दिल्ली हाईकोर्ट में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के खिलाफ याचिका वापस ली। सुनवाई में Gen-Z, जंतर-मंतर प्रदर्शन और जमानतदारों पर सवाल उठे।

Delhi News : दिल्ली हाईकोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़ी याचिका पर बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं की उम्र पूछी और Gen-Z को लेकर टिप्पणी की। कोर्ट की इस टिप्पणी के साथ प्रदर्शन के उद्देश्य और जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई का मुद्दा भी चर्चा में आया। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की अदालत में सुनवाई के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। यह याचिका विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के 19 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाई गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं की उम्र के बारे में पूछा। उनके वकील ने सौरव दास की उम्र 27 वर्ष और आशुतोष रांका की उम्र 31 वर्ष बताई। इस पर अदालत ने सवाल किया कि क्या वे Gen-Z हैं ? अदालत को बताया गया कि आम तौर पर 1997 के बाद जन्मे लोगों को Gen-Z पीढ़ी में गिना जाता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के बदलते स्वरूप पर भी टिप्पणी की। कोर्ट की टिप्पणी का आशय था कि शुरुआत में आंदोलन छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के रूप में सामने आया था, लेकिन अब उसके उद्देश्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अदालत ने प्रदर्शन के उद्देश्य, संगठन की भूमिका और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर भी सवाल किए। Delhi News
दोनों नेताओं ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के 19 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका में न्यायिक हिरासत बढ़ाने की प्रक्रिया और जमानतदारों को स्वीकार नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि हिरासत बढ़ाने का आदेश कानूनी रूप से उचित नहीं था और इससे उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वैकल्पिक कानूनी उपायों की ओर ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि संबंधित आदेश को अपील या पुनरीक्षण के जरिए चुनौती देने का रास्ता उपलब्ध हो सकता है। कोर्ट ने वकील को पहले विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष होने वाली कार्यवाही का परिणाम देखने और शिकायत बने रहने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी। Delhi News
CJP नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रदर्शन करने को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों नेताओं को पहले शांति बनाए रखने के लिए बांड (Bond) भरने की प्रक्रिया के तहत छोड़ा गया था। बाद में पुलिस ने आरोप लगाया कि उन्होंने बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। इसके बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) ने 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा और 19 अक्टूबर को हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया। यह पुलिस और प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों तथा संबंधित आदेशों का विवरण है। इन आरोपों पर हाईकोर्ट ने इस सुनवाई में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। Delhi News
याचिका में जमानतदारों को स्वीकार नहीं किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे। मजिस्ट्रेट के आदेश में जमानतदारों के दस्तावेजों और विवरणों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि इन आधारों पर हिरासत बढ़ाने का निर्णय उचित नहीं था। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया कि यदि आदेश को चुनौती देने के लिए अपील या पुनरीक्षण का वैधानिक रास्ता उपलब्ध है, तो पहले उस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी संदर्भ में अदालत ने याचिका वापस लेने और आगे की कार्यवाही का इंतजार करने का विकल्प सुझाया। Delhi News
याचिका वापस लिए जाने के बाद अगला कदम विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली कार्यवाही और उसके परिणाम पर निर्भर करेगा। यदि दोनों नेताओं की शिकायत बनी रहती है, तो वे कानून के तहत उपलब्ध अपील या पुनरीक्षण जैसे उपाय अपना सकते हैं। इस मामले में यह अंतर समझना जरूरी है कि हाईकोर्ट से याचिका वापस लेना, हिरासत के आदेश को सही ठहराने या चुनौती को खारिज करने के समान नहीं है। अदालत ने इस सुनवाई में विवाद के मूल कानूनी प्रश्नों पर अंतिम निर्णय नहीं दिया। CJP नेताओं से जुड़ा यह मामला प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और निवारक हिरासत की प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है। आगे की कानूनी कार्यवाही से स्पष्ट होगा कि हिरासत और जमानतदारों से संबंधित विवाद किस दिशा में बढ़ता है। Delhi News
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