'स्पेशल 26' की तर्ज पर नौकरानी ने मालिक के घर कराई फर्जी ईडी रेड, गिरफ्तार

फिल्म 'स्पेशल 26' से प्रेरित होकर इस घटना को अंजाम दिया। 11 फरवरी को पुलिस की वर्दी पहने तीन व्यक्तियों ने ईडी अफसर बनकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 86 वर्षीय सेवानिवृत्त आर्किटेक्ट आरसी सभरवाल के घर में जबरन प्रवेश किया।

Fake ED raid in Delhi
नौकरानी की साजिश में लूटा मकान मालिक (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar26 Feb 2026 03:37 PM
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Fake ED raid in Delhi : दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक घरेलू नौकरानी ने फिल्म 'स्पेशल 26' से प्रेरित होकर अपने ही मालिक के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की फर्जी रेड करवा दी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में नौकरानी समेत दो महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से नकली वर्दी, हथियार और चोरी का सामान बरामद किया है।

फिल्म की तर्ज पर थी साजिश रची गई

बताया जा रहा है कि आरोपियों ने फिल्म 'स्पेशल 26' से प्रेरित होकर इस घटना को अंजाम दिया। 11 फरवरी को पुलिस की वर्दी पहने तीन व्यक्तियों ने ईडी अफसर बनकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 86 वर्षीय सेवानिवृत्त आर्किटेक्ट आरसी सभरवाल के घर में जबरन प्रवेश किया। टीम ने परिवार को धमकाया, उनके मोबाइल फोन छीन लिए और तलाशी का नाटक किया। हालांकि, जब पीड़ित के पोते ने सवाल-जवाब किए और उन्हें संदेह होने लगा, तो आरोपी लगभग 3-4 लाख रुपये नकद और 7 महंगी घड़ियां लेकर फरार हो गए।

350 सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग

केस को सुलझाने के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू की। पुलिस ने डी-ब्लॉक आवासीय क्षेत्र के निजी कैमरों, दिल्ली पुलिस के सर्विलांस कैमरों और हाई स्पीड ट्रैफिक कैमरों सहित 350 से अधिक सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। फुटेज के आधार पर संदिग्धों की कार को सराय काले खान क्षेत्र से गुजरते और गाजीपुर बॉर्डर पार करते हुए देखा गया। इस सुराग के आधार पर पुलिस गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-4 पहुंची, जहां आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई कार मिली।

नौकरानी निकली मास्टरमाइंड

तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल डेटा के आधार पर पुलिस टीम पूजा राजपूत के घर पहुंची। खुफिया जानकारी में सामने आया कि शिकायतकर्ता की नौकरानी रेखा देवी अक्सर इसी पते पर आती-जाती थी। 25 फरवरी को पुलिस ने छापा मारकर रेखा देवी और पूजा राजपूत (रेखा की भाभी) को गिरफ्तार कर लिया। पूजा के घर से आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट की पूरी वर्दी, वायरलेस सेट, नकली आईडी कार्ड और चोरी की घड़ियां बरामद हुईं। जांच में पता चला कि नौकरानी रेखा देवी ही इस पूरी घटना की मास्टरमाइंड थी और उसने अपने साथियों को घर की पूरी जानकारी दी थी।

फरार आरोपी और आगे की कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी पहचान प्रकाश (टीबीपी कांस्टेबल), मनीष और उपदेश सिंह थापा (सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी) के रूप में हुई है। पुलिस टीम शेष आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। इस घटना की तर्ज पर पिछले दिनों गुजरात में भी फर्जी ईडी रेड का मामला सामने आया था। दिल्ली का यह मामला भी 'स्पेशल 26' के अंदाज में किए गए अपराध का एक बड़ा उदाहरण है। Fake ED raid in Delhi

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NCERT की किताब पर 48 घंटे में सुप्रीम कोर्ट का 'ब्लैंकेट बैन'

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कई जगहों पर किताब ढूंढने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बीच, एक वरिष्ठ अधिकारी को करोल बाग स्थित एक बुकस्टोर की याद आई। दुकान के पास बिक्री के लिए कोई कॉपी नहीं थी, लेकिन वहां एक 'सैंपल कॉपी' मौजूद थी।

Vishwas Social Welfare Society
NCERT किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मचा हड़कंप (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar26 Feb 2026 02:30 PM
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The Supreme Court's 'blanket ban' : सुप्रीम कोर्ट द्वारा NCERT की कक्षा 8 की एक किताब पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध की पृष्ठभूमि किसी राजनीतिक थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। एक अखबार की रिपोर्ट से शुरू होकर, करोल बाग की एक दुकान से किताब की 'सैंपल कॉपी' तलाशने और फिर जजों की कॉफी मीटिंग तक—यह पूरा सिलसिला सिर्फ 48 घंटों में देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा।

कैसे शुरू हुआ सिलसिला?

मामले की शुरुआत मंगलवार की सुबह हुई, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सुर्या कांत ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट में NCERT की नई किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' पर लिखा एक सेक्शन चर्चा में था। इसे देखकर CJI चौंक पड़े और उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि किताब की कॉपी उपलब्ध कराई जाए। हालांकि, चुनौती यह थी कि बाजार में उस समय किताब की कुल 32 ही कॉपियां पहुंची थीं और उसे ढूंढना लगभग असंभव था।

करोल बाग का मिशन और 'सैंपल कॉपी'

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कई जगहों पर किताब ढूंढने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बीच, एक वरिष्ठ अधिकारी को करोल बाग स्थित एक बुकस्टोर की याद आई। दुकान के पास बिक्री के लिए कोई कॉपी नहीं थी, लेकिन वहां एक 'सैंपल कॉपी' मौजूद थी। अधिकारियों ने झटपट उस कॉपी को CJI तक पहुंचाया। इसके बाद शाम तक NCERT की ओर से भी आधिकारिक कॉपी मंगवा ली गई।

कॉफी मीटिंग में तय हुआ 'सुओ मोटू' एक्शन

बुधवार की सुबह, CJI यह किताब जजों की रोजाना होने वाली कॉफी मीटिंग में लेकर पहुंचे। उन्होंने सभी जजों को विवादित अध्याय दिखाते हुए राय मांगी। सभी जजों ने एकमत से कहा कि यह न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा प्रहार है और अदालत को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इसी मीटिंग में 'सुओ मोटू' (स्वतः) कार्रवाई करने का फैसला लिया गया।

CJI की गरज- 'ज्यूडिशियरी को बदनाम करने का अधिकार किसी को नहीं'

दोपहर तक मामला अदालत में आया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी किताब की सामग्री पर गंभीर चिंता जताई। CJI ने बयान दिया,"मैं किसी को न्यायपालिका की साख पर चोट नहीं करने दूंगा, चाहे वो कितना भी ऊंचा क्यों न हो। कानून अपना काम करेगा।"

अंतिम फैसला: ब्लैंकेट बैन और 'हेड्स मस्ट रोल'

गुरुवार तक, यानी महज 48 घंटे के भीतर, सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए किताब पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया। अदालत ने सभी प्रिंट कॉपियों की जप्ती और डिजिटल वर्जन को तुरंत हटाने के आदेश दिए। CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इसे नहीं रोका गया तो लोगों का न्यायपालिका से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हेड्स मस्ट रोल" (जिम्मेदार लोगों को नहीं छोड़ा जाएगा)। सरकार की ओर से यह कहने पर कि दो जिम्मेदार लोग भविष्य में UGC या मंत्रालयों के साथ काम नहीं करेंगे, CJI ने कहा, "यह छोटी बात है। गोली चली है और न्यायपालिका घायल हुई है।" The Supreme Court's 'blanket ban'

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जब दिल्ली पुलिस के जवान बने गिरफ्तारी के शिकार, 20 जवान हिरासत में

दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट के दौरान तीन युवा कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद वे हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र में चले गए और वहीं ठहर गए।

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दिल्ली पुलिस
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar25 Feb 2026 07:13 PM
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Delhi News : हिमाचल प्रदेश में हुई इस घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। मामला उस समय शुरू हुआ जब दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट के दौरान तीन युवा कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद वे हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र में चले गए और वहीं ठहर गए। बताया जाता है कि देलही पुलिस को उनकी मौजूदगी की जानकारी मिली, जिसके बाद एक टीम उन्हें हिरासत में लेने हिमाचल पहुंची। टीम ने तीनों को पकड़ा और दिल्ली ले जाने के लिए रवाना हो गई। हालांकि, रास्ते में घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया।

दिल्ली पुलिस के 20 जवानों को हिरासत में लिया गया

जैसे ही स्थानीय प्रशासन को इस कार्रवाई की खबर मिली, सोलन पुलिस ने धर्मपुर के पास चंडीगढ़-कालका-शिमला हाईवे पर नाकाबंदी कर दी। आरोप है कि दूसरे राज्य में कार्रवाई से पहले आवश्यक औपचारिक सूचनाएं नहीं दी गई थीं। इसी आधार पर सोलन पुलिस ने दिल्ली पुलिस के 20 जवानों को रोककर हिरासत में ले लिया। कुछ समय के लिए दोनों राज्यों की पुलिस आमने-सामने आ गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

कानून के दायरे में रहकर कदम उठाना चाहिए

बाद में तीनों युवाओं को शिमला की अदालत में पेश किया गया। इस पूरी घटना ने कानूनी प्रक्रिया, अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय और राजनीतिक दखल जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया। विपक्ष ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने कानून के दायरे में रहकर कदम उठाया। इस प्रकरण ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जब एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में कार्रवाई करती है तो किन प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। यही प्रक्रिया इस पूरे विवाद का मुख्य कारण बनती दिखाई दे रही है।


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