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अगर आपके वाहन पर ट्रैफिक चालान पेंडिंग है और बार-बार मैसेज या नोटिस आने से परेशानी बढ़ रही है तो आज आपके लिए राहत भरा दिन हो सकता है। दिल्ली में आज राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है जहां लोग अपने पुराने ट्रैफिक चालानों का निपटारा आसानी से कर सकते हैं।

अगर आपके वाहन पर ट्रैफिक चालान पेंडिंग है और बार-बार मैसेज या नोटिस आने से परेशानी बढ़ रही है तो आज आपके लिए राहत भरा दिन हो सकता है। दिल्ली में आज राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है जहां लोग अपने पुराने ट्रैफिक चालानों का निपटारा आसानी से कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में कई मामलों में जुर्माने में राहत भी मिल सकती है और लंबे समय से अटके केस खत्म हो सकते हैं। कई लोग छोटे-छोटे चालानों के कारण कोर्ट के चक्कर लगाने से बचते रहते हैं लेकिन बाद में यही चालान बड़ी परेशानी बन जाते हैं। ऐसे में लोक अदालत लोगों को आसान और जल्दी समाधान देने का मौका देती है।
दिल्ली में यह लोक अदालत दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी यानी DSLSA की ओर से आयोजित की जा रही है। इसका मकसद ट्रैफिक नियमों से जुड़े छोटे मामलों को बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के सुलझाना है। आज सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक दिल्ली के कई प्रमुख जिला न्यायालयों में यह व्यवस्था की गई है। इनमें साकेत कोर्ट, कड़कड़डूमा कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट, द्वारका कोर्ट, रोहिणी कोर्ट, तीस हजारी कोर्ट और राउज एवेन्यू कोर्ट शामिल हैं। जिन लोगों ने पहले से स्लॉट बुक किया है, वे अपने तय समय पर वहां पहुंचकर चालान का निपटारा कर सकते हैं।
लोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां मामलों का निपटारा जल्दी हो जाता है। सामान्य अदालतों में जहां एक छोटे चालान के लिए कई बार तारीखें लग जाती हैं वहीं लोक अदालत में आपसी सहमति और आसान प्रक्रिया के जरिए मामला उसी दिन खत्म किया जा सकता है। इसके अलावा कई मामलों में जुर्माने की राशि कम हो सकती है। इससे लोगों का समय भी बचता है और मानसिक तनाव भी कम होता है।
लोक अदालत में आमतौर पर छोटे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन वाले मामलों को शामिल किया जाता है। अगर किसी ने हेलमेट नहीं पहना, सीट बेल्ट नहीं लगाई, गलत पार्किंग की, ओवरस्पीडिंग की या PUC नहीं था तो ऐसे मामलों में राहत मिलने की संभावना रहती है। इसके अलावा गलत लेन में गाड़ी चलाना, नंबर प्लेट से जुड़ी गड़बड़ी या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने जैसे चालान भी यहां निपटाए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में अदालत दोनों पक्षों की बात सुनकर फैसला करती है।
हालांकि हर चालान लोक अदालत में खत्म नहीं कराया जा सकता। अगर मामला गंभीर है तो उस पर सामान्य कानूनी प्रक्रिया ही लागू होगी। हिट एंड रन, लापरवाही से मौत, नाबालिग द्वारा वाहन चलाना, अवैध रेसिंग या किसी अपराध में इस्तेमाल वाहन जैसे मामलों में लोक अदालत राहत नहीं देती। ऐसे मामलों को अदालत में ही सुना जाता है।
अगर आप लोक अदालत में जा रहे हैं तो कुछ जरूरी चीजें अपने साथ रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहले अपॉइंटमेंट लेटर और चालान की कॉपी साथ रखें। इसके बिना प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है। इसके अलावा समय पर पहुंचना भी जरूरी है क्योंकि भीड़ ज्यादा होने पर देरी हो सकती है। अगर अदालत जुर्माना तय करती है तो उसका भुगतान वहीं करना पड़ सकता है। भुगतान पूरा होने के बाद चालान रिकॉर्ड से हट जाता है।
दिल्ली में हर बार लोक अदालत के दौरान हजारों लोग अपने पुराने चालानों का निपटारा कराते हैं। इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होता है बल्कि लोगों को भी जल्दी राहत मिल जाती है। कई लोग महीनों या सालों से पेंडिंग चालानों को लेकर परेशान रहते हैं। ऐसे में लोक अदालत उन्हें बिना ज्यादा भागदौड़ के मामला खत्म करने का मौका देती है। यही वजह है कि हर बार बड़ी संख्या में लोग इसका फायदा उठाने पहुंचते हैं।
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