
DMRC तीन प्रमुख स्तंभों पर खड़ा अपना राजस्व तंत्र चलाता है
ट्रैफिक ऑपरेशन - यही इसका सबसे बड़ा स्रोत है। टिकट बिक्री, स्मार्ट कार्ड, पास, पार्किंग शुल्क, पेनाल्टी और जुर्माने से मोटी कमाई होती है।
रियल एस्टेट और विज्ञापन - स्टेशन परिसरों में किराए पर दी जाने वाली दुकानें, रेस्टोरेंट, कियोस्क और बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड से भी अच्छा-खासा राजस्व आता है।
कंसल्टेंसी और प्रोजेक्ट्स - दिल्ली मेट्रो ने अपनी विशेषज्ञता को देश ही नहीं, विदेशों में भी बेचा है। मुंबई, नागपुर, कोच्चि, पटना, लखनऊ, जयपुर से लेकर ढाका और अबू धाबी तक कई प्रोजेक्ट्स में DMRC तकनीकी सलाहकार और प्रोजेक्ट पार्टनर रहा है।
इसके अलावा डीएमआरसी ने ग्रीन एनर्जी और कार्बन क्रेडिट्स पर भी दांव लगाया है। सोलर पावर प्लांट से बिजली बनाकर बेचने तक का काम अब इसके राजस्व मॉडल का हिस्सा है।
2002: शुरुआत के साल में ही पहली बढ़ोतरी।
2005 और 2009: दो बार संशोधन।
2017: आठ साल बाद बड़ा बदलाव।
2025: मौजूदा बढ़ोतरी, न्यूनतम किराया 11 रुपये।
वित्तीय वर्ष 2022-23 में DMRC ने 6,645 करोड़ रुपये कमाए, जबकि खर्च 5,833 करोड़ रुपये रहा। 2024 तक यह आय बढ़कर 7,661 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यानी यात्रियों के किराए से लेकर विदेशी प्रोजेक्ट्स तक, मेट्रो ने अपने लिए लगातार नए रास्ते तलाशे हैं। Delhi Metro