुकूल कॉरिडोर है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इस परियोजना की सबसे खास पहचान राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर बना करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है। इसे एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बताया जाता है। यह हिस्सा सड़क निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। इसके अलावा इस एक्सप्रेसवे में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री, सोलर आधारित लाइटिंग सिस्टम, वर्षा जल संरक्षण तकनीक और शोर नियंत्रण बैरियर जैसी कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। सड़क के दोनों ओर हरित पट्टियां विकसित की गई हैं, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की शुरुआत दिल्ली के अक्षरधाम क्षेत्र से होगी। इस मार्ग पर कुल 16 कट या एंट्री-एग्जिट प्वाइंट प्रस्तावित हैं, ताकि अलग-अलग शहरों और कस्बों के लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके। इसमें गीता कॉलोनी, शास्त्री पार्क, मंडोला विहार-लोनी, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (खेकरा), बागपत का मंडोला, लोहड्डा-बड़ौत ईस्ट बाईपास, करौंदा महाजन, बाबरी, थानाभवन के पास गोगवान जलालपुर, शामली साउथ, सहारनपुर साउथ बाईपास, सहारनपुर ईस्ट, गणेशपुर, देहरादून का आशारोड़ी क्षेत्र, डाट काली टनल के आसपास और हर्रावाला-देहरादून जैसे प्रमुख बिंदु शामिल हैं। Delhi-Dehradun Economic Corridor