फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटें जीतकर करीब 27 साल बाद बहुमत की सरकार बनाई थी। अब पार्टी चाहती है कि विधानसभा की यह जीत एमसीडी की सियासत में भी दोहराई जाए, ताकि यह संदेश जाए कि दिल्ली की जनता ने उसे हर स्तर पर मौका दिया है।

Delhi MCD By-Election : दिल्ली की सत्ता संभालने के कुछ ही महीनों बाद रेखा सरकार अब अपनी पहली बड़ी ‘अग्निपरीक्षा’ का सामना कर रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नगर निगम के 12 वार्डों पर होने वाला एमसीडी उपचुनाव न सिर्फ बीजेपी की चुनावी रणनीति, बल्कि आम आदमी पार्टी की पकड़ और विपक्ष की जमीनी ताकत का भी अहम टेस्ट माना जा रहा है। दिल्ली नगर निगम के इन 12 वार्डों में 30 नवंबर को मतदान हो चुका है। अब 3 दिसंबर को ईवीएम के नतीजे यह तय करेंगे कि दिल्ली की गलियों और मोहल्लों की सियासत में किस पार्टी की पकड़ ज्यादा मजबूत है। फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटें जीतकर करीब 27 साल बाद बहुमत की सरकार बनाई थी। अब पार्टी चाहती है कि विधानसभा की यह जीत एमसीडी की सियासत में भी दोहराई जाए, ताकि यह संदेश जाए कि दिल्ली की जनता ने उसे हर स्तर पर मौका दिया है।
दिल्ली एमसीडी के जिन 12 वार्डों पर उपचुनाव हो रहा है, उनमें से 9 सीटें पहले बीजेपी के पास थीं, जबकि 3 वार्डों पर आम आदमी पार्टी का कब्ज़ा था। इनमें शालीमार बाग–बी जैसे वार्ड बीजेपी के लिए खास प्रतिष्ठा का सवाल बने हुए हैं। राजधानी दिल्ली की सियासत में यह इलाका इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता विधानसभा चुनाव जीतने से पहले पार्षद रह चुकी हैं। ज़ाहिर है, दिल्ली बीजेपी के लिए यह सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि रेखा सरकार की साख से जुड़ा मुकाबला भी है। इसी तरह, द्वारका–बी वार्ड भी दिल्ली की सियासत में अहम कड़ी है। यह सीट बीजेपी नेता कमलजीत सहरावत के पश्चिमी दिल्ली से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई थी। बीजेपी चाहती है कि दिल्ली के इस शहरी और शिक्षित वोटर वाले इलाक़े में फिर वही भरोसा दुबारा दिखे।
इन 12 वार्डों के लिए कुल 51 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से 26 महिलाएँ हैं।
दिल्ली एमसीडी की वर्तमान संरचना पर नज़र डालें तो 250 सदस्यीय सदन में इस समय
दिल्ली में 2022 के एमसीडी चुनाव में तस्वीर बिल्कुल अलग थी। तब आम आदमी पार्टी ने 134 सीटें जीतकर निगम में पूर्ण बहुमत हासिल किया था। बीजेपी 104 सीटों तक सिमट गई थी, कांग्रेस को 9 और 3 सीटें निर्दलीयों को मिली थीं। हालाँकि, दिल्ली एमसीडी पर दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं है। यही वजह है कि पिछले दो वर्षों में लगातार दलबदल और पाला बदलने के कारण सदन की संरचना बदलती रही है। अब इन 12 सीटों के नतीजे यह संकेत देंगे कि दिल्ली की नगर राजनीति में सत्ता का पलड़ा किस दिशा में झुक रहा है।
दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह का दावा है कि इस बार एमसीडी उपचुनाव में सभी 12 सीटें बीजेपी ही जीतेगी। उनका कहना है कि राजधानी दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी से नाराज है और इसे ज़मीन पर महसूस किया जा सकता है। उन्होंने पूर्वांचल के मतदाताओं का हवाला देते हुए कहा कि बिहार चुनाव में पूर्वांचली समाज ने भारी संख्या में बीजेपी को वोट दिया था, और दिल्ली में बसे यही वोटर एमसीडी उपचुनाव में भी बीजेपी के साथ खड़े रहेंगे। दिल्ली बीजेपी संगठन ने सभी 12 वार्डों में बूथ स्तर तक व्यापक प्रचार अभियान चलाया है।
दूसरी ओर, दिल्ली की राजनीति में अपने ‘वर्क मॉडल’ का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी ने भी इस चुनौती को हल्के में नहीं लिया। आप के अभियान की कमान दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और पूर्व मंत्री गोपाल राय जैसे नेताओं ने संभाली। ये नेता दिल्ली के अलग–अलग इलाक़ों में पदयात्रा, नुक्कड़ सभा और जनसंपर्क अभियान चलाते रहे। दिल्ली की सियासत की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस बार आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुद प्रचार में हिस्सा नहीं लिया। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएँ हैं – कुछ इसे ‘लो–प्रोफाइल’ रणनीति बताते हैं तो कुछ इसे पार्टी की मजबूरी या बदले हुए राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। Delhi MCD By-Election