दिल्ली के जंगपुरा में मद्रासी कैंप पर चला बुलडोजर, 300 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त
Delhi News
दिल्ली
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:01 AM
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RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:01 AM
Delhi News : राजधानी दिल्ली के जंगपुरा इलाके में वर्षों से बसे मद्रासी कैंप पर प्रशासन का बुलडोजर रविवार को चल पड़ा। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 200 से अधिक अस्थायी आवासों को ध्वस्त किया जा चुका है। कुल मिलाकर यहां 300 से अधिक निर्माण अवैध घोषित किए गए हैं।
कार्रवाई से पहले तैनात की गई फोर्स
सुबह तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की भी भारी तैनाती रही। अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए कई जेसीबी मशीनों और बुलडोजरों को लगाया गया। किसी भी संभावित विरोध या अव्यवस्था से निपटने के लिए पैरामिलिट्री बलों की अतिरिक्त टुकड़ियाँ भी मौके पर मौजूद रहीं। Delhi News
स्थानीय निवासियों का विरोध और धरना
कार्यवाही के दौरान स्थानीय निवासियों ने विरोध दर्ज किया और धरने पर बैठ गए। कुछ लोगों को पुलिस द्वारा हटाया भी गया। उनका आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना उजाड़ने की कार्रवाई की है, जिससे वे अब आवासहीन हो रहे हैं। इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि 9 मई को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश है, जिसमें मद्रासी कैंप को अवैध अतिक्रमण घोषित करते हुए हटाने का निर्देश दिया गया था। आदेश में कहा गया कि बस्ती बारापूला नाले के किनारे स्थित है, जो मानसून में जलभराव, बीमारियों और स्वच्छता संकट का बड़ा कारण बनता है। नाले की सफाई और जल निकासी सुधारने के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है। Delhi News
पुनर्वास पर विवाद : सभी को नहीं मिले फ्लैट
प्रशासन का दावा है कि पुनर्वास के लिए नरेला में फ्लैट आवंटित किए गए हैं। लेकिन मद्रासी कैंप के निवासियों का आरोप है कि सिर्फ 189 परिवारों को ही वैकल्पिक आवास मिले हैं, जबकि बाकी सैकड़ों परिवारों को कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिली है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग अब भी विरोध कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि "हम जाएं तो जाएं कहां?" Delhi News
समाज के लिए व्यापक संदेश
यह कार्रवाई दिल्ली में अतिक्रमण के खिलाफ चल रही बड़ी मुहिम का हिस्सा है, लेकिन इसके साथ ही यह एक बार फिर पुनर्वास और मानवीय संवेदना की बहस को भी सामने लाती है। अदालत का आदेश एक ओर है, लेकिन जमीन पर जीवन जी रहे हजारों लोगों की वास्तविकता और असुरक्षा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Delhi News