बड़ी खबर : दिल्ली में जुटेंगे दुनियां भर के खतरनाक जासूस
Delhi News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:24 AM
Delhi News : भारत की राजधानी दिल्ली से बड़ी खबर आ रही है दिल्ली की बड़ी खबर यह है कि जल्दी ही दुनियां भर के खतरनाक जासूस (DANJEROUS DITECTIVE OF THE WORLD) दिल्ली में जुटने वाले हैं। दुनिया भर के 20 देशों के एक से बढ़कर एक जासूस दिल्ली में जुटेंगे। इस दौरान दुनियां भर के खतरनाक जासूस (DANJEROUS DITECTIVE OF THE WORLD) भारत के चर्चित जासूस अजीत डोभाल से भी मुलाकात करेंगे। लंबे अरसे तक जासूस बनकर देश की सेवा करने वाले अजीत डोभाल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं।
भारत की राजधानी दिल्ली में एक साथ नजर आएंगे दुनिया भर के जासूस
आपको बता दें कि भारत की राजधानी दिल्ली में 16 मार्च को एक बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। भारत के दिल्ली शहर में होने वाली इस बैठक में दुनियाभर के 29 प्रमुख देशों की खुफिया (जासूसी) इंजेनियों के इंचार्ज भाग लेंगे। अलग-अलग देश की खुफिया एजेंसियों के इंचार्ज खुद बड़े से बड़े जासूस रह चुके हैं। भारत की राजधानी दिल्ली में होने वाली दुनियां के खतरनाक जासूसों (DANJEROUS DITECTIVE OF THE WORLD) की बैठक में विश्व स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में विचार विमर्श किया जाएगा। जासूसों की बैठक में दुनियां भर में तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम पर विशेष तौर पर चर्चा की जाएगी।
पूरी दुनियां से 20 देशों के जासूसी प्रमुख आएंगे भारत में
भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से बड़ी जानकारी मिली है (पीएमओ) से मिली जानकारी के मुताबिक अमेरिकी खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड, शीर्ष कनाडाई खुफिया अधिकारी डैनियल रॉजर्स और ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई-6 के प्रमुख रिचर्ड मूर समेत करीब 20 देशों के शीर्ष खुफिया अधिकारी इस सप्ताह के अंत में नई दिल्ली में जुटेंगे। वे भारत की मेजबानी में होने वाले सुरक्षा सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ वैश्विक सुरक्षा पर मंथन करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड, शीर्ष कनाडाई खुफिया अधिकारी डैनियल रॉजर्स और ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई-6 के प्रमुख रिचर्ड मूर समेत करीब 20 देशों के शीर्ष खुफिया अधिकारी इस सप्ताह के अंत में नई दिल्ली में जुटेंगे। वे भारत की मेजबानी में होने वाले सुरक्षा सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ वैश्विक सुरक्षा पर मंथन करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, 16 मार्च को होने वाली बैठक की अध्यक्षता डोभाल करेंगे। इसमें आतंकवाद और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने के तौर-तरीकों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन में आॅस्ट्रेलिया, जर्मनी, न्यूजीलैंड और भारत के कई अन्य मित्र देशों के खुफिया प्रमुख शामिल होंगें। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा और खुफिया प्रमुख आतंकवाद के वित्तपोषण के साथ-साथ साइबर अपराधों से निपटने के तौर-तरीकों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभावों सहित अन्य वैश्विक चुनौतियों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
एक से बढ़कर एक जासूस मौजूद हैं दुनियां की टॉप 10 जासूसी एजेंसियों में
भारत में एक खतरनाक जासूसों की बैठक होगी। ऐसे में हर कोई जानना चाहेगा कि दुनिया भर में नंबर वन खुफिया एजेंसी कौन सी है। दरअसल दुनियांं का हर देश अपनी जासूसी एजेंसी को दुनिया की नंबर वन जासूसी एजेंसी बताता है। ऐसे में यह निर्णय करना बहुत ही मुश्किल है कि दुनियां की नंबर वन जासूसी एजेंसी कौन सी है। कुछ लोग इजरायल की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी मोसाद को दुनियां की नंबर वन जासूसी एजेंसी मानते हैं। कुछ लोगों का दावा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई दुनिया की नंबर वन जासूसी संस्था है। दुनियां के सर्वश्रेष्ठ जासूस किस देश के पास हैं? दुनिया की नंबर वन खुफिया एजेंसी कौन सी है ? इन सवालों का जवाब देने के लिए हम आपका परिचय दुनियां की टॉप 10 खुफिया एजेंसियों से कर रहे हैं। इन सभी 10 खुफिया एजेंसी में एक से बढ़कर एक खतरनाक जासूस मौजूद हैं।
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद से थर-थर कांपते हैं दुश्मन
दुनिया की टॉप 10 खुफिया एजेंसी में सबसे पहले नाम इजरायल की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी मोसाद का नाम आता है। इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को सभी खुफिया एजेंसियों का गॉडफादर कहा जाता है। यह एजेंसी दुनियां के कुछ सबसे साहसी अंडरवर्ल्ड आॅपरेशनों में शामिल रही है। मोसाद की प्रमुख जिम्मेदारी खुफिया तरीके से देश की रक्षा करना और आतंकवाद के खिलाफ कार्य करना है जिसमें यहूदियों को उन राष्ट्रों से इसराइल लाना भी शामिल है, जहां आधिकारिक यहूदी एजेंसी अलियाह को प्रतिबंधित किया गया है। मोसाद यहूदी समुदायों की रक्षा करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है, जिसके कारण उसे अमान (एक सैन्य खुफिया संस्था) और शिन बेट (एक आंतरिक सुरक्षा एजेंसी) की तरह इजरायल की खुफिया तंत्र का एक प्रमुख हिस्सा माना जाता है। क्या आप जानते हैं कि 1972 के म्यूनिख ओलंपिक के दौरान ब्लैक सितंबर नामक एक आतंकवादी समूह ने इजरायल के 11 एथलीटों की हत्या कर दी थी। मोसाद ने इस हत्या का बदला लेने के लिए अपने एजेंटों और जासूसों की नियुक्ति की और सभी संदिग्ध षड्यंत्रकारियों को मार डाला।
एमएसएस, है चीन की खुफिया एजेंसी
दुनियां के दूसरे सबसे शक्तिशाली देश के रूप में चीन का नाम आता है बात चीन की खुफिया एजेंसी की करें तो एमएसएस चीन का मुख्य खुफिया संगठन है। यह आंतरिक और बाह्य दोनों तरह मामलों पर ध्यान देती है। इसके अलावा चीन को विश्व में हो रही गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान करती है ताकि कम्युनिस्ट पार्टी की लोकप्रियता को बनाया रखा जा सके। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की ताकत और लोकप्रियता काफी हद तक इसी एजेंसी पर निर्भर करती है। चीनी गुप्त एजेंसी ने ताइवान, मकाऊ और हांगकांग जैसे बड़े चीनी क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।
आस्ट्रेलिया की खुफिया एजेंसी का नाम है एएसआईएस
एएसआईएस को दुनियां भर में सबसे बडेÞ गुप्त खुफिया संगठन के रूप में भी जाना जाता है, देश से बाहर खुफिया जानकारी के साथ-साथ काउंटर-इंटेलीजेंस और विदेशी इंटेलिजेंस संस्थाओं के साथ संपर्क स्थापित करना इसके प्रमुख कार्य हैं। यह संस्था मुख्य रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय है। इसके एजेंट पूरे विश्व में फैले हुए हैं और बहुमूल्य जानकारी एकत्र करते हैं। यह एजेंसी ऐसी गोपनीयता के साथ काम करती है कि कई सालों तक आॅस्ट्रेलियाई सरकार में शामिल कई लोग भी इनकी गतिविधियों से अनजान रहे थे। पहली बार इस एजेंसी का जिक्र 1975 में आॅस्ट्रेलियाई संसद में हुआ था और सार्वजनिक रूप से 1977 में इसके बारे में खुलासा हुआ था।
डीजीएसई है फ्रांस की खुफिया एजेंसी
बात फ्रांस की करें तो फ्रांस की खुफिया एजेंसी का नाम डीजीएसआई (बाहरी सुरक्षा के लिए मुख्य निदेशालय) अधिकांश एजेंसियों की तरह फ्रांस की खुफिया एजेंसी डीजीएसआई भी बाहरी खतरों और मामलों से संबंधित है। यद्यपि, यह अन्य समकक्ष एजेंसियों की तुलना में ज्यादा पुरानी नहीं है परन्तु इसको विश्व की सर्वश्रेष्ठ खुफिया एजेंसियों में से एक माना जाता है। यह फ्रांस को विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों और विशेषकर आईएसआईएस पर नजर रखने में मदद करता है। डीजीएसई की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका के सीआईए और यूनाइटेड किंगडम के एम 16 से की जाती है, जबकि फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय के निदेर्शों के तहत यह संगठन काम करता है, साथ ही यह आंतरिक सुरक्षा एजेंसी (डीजीएसआई) और राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय के साथ मिलकर भी काम करता है। फ्रांस विशेष रूप से अल्जीरिया और अरब आतंकवादी समूहों को लक्षित करता रहा है और इस एजेंसी ने अकेले ही ऐसे आतंकवादी संगठनों द्वारा उत्पन्न खतरों को समाप्त किया हैं। Delhi News
भारत की सर्वश्रेष्ठ खुफिया एजेंसी है रॉ
भारता की खुफिया एजेंसी की बात करें तो भारत की सर्वश्रेष्ठ खुफिया एजेंसी का नाम रॉ (अनुसंधान तथा विशलेषण् विंग है ) भारत में आईबी, आंतरिक मामले और रॉ, विदेशी खुफिया मामलों को देखता है। यह राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और वैज्ञानिक विकास पर निगरानी रखता है, जिसमें विदेशी जनता की राय और उसका प्रभाव भी शामिल हैं। रॉ आतंकवाद विरोधी और कुछ अन्य कवर आॅपरेशन के खिलाफ कार्रवाई करने में बड़े पैमाने पर भूमिका निभाता है। रॉ एजेंसी ने 1971 में बांग्लादेश के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रॉ ने पाकिस्तान की मुख्य परमाणु शस्त्र प्रयोगशाला, कहुटा के बारे में पता लगाया था और पाकिस्तान सरकार और उनकी सेना के बीच के कॉल को भी ट्रैक किया था, जिसकी वजह से अंतत: भारत को जीत हासिल हुई थी। इसके अलावा रॉ ने पूर्ण गोपनीयता के साथ पोखरण परमाणु परीक्षण में भी सरकार की मदद की थी। भारत के राष्टÑीय सुरक्षा सलाकार अजीत डोभाल लम्बे समय तक रॉ का हिस्सा रहे हैं। Delhi News
बीएनडी है जर्मनी की खुफिया एजेंसी
बीएनडी, फेडरल इंटेलिजेंस सर्विस जर्मनी की विदेशी खुफिया एजेंसी है जो सीधे जर्मनी के चांसलर कार्यालय के अधीनस्थ काम करती है। प्रौद्योगिकी के संदर्भ में, यह एजेंसी किसी अन्य एजेंसी से पीछे नहीं है। इसकी निगरानी प्रणाली को विश्व स्तरीय माना जाता है।
यह एजेंसी विदेशी गैर-राज्य आतंकवाद और सामूहिक विनाश के हथियारों जैसे विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित सूचनाएं प्रदान करती है। बीएनडी योजनाबद्ध अपराध, प्रौद्योगिकी के अवैध हस्तांतरण, हथियारों और नशीली दवाओं की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध प्रवासन की जानकारी का भी मूल्यांकन करती है। Delhi News
रूस की खुफिया एजेंसी का नाम है एफएसबी
यह खुफिया एजेंसी एफएसबी रूसी संघ का फैडरल सुरक्षा संगठन है। यह खुफिया एजेंसी यूएसएसआर राज्य की सुरक्षा समिति (केजीबी) का प्रमुख उत्तराधिकारी समूह है। एफएसडी आतंकवाद से निगरानी तथा देश की आंतरिक और बाहरी सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारियां निभाता है। यह गंभीर अपराधों और संघीय कानून के उल्लंघन की जांच भी करता है। यह देश के बाहर और देश के अंदर आतंकवाद विरोधी कई गतिविधियों की समाप्ति में उल्लेखनीय भूमिका निभा चुका है। Delhi News
एमआई 6 है ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी
एमआई 6 दुनिया में सबसे पुरानी खुफिया एजेंसियों में से एक है। यह एजेंसी प्रथम विश्व युद्ध के पहले से ही संचालन में रही है। इस एजेंसी को विश्व युद्ध में ब्रिटेन की जीत का कारण माना जाता है। इस एजेंसी ने न केवल हिटलर को ब्रिटेन से बाहर रखने में, बल्कि हिटलर को हराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। ब्रिटिश इंटेलिजेंस, इंटेलिजेंस सर्विसेज एक्ट 1994 से बंधी हुई है। यहां तक कि 1994 तक एमआई 6 की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया था।
अमेरिका की खुफिया एजेंसी का नाम है सीआईए
इस एजेंसी ने संयुक्त राज्य अमेरिका और मध्य पूर्व में आतंकवाद के खिलाफ उल्लेखनीय काम किया है। इसलिए अकसर इसको विश्व में अमेरिका के वर्चस्व के पीछे के कारण के रूप में माना जाता है। सीआईए की अन्य गुप्त एजेंसियों के साथ कोई तुलना नहीं है, क्योंकि इसके साहसी कार्यों और दुनियां भर में शीर्ष गुप्त संस्थाओं के साथ प्रभावशाली समन्वय हैं। एक महाशक्ति के रूप में अमेरिका की स्थिति बनाए रखने में यह एजेंसी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आॅपरेशन PBSUCCESS, जिसमें अमेरिका द्वारा समर्थित विद्रोहियों ने ग्वाटेमाला में लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए राष्ट्रपति को पद से हटाना और ओसामा बिन लादेन की हत्या, इस संस्था की प्रमुख सफलताएं हैं। Delhi News
पाकिस्ताीन की खुफिया एजेंसी है आईएसआई
बात भारत के पडोसी देश पाकिस्ताफन की करें तो पाकिस्तासन की खुफिया एजेंसी आईएसआई का गठन 1948 में एक आॅस्ट्रेलिया में जन्मे ब्रिटिश आर्मी आॅफिसर ने किया था, जिन्होंने 1950 से 1959 तक पाकिस्तानी सेना में सेवाएं दी थी। यह पाकिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण इंटेलिजेंस एजेंसी है। यह संगठन इतना ताकतवर है कि वह सेना के साथ-साथ देश को व्यावहारिक रूप से भी चलाता है। इसे अक्सर दुनियां में शीर्ष इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच श्रेणीबद्ध किया जाता है। कई वर्षों से, आईएसआई ने पाकिस्तान सरकार की रीढ़ के रूप में काम किया है। अफगानिस्तान में यूएसएसआर की हार आईएसआई की सबसे महत्वपूर्ण जीत मानी जाती है। Delhi News