अधिकारियों के मुताबिक, इस लोकेशन पर पहले लगभग 30 आक्रामक कुत्तों की क्षमता वाला एक छोटा केंद्र बनाया गया था। अब NDMC ने प्रक्रिया शुरू कर दी है कि एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाए, जो बड़े स्तर पर शेल्टर को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ तैयार करे।

Delhi News : दिल्ली के मोतीबाग इलाके में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर नई पहल सामने आई है। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) ने पुराने पशु अस्पताल परिसर के एक हिस्से को अपग्रेड कर फुल-स्केल डॉग शेल्टर विकसित करने का फैसला किया है। योजना के तहत अस्पताल की इमारत के पिछले हिस्से का नवीनीकरण करके ऐसी जगह तैयार की जाएगी, जहां एक साथ 500 से अधिक कुत्तों के रहने की व्यवस्था हो सके। अधिकारियों के मुताबिक, इस लोकेशन पर पहले लगभग 30 आक्रामक कुत्तों की क्षमता वाला एक छोटा केंद्र बनाया गया था। अब NDMC ने प्रक्रिया शुरू कर दी है कि एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाए, जो बड़े स्तर पर शेल्टर को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ तैयार करे।
NDMC के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में पुराने परिसर को नई पहचान देने की तैयारी है। इमारत के बाहरी हिस्से का विकास, अंदरूनी मरम्मत और आंगन का सौंदर्यीकरण एक साथ किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अनुमानित खर्च करीब 50 लाख रुपये बताया जा रहा है और लक्ष्य है कि तीन महीने के भीतर यह काम पूरा कर लिया जाए। सबसे अहम बात यह कि शेल्टर की पूरी रूपरेखा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की जा रही है। योजना के तहत शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालय परिसरों और अन्य स्थानों से लाए गए गैर-आक्रामक आवारा कुत्तों के लिए खुला लेकिन पूरी तरह घेराबंदी वाला सुरक्षित स्पेस बनाया जाएगा। वहीं, करीब 300 पागल/आक्रामक कुत्तों को अलग रखने के लिए केनेल (पिंजरे/बाड़े) की व्यवस्था होगी। शेल्टर में डेडिकेटेड फीडिंग एरिया तय रहेगा और इलाज-उपचार को मजबूत करने के लिए ऑपरेशन थिएटर भी बनाया जाएगा ताकि देखभाल सिर्फ ठहराने तक सीमित न रहे, बल्कि प्रबंधन और उपचार दोनों स्तर पर हो सके।
इसी नीति के तहत NDMC ने अपने 14 सर्किलों में कुल 100 फीडिंग पॉइंट चिन्हित किए हैं। इनमें प्रमुख बाजार, पार्क, धार्मिक स्थल और आवासीय कॉलोनियां भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन स्थानों को RWA, मार्केट एसोसिएशन और स्थानीय निवासियों से चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया गया है। आवारा कुत्तों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए NDMC ने संस्थानों, अस्पतालों और कार्यालय परिसरों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की भी बात कही है, ताकि शिकायतों का एक तय चैनल बन सके और जवाबदेही स्पष्ट रहे।
दूसरी तरफ, द्वारका सेक्टर-23 में आक्रामक कुत्तों के लिए बड़े शेल्टर की MCD योजना अभी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। अधिकारियों के मुताबिक 1,500 कुत्तों की क्षमता वाले शेल्टर के लिए करीब 3.8 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसे अब तक कमिश्नर की मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी के बाद ही प्रस्ताव को सदन के सामने रखा जा सकेगा।
MCD ने आवारा कुत्तों के रिकॉर्ड और नियंत्रण को व्यवस्थित करने के लिए बजट में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान तो कर दिया है, लेकिन माइक्रोचिपिंग और बड़े पैमाने पर नसबंदी की यह योजना अभी भी अंतिम मंजूरी की चौखट पर अटकी हुई है। प्रस्ताव के मुताबिक हर कुत्ते की गर्दन के पीछे चावल के दाने जितनी छोटी माइक्रोचिप लगाई जाएगी, ताकि उसकी पहचान और ट्रैकिंग एक क्लिक पर संभव हो सके। इस माइक्रोचिप में कुत्ते की अनुमानित उम्र, रंग, रहने का इलाका/वार्ड, टीकाकरण का समय और देखरेख की जिम्मेदारी संभालने वाली NGO का नाम जैसी जरूरी जानकारियां दर्ज होंगी। पूरा डेटा एक डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिसे MCD के अधिकारी एक्सेस कर सकेंगे। Delhi News