दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अगले महीने खुलेगा, देने होंगे इतने टोल टैक्स

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब लगभग पूरी तरह तैयार है। केवल कुछ क्षेत्रों में सर्विस रोड और अंतिम निर्माण कार्य बाकी हैं, जिन्हें अगले 12-15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है। अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग को लगभग एक महीने के भीतर आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Mar 2026 04:59 PM
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Delhi-Dehradun Expressway : दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब लगभग पूरी तरह तैयार है। केवल कुछ क्षेत्रों में सर्विस रोड और अंतिम निर्माण कार्य बाकी हैं, जिन्हें अगले 12-15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है। अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग को लगभग एक महीने के भीतर आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे की लंबाई: 210-213 किलोमीटर तथा अनुमानित निर्माण लागत: 12,000 करोड़ रुपये और इससे दिल्ली से देहरादून का यात्रा में लगने वाला समय 5-6 घंटे से घटकर 2.5-3 घंटे हो जाएगा।

टोल व्यवस्था और शुल्क

इस एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली के लिए प्रमुख टोल प्लाजा बनाए गए हैं: 1. कांठा गांव, बागपत 2. रसूलपुर खेड़ी अहमद गांव, सहारनपुर। इस एक्सप्रेसवे की पूरी दूरी के लिए टोल: लगभग 675 रुपये लगेगा। तथा राउंड ट्रिप (आने-जाने के लिए): लगभग 1010 रुपये देना होगा।

वाहन के अनुसार टोल शुल्क

वाहन प्रकार              अनुमानित टोल 

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हल्के वाणिज्यिक वाहन (पिकअप, मिनी बस) 1000-1100    

बस और दो एक्सल वाले ट्रक        2000-2300     

तीन एक्सल या बड़े वाणिज्यिक ट्रक    2300-2500     

दो-पहिया वाहन               कोई टोल नहीं

टोल वसूली फास्टैग प्रणाली के माध्यम से की जाएगी, ताकि टोल बूथ पर ट्रैफिक जाम न हो।

इंटरचेंज और एक्सेस प्वाइंट

एक्सप्रेसवे पर कई इंटरचेंज बनाए गए हैं, ताकि आसानी से प्रवेश और निकास किया जा सके। प्रमुख शहर और स्थान होंगे बड़ौत, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली। दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और देहरादून के बीच यात्रियों के लिए सुविधाजनक एंट्री और एग्जिट पॉइंट। एनएचएआई ने चेतावनी दी है कि कुछ लोग बेरिकेडिंग हटाकर एक्सप्रेसवे का प्रयोग कर रहे हैं, जो खतरनाक है। अभी एक्सप्रेसवे पूरी तरह से खुला नहीं है, इसलिए अधिकारिक उद्घाटन से पहले इसका प्रयोग न करें। इस मार्ग के खुलने से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा आसान और तेज होगी। पर्यटन बढ़ेगा और व्यवसायिक गतिविधियां तेज होंगी।



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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज

विपक्ष ने प्रस्ताव के समर्थन में स्पीकर पर विपक्षी नेताओं के साथ पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा, "मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि चेयर सदन की आज़ादी को नहीं, बल्कि रूलिंग पार्टी के अत्याचार का प्रतीक बन गई है।"

Lok Sabha Speaker Om Birla
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Mar 2026 08:24 PM
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Lok Sabha Speaker Om Birla : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को बुधवार को सदन ने ध्वनिमत (वॉइस वोट) से खारिज कर दिया। दो दिनों तक चली गरमागरम बहस के बाद यह प्रस्ताव अस्वीकृत होने के साथ ही ओम बिरला पद पर बने रहेंगे।

प्रस्ताव का सफाया, सरकार का जोर

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कई विपक्षी सांसदों के समर्थन से यह प्रस्ताव पेश किया था। बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर का जमकर बचाव किया और विपक्ष पर हमला बोला। अमित शाह ने कहा कि संसद का कामकाज आपसी भरोसे और नियमों के पालन पर आधारित है।

अमित शाह का बयान- 'सदन मार्केटप्लेस नहीं है'

बहस में हिस्सा लेते हुए अमित शाह ने कहा, "स्पीकर एक न्यूट्रल कस्टोडियन के तौर पर काम करते हैं, जो सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह सदन कोई मार्केटप्लेस नहीं है; सदस्यों से उम्मीद की जाती है कि वे इसके नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार बोलें और हिस्सा लें।" उन्होंने स्पीकर की भूमिका को सदन का निष्पक्ष अभिभावक बताया।

विपक्ष के आरोप- 'चेयर पक्षपाती है'

विपक्ष ने प्रस्ताव के समर्थन में स्पीकर पर विपक्षी नेताओं के साथ पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा, "मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि चेयर सदन की आज़ादी को नहीं, बल्कि रूलिंग पार्टी के अत्याचार का प्रतीक बन गई है।" उन्होंने आगे कहा, "इस सदन ने वह काला दिन भी देखा जब एक दिन में 140 से ज्यादा सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। असली लोकतंत्र वह है जिसमें कमजोर व्यक्ति को भी लगे कि उसकी आवाज सुनी जा सकती है।"

'टेबल फैन' वाला उदाहरण और विपक्ष का दर्द

जेएमएम सांसद विजय कुमार हंसदक ने शिकायत की कि जब भी विपक्ष के सांसद बोलते हैं, तो उन्हें रोका जाता है और कैमरा दूसरी दिशा में कर दिया जाता है। एनसीपी (एसपी) के सांसद बजरंग मनोहर सोनवाने ने एक चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए कहा, "जैसे एक टेबल फैन सिर्फ एक तरफ कूलिंग देता है, वैसे ही जब बिरला जी दाईं ओर देखते हैं, तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है और जब वे दूसरी तरफ (विपक्ष) देखते हैं, तो 'नहीं, नहीं, नहीं'।" Lok Sabha Speaker Om Birla

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लोकसभा में अमित शाह का विरोधियों पर तंज, मर्यादा का ख्याल नहीं, देश की बदनामी

अमित शाह ने कहा, "लोकसभा स्पीकर के सामने जो अविश्वास प्रस्ताव आया है, इस पर मेरे विचार व्यक्त करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। यह घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है।

Amit Shah In Lok Sabha
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Mar 2026 07:17 PM
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Amit Shah In Lok Sabha: लोकसभा में विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ऐतिहासिक और तीखा रुख अख्तियार किया है। शाह ने सदन में अपने भाषण के दौरान विपक्ष पर जमकर हमला बोला और कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव लाना न केवल सदन की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला कदम है, बल्कि यह पूरे देश की बदनामी है।

'यह कोई सामान्य घटना नहीं'

सदन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, "लोकसभा स्पीकर के सामने जो अविश्वास प्रस्ताव आया है, इस पर मेरे विचार व्यक्त करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। यह घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है। संसदीय राजनीति और इस सदन दोनों के लिए यह एक अफसोसजनक घटना है।"

स्पीकर के पद की गरिमा बताई

केंद्रीय मंत्री ने स्पीकर के पद की गरिमा पर जोर देते हुए कहा, "स्पीकर किसी दल के नहीं होते, वे सदन के होते हैं। एक प्रकार से सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के वे संरक्षक भी होते हैं। सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए स्पीकर अभिरक्षक होते हैं। उन्हें लोकसभा कैसे चलानी है, इसके लिए इसी लोकसभा ने कुछ नियम बनाए हैं और सदन के अंदर नियमों के अनुसार ही बोलना होता है।"

'नियम के खिलाफ बोलने का किसी को अधिकार नहीं'

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संसद चलाने के जो नियम हैं, वे सभी के लिए बराबर लागू होते हैं। उन्होंने कहा, "सदन के नियम जिसकी अनुमति नहीं देते, उस हिसाब से किसी को बोलने का अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो। जब आप नियमों को नजरअंदाज करेंगे तो स्पीकर का पवित्र दायित्व है कि वह उसे रोके, टोके और निकाल कर बाहर करें। यह नियम हमने नहीं बनाए, यह नेहरू जी के समय से चले आ रहे हैं।"

NDA बनाम विपक्ष: ऐतिहासिक संदर्भ दिया

अपने भाषण में अमित शाह ने विपक्ष के इस कदम को पूर्ववर्ती संसदीय परंपराओं के विपरीत बताया। उन्होंने कहा, "हम भी विपक्ष में रहे हैं। तीन बार लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन भाजपा और NDA ने कभी विपक्ष में रहते हुए स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया।"

उन्होंने आगे कहा, "जब आप अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल करते हैं, तो आप एक अजीब प्रकार की स्थिति का निर्माण कर देते हैं। जिसको मध्यस्थता करनी है, जिसका संरक्षण लोकसभा के कार्यकाल की समाप्ति तक आपको मांगना है, उसकी निष्ठा पर ही आप सवाल कर देते हैं? यह हमारी उच्च परंपराओं के निर्वहन में बहुत अफसोसजनक घटना है।" Amit Shah In Lok Sabha

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