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Delhi Electricity Bill: राजधानी दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगी बिजली का झटका लग सकता है। जून से बिजली दरों में 1 प्रतिशत से 3.30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

राजधानी दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगी बिजली का झटका लग सकता है। जून से बिजली दरों में 1 प्रतिशत से 3.30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह बढ़ोतरी सभी उपभोक्ताओं पर लागू नहीं होगी। जिन लोगों की बिजली खपत कम है उन्हें फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिल में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
जानकारी के अनुसार, 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को इस बढ़ोतरी का सीधा असर झेलना पड़ सकता है। ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आ सकते हैं। दूसरी ओर, 0 से 200 यूनिट और 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद है। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं के बिल में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने की संभावना जताई जा रही है।
दिल्ली विद्युत नियामक आयोग ने विभिन्न बिजली वितरण कंपनियों के लिए पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इसके तहत दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी BRPL के लिए PPAC बढ़ाया गया है। इसी तरह ट्रांस यमुना क्षेत्र में बिजली आपूर्ति करने वाली BYPL और उत्तरी एवं बाहरी दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली TPDDL के लिए भी PPAC में इजाफा किया गया है। बिजली कंपनियों का कहना है कि बिजली खरीदने की लागत में बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है। यही अतिरिक्त लागत अब उपभोक्ताओं के बिजली बिल में दिखाई दे सकती है।
नई दरें जून महीने से लागू हो चुकी हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को इसका असर जुलाई में आने वाले बिजली बिलों में देखने को मिल सकता है। खासकर गर्मियों के दौरान एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले परिवारों के बिल में बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है।
बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। व्यापारियों और उद्यमियों के प्रमुख संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए दिल्ली सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन का कहना है कि बिजली महंगी होने से दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और फैक्ट्री संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इससे कारोबार की लागत बढ़ सकती है और कई उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
व्यापारिक संगठनों का दावा है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो कुछ उद्योग दूसरे राज्यों की ओर रुख कर सकते हैं जिससे दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
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