इसका असर सिर्फ बुजुर्गों और बच्चों पर ही नहीं, बल्कि स्वस्थ वयस्कों के फेफड़ों पर भी गंभीर रूप से पड़ता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात जन-स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं। अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी की हवा हर सांस के लिए खतरा बन सकती है।

दिल्ली-एनसीआर की हवा फिर से खतरनाक हो गई है। राजधानी की गलियों और सड़कों पर हर सांस अब बोझ बन गई है और लोग अपनी खिड़कियों के पीछे ही सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ते हुए ‘सीवियर’ श्रेणी में पहुंच चुका है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 450 के पार जा चुका है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण को तुरंत लागू करने का ऐलान किया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो यह स्वास्थ्य संकट हर घर तक पहुंच सकता है।
GRAP-3 तब लागू होता है जब दिल्ली-एनसीआर का औसत AQI 400 के पार पहुंच जाता है। इस स्तर पर हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषण कण (PM2.5 और PM10) सांस लेने के लिए अत्यंत खतरनाक हो जाते हैं। इसका असर सिर्फ बुजुर्गों और बच्चों पर ही नहीं, बल्कि स्वस्थ वयस्कों के फेफड़ों पर भी गंभीर रूप से पड़ता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात जन-स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं। अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी की हवा हर सांस के लिए खतरा बन सकती है।
दिल्ली सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए निम्नलिखित सख्त कदम उठाए हैं
सभी गैर-जरूरी निर्माण कार्यों पर रोक: ध्वस्तीकरण, सड़क खुदाई और भवन निर्माण जैसे कार्य तत्काल प्रभाव से बंद।
पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध: दिल्ली-एनसीआर में पुराने डीजल वाहनों की आवाजाही पूरी तरह वर्जित।
निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों पर रोक: सीमेंट, रेत, बजरी और अन्य निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों की एंट्री पर प्रतिबंध।
डीजल जेनरेटर पर पाबंदी: सिर्फ अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को ही छूट, बाकी सभी स्थानों पर डीजल जेनरेटर बंद।
खनन और स्टोन क्रशर गतिविधियों पर रोक: प्रदूषण फैलाने वाले खनन कार्य और पत्थर तोड़ने की इकाइयां अस्थायी रूप से बंद रहेंगी।
CPCB और DPCC की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के कई हिस्सों में प्रदूषण की स्थिति गंभीरतम स्तर पर पहुंच चुकी है —
बवाना: AQI 465
मुंडका: AQI 464
वजीरपुर: AQI 462
पंजाबी बाग: AQI 460
नेहरू नगर: AQI 456
ITO: AQI 452
वहीं, कुछ इलाकों जैसे लोधी रोड (AQI 293) और NSIT द्वारका (AQI 240) में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, लेकिन ये भी ‘मध्यम से खराब’ श्रेणी में गिने जा रहे हैं।