सोशल मीडिया पर ईसी की कड़ी नजर, जानें क्या बरतें सावधानी
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भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:25 AM
delhi Election : आजकल चुनाव जीतने में सभी राजनीतिक दल सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल करते हैं। बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो सोशल मीडिया पर आई खबरों को ही सच मान लेते हैं और उसी से मोटीवेटेड होते हैं। कभी कभी सोशल मीडिया पर काफी आपत्तिजनक चीजें परोस दी जाती हैं और जिन चीजों पर बैन होता है उसे भी खुलेआम परोस दिया जाता है। अब होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों की सोशल मीडिया की गतिविधि पर चुनाव आयोग की कड़ी नजर है। सोशल मीडिया पर दिए जा रहे विज्ञापनों और सभी पोस्ट की निगरानी करने की जिम्मेदारी आयोग ने दिल्ली चुनाव कार्यालय को सौंपी है।
एक दशक पहले ही निर्वाचन आयोग ने तय किए थे दिशा निर्देश
चुनाव के दौरान और उसके आसपास सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों व उनके प्रत्याशियों और उनकी पार्टी द्वारा प्रचार प्रसार पर भारी-खर्च किया जाता है, आपत्तिजनक पोस्ट और मेनिफेस्टो से इतर किए गए दावों पर तत्काल ईसी द्वारा तुरत एक्शन लिया जाएगा। राजनीतिक दलों ने जब सोशल मीडिया को अपने तथा पार्टी के प्रचार के प्रमुख साधन के रूप में अपनाना शुरू कर दिया तो आज से एक दशक पहले ही लोकसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग ने दिशा निर्देश तय कर दिए थे।
सोशल मीडिया पर किए जाने वाले प्रचार और उसके ऊपर किए गए खर्च पर भी निगरानी
निर्वाचन आयोग के दिशा निदेर्शों के तहत फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, यूट्यूब, इन्स्टाग्राम, स्नेपचैट आदि जैसी वेबसाइट्स को सोशल मीडिया कहा जाता है। जब इस पर राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने अपना प्रचार प्रसार शुरू कर दिया तो सोशल मीडिया को भी आदर्श आचार संहिता के दायरे में 2014 में लाया गया था। इसके साथ ही फेसबुक-गूगल जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी चुनाव को देखते हुए कंटेंट की निगरानी करने का आश्वासन दिया था। इन दिशा निर्देशों के आधार पर दिल्ली चुनाव कार्यालय राजधानी में होने वाले चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के सोशल मीडिया पर किए जाने वाले प्रचार और उसके ऊपर किए गए खर्च पर भी निगरानी रखेगा। हालांकि अभी तक सोशल मीडिया पर किसी को आपत्तिजनक सामग्री या गलत ढंग से किए गए खर्च के लिए पनिश नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग के प्रमुख दिशा-निर्देश
पिछले काफी समय से देखने को मिल रहा है कि राजनीतिक पार्टियां और उनके प्रत्याशी चुनाव में सोशल मीडिया पर अपने अपने मीडिया सेल द्वारा अच्छी बुरी सभी तरह की चीजें परोसने लगे हैं। इस तरह इसके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इसके मानक तय किए गए थे, और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के चलते ही आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के जरिये सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री को चुनाव आचार संहिता के दायरे में लाने का फैसला 2014 के आम चुनाव के दौरान ही किया था। उस समय चुनाव आयोग का मानना था कि आचार संहिता होने के कारण होने वाले चुनाव में पारदर्शिता और बराबरी के अवसर बनाए रखने के लिये सोशल मीडिया पर अंकुश और नियंत्रण लगाना बहुत जरूरी है।
सोशल मीडिया पर होता है उल्लंघन
यह बात सर्वविदित है और चुनाव आयोग का भी यह भी मानना है कि सोशल मीडिया पर चुनाव कानूनों का निश्चित रूप से उल्लंघन होता है। हालांकि इस लगाम लगाने की कवायद के तहत ही चुनाव आयोग के नए दिशा-निदेर्शों के अनुसार, प्रत्याशियों को नामांकन दाखिल करते समय दिये जाने वाले हलफनामे में अपनी ई-मेल आईडी और अन्य अधिकृत सोशल मीडिया एकाउंट्स की पूरी और सही सही जानकारी देनी होगी।
विज्ञापन देने से पहले चुनाव आयोग से मंजूरी जरूरी
अब आयोग की दिशा-निर्देश के मुताबिक किसी भी इंटरनेट आधारित माध्यम यानी सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापन देने से पहले चुनाव आयोग द्वारा तय अधिकारी से मंजूरी लेनी आवश्यक होगी। राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स से असत्यापित विज्ञापन, रक्षाकर्मियों की तस्वीरें, नफरत भरे भाषण, व झूठी खबरें, पोस्ट नहीं कर सकेंगे। ऐसा कोई भी कंटेंट पोस्ट करना प्रतिबंधित है, जिससे चुनावी प्रक्रिया या शांति बाधित हो रहा हो। सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो रहा हो। ऐसा कंटेन्ट देने पर तत्काल प्रभाव से चुनाव आयोग की उस प्रत्याशी पर गाज गिरनी स्वाभाविक है।